कांगो नदी प्रणाली में अफ्रीकी मैनाटी की उपस्थिति की पुष्टि: संरक्षण के लिए नए आयाम

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

कांगो गणराज्य की कौइलू नदी प्रणाली में अफ्रीकी मैनाटी (ट्राइचेकस सेनेगलेंसिस) की उपस्थिति की पुष्टि एक महत्वपूर्ण संरक्षण उपलब्धि है। यह खोज इस शाकाहारी जलीय स्तनपायी के आवास विस्तार और पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करती है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में 'असुरक्षित' (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अफ्रीकी मैनाटी सेनेगल से अंगोला तक पश्चिमी अफ्रीका के विशाल क्षेत्र में फैले हुए हैं, जो इसे सभी सायरनियन प्रजातियों में सबसे बड़ा भौगोलिक विस्तार प्रदान करता है।

इस सत्यापन कार्य में मैलर्का-आधारित संघ तुर्सियोप्स (Tursiops) और जेन गुडाल इंस्टीट्यूट के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी शामिल थी। तुर्सियोप्स, जो भूमध्यसागरीय सीटेसियन के अध्ययन और संरक्षण के लिए विज्ञान-आधारित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करता है, ने इस क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग किया। शोधकर्ताओं ने सीधे तौर पर मैनाटी को देखा, जिसमें एक माँ और उसके बछड़े का दृश्य भी शामिल था, हालांकि नदी के अत्यधिक गंदले पानी के कारण यह कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। तुर्सियोप्स ने जैव-ध्वनिक डेटा एकत्र करने के लिए हाइड्रोफोन का उपयोग किया और स्थानीय कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया, जो ऐसे पानी में प्रजाति के अध्ययन के लिए एक नवीन दृष्टिकोण है जहाँ दृश्य पहचान मुश्किल होती है।

वर्ष 2025 के हालिया अध्ययनों ने पर्यावरण डीएनए (eDNA) और पानी के नीचे के कैमरों का उपयोग करके कौइलू नदी में मैनाटी की उपस्थिति को और अधिक मान्य किया है। eDNA तकनीक, जो पर्यावरण से छोड़े गए आनुवंशिक पदार्थ का विश्लेषण करती है, कम घनत्व वाली या दृश्य रूप से पहचानना मुश्किल प्रजातियों का पता लगाने में विशेष रूप से उपयोगी है, जैसे कि अफ्रीका में मैनाटी। इस वैज्ञानिक प्रमाण ने इस विशिष्ट नदी खंड में प्रजातियों की पूर्व में अप्रलेखित उपस्थिति को स्थापित किया है, जो संरक्षण प्रबंधन के लिए एक नया आधार प्रदान करता है।

इस पुष्टि ने त्चिनपौंगा प्राकृतिक रिजर्व के विस्तार के प्रयासों को मजबूती प्रदान की है, जो पहले चिंपैंजी संरक्षण के लिए जाना जाता था, लेकिन अब मैनाटी के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है। संरक्षण के दृष्टिकोण से, इस खोज के बाद मोटरबोट बहिष्करण क्षेत्रों (motorboat exclusion zones) की स्थापना जैसे उपाय प्रस्तावित किए गए हैं। अफ्रीकी मैनाटी को शिकार, मछली पकड़ने के जाल में आकस्मिक फंसने और बांधों के निर्माण के कारण आवास विखंडन जैसी कई गंभीर खतरों का सामना करना पड़ता है, जो आबादी को अलग-थलग कर देते हैं।

त्चिनपौंगा प्राकृतिक रिजर्व, जो कौइलू नदी के मुहाने के पास स्थित है, में मैनाटी की एक छोटी आबादी का होना दर्ज किया गया है, और जेन गुडाल इंस्टीट्यूट इस क्षेत्र के प्रबंधन में सरकार के साथ साझेदारी करता है। इस क्षेत्र में मैनाटी की पुष्टि से HELP Congo जैसे संगठनों द्वारा 2023 से चलाए जा रहे संरक्षण कार्यक्रमों को बल मिलता है, जिनका उद्देश्य मानव गतिविधियों के प्रभाव को समझना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा करना है। यह वैज्ञानिक सत्यापन इस बात पर प्रकाश डालता है कि अफ्रीकी मैनाटी, जो दुनिया की सबसे कम अध्ययन की गई सायरनियन प्रजातियों में से एक है, अभी भी अप्रत्याशित जलमार्गों में मौजूद है, और सहयोगी वैज्ञानिक अनुसंधान वितरण को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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स्रोतों

  • Última Hora

  • O Antagonista

  • UICN

  • ResearchGate

  • SciSpace

  • Marilles Foundation

  • The Guardian

  • Deccan Chronicle

  • IFLScience

  • Chester Zoo

  • Malay Mail

  • Mongabay

  • Chester Zoo

  • SWNS

  • GOV.UK

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