सकारात्मक जीवनशैली मस्तिष्क की आयु को आठ वर्ष तक कम कर सकती है: शोध
द्वारा संपादित: gaya ❤️ one
फ्लोरिडा विश्वविद्यालय (यूएफ) के नवीनतम शोध के अनुसार, सकारात्मक जीवनशैली की आदतें मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को उल्लेखनीय रूप से धीमा कर सकती हैं, जिससे मस्तिष्क की जैविक आयु उसकी कालानुक्रमिक आयु की तुलना में आठ वर्ष तक कम प्रतीत हो सकती है। यह दो वर्षीय अध्ययन मध्य-आयु वर्ग और वृद्ध वयस्कों के एक समूह पर केंद्रित था, जिनमें से अधिकांश प्रतिभागी पुराने मस्कुलोस्केलेटल दर्द से पीड़ित थे या घुटने के पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के जोखिम में थे।
शोधकर्ताओं ने प्रत्येक प्रतिभागी के 'मस्तिष्क की आयु' की गणना करने के लिए एमआरआई स्कैन और मशीन लर्निंग विश्लेषण का उपयोग किया, और इस जैविक माप की तुलना उनकी वास्तविक कालानुक्रमिक आयु से की। धीमी गति से उम्र बढ़ने से दृढ़ता से जुड़े प्रमुख सुरक्षात्मक कारकों में आशावाद का उच्च स्तर, गुणवत्तापूर्ण नींद, प्रभावी तनाव प्रबंधन और मजबूत सामाजिक समर्थन शामिल थे। जिन अध्ययन प्रतिभागियों ने सबसे अधिक सुरक्षात्मक व्यवहारों की सूचना दी, उनके मस्तिष्क अध्ययन की शुरुआत में उनकी कालानुक्रमिक आयु से आठ वर्ष छोटे दिखाई दिए, और अगले दो वर्षों में उनके मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की गति भी धीमी रही। यूएफ में वरिष्ठ लेखक डॉ. किम्बर्ली सिबिल ने इस बात पर जोर दिया कि ये स्वास्थ्य-संवर्धक व्यवहार जैविक रूप से सार्थक लाभ प्रदान करते हैं, जो इस अवधारणा को पुष्ट करता है कि "जीवनशैली ही औषधि है"।
इसके विपरीत, पुराने दर्द और सामाजिक विपन्नता जैसे तनावपूर्ण कारक पुराने दिखने वाले मस्तिष्क से जुड़े थे, हालांकि सकारात्मक आदतों के लाभ अधिक स्थायी पाए गए। अध्ययन में यह भी पुष्टि की गई कि स्वस्थ वजन बनाए रखना और तंबाकू के उपयोग से बचना भी मस्तिष्क की उम्र बढ़ने को धीमा करने में सहायक है। शोधकर्ताओं ने पाया कि निम्न आय और कम शिक्षा जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों का नकारात्मक प्रभाव समय के साथ कम हो गया, जबकि सकारात्मक जीवनशैली कारकों के लाभ अधिक प्रबल और दीर्घकालिक सिद्ध हुए।
इस बीच, लिमरिक विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अलग, बड़े पैमाने के शोध ने व्यक्तित्व लक्षणों और दीर्घायु के जोखिम के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध स्थापित किया है। इस अध्ययन में पांच प्रमुख व्यक्तित्व लक्षणों का विश्लेषण किया गया, जिसमें 569,859 लोग शामिल थे, और 5,997,667 व्यक्ति-वर्षों के डेटा का मूल्यांकन किया गया। लिमरिक विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की सहायक प्रोफेसर डॉ. मैरी मैकगीहान के नेतृत्व में यह शोध किया गया।
लिमरिक के शोध के प्रमुख निष्कर्षों में यह शामिल था कि उच्च स्तर का विक्षिप्तता (न्यूरोटिसिज्म), जो चिंता और भावनात्मक अस्थिरता की विशेषता है, समय से पहले मृत्यु के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा था, विशेष रूप से युवा वयस्कों में। इसके विपरीत, उच्च कर्तव्यनिष्ठा (कन्शियसनेस), जो संगठित और आत्म-अनुशासित होने की प्रवृत्ति है, मृत्यु के कम जोखिम से जुड़ी थी, जिसमें कर्तव्यनिष्ठा में एक अंक की वृद्धि मृत्यु दर में 10 प्रतिशत की कमी से जुड़ी थी। इसके अतिरिक्त, बहिर्मुखता (एक्स्ट्रावर्जन), जो सामाजिक जुड़ाव की प्राथमिकता है, भी मृत्यु के कम जोखिम से जुड़ी थी, हालांकि यह प्रभाव संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अधिक स्पष्ट था। खुलेपन और सहमतता (एग्रीएबलनेस) के लक्षणों का स्वास्थ्य परिणामों के साथ कोई सुसंगत संबंध नहीं पाया गया।
लिमरिक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि व्यक्तित्व का दीर्घायु पर प्रभाव स्वास्थ्य व्यवहार और जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है, और यह प्रभाव अक्सर सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य निर्धारकों के समान महत्वपूर्ण होता है। यह निष्कर्ष इस बात को रेखांकित करता है कि मस्तिष्क स्वास्थ्य और दीर्घायु दोनों ही दैनिक जीवन के विकल्पों और आंतरिक मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों से गहराई से जुड़े हुए हैं, जो एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
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स्रोतों
ТСН.ua
University of Florida
Health News
Express newspaper
University of Limerick
Limerick's Live 95
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