चालीसवें दशक की थकान: जैविक बदलाव और जीवन की दोहरी जिम्मेदारियाँ
द्वारा संपादित: Olga Samsonova
वयस्क जीवन का वह दशक जिसमें सर्वाधिक ऊर्जा क्षीणता का अनुभव होता है, वह चालीसवाँ वर्ष है, जिसका मुख्य कारण जैविक प्रक्रियाओं में आने वाली मंदी और जीवन की जिम्मेदारियों का चरम पर होना है। यह वैज्ञानिक सहमति अब उभर रही है, जो इस आयु वर्ग के व्यक्तियों द्वारा अनुभव की जा रही गहन थकावट को एक व्यवस्थित घटना के रूप में पहचानती है।
शारीरिक क्षमता में गिरावट की शुरुआत लगभग 35 वर्ष की आयु से ही होने लगती है, जो धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इस प्रक्रिया का एक प्रमुख कारक माइटोकॉन्ड्रिया की दक्षता में कमी आना है, जो कोशिकाओं के ऊर्जा उत्पादन को घटाता है। माइटोकॉन्ड्रियल स्वास्थ्य, जो कोशिकाओं के ऊर्जा स्रोत के रूप में कार्य करता है, उम्र बढ़ने के साथ जटिल रूप से जुड़ा हुआ है, और इसकी कार्यक्षमता में कमी से ऊर्जा की खपत प्रभावित होती है। पुरुषों में, 40 वर्ष की आयु के बाद टेस्टोस्टेरोन के स्तर में प्रति वर्ष 1-2% की क्रमिक कमी भी इस थकान में योगदान कर सकती है, जैसा कि डॉ. मेहमत पोर्टकल जैसे विशेषज्ञों ने बताया है, जो पुरुषों के स्वास्थ्य को एक समग्र प्रणाली मानते हैं।
इस अवधि के दौरान हार्मोनल परिवर्तन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेष रूप से महिलाओं में पेरिमेनोपॉज से जुड़े बदलाव, जो नींद की गुणवत्ता और समग्र ऊर्जा स्तरों को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। पेरिमेनोपॉज, जो आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद आता है, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण होता है, जिससे थकान के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। महिलाओं में क्रोनिक फैटीग सिंड्रोम का जोखिम पुरुषों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक पाया गया है, जिसकी औसत शुरुआत की आयु 30-40 वर्ष बताई गई है।
इन जैविक कारकों के साथ-साथ, यह दशक 'सैंडविच पीढ़ी' के दबावों के अभिसरण को भी चिह्नित करता है, जहाँ व्यक्ति एक ओर अपने बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी उठाते हैं और दूसरी ओर वृद्ध माता-पिता की देखभाल का दायित्व भी निभाते हैं। भारत में, जहाँ अनुमान है कि 2036 तक लगभग 23 करोड़ वरिष्ठ नागरिक होंगे, जो कुल जनसंख्या का लगभग 15% होंगे, यह दोहरी जिम्मेदारी मानसिक तनाव और समय की कमी को चरम पर पहुँचाती है। इस दबाव के कारण हृदय स्वास्थ्य और मस्तिष्क स्वास्थ्य के बीच का तालमेल भी प्रभावित होता है।
विशेषज्ञ इस दशक को एक 'पुनर्संरचना दशक' के रूप में पुष्टि करते हैं, जिसके लिए इस बहुआयामी थकावट का प्रबंधन करने हेतु विश्राम और पोषण की रणनीतियों को अद्यतन करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, डॉ. सीमा यादव जैसे चिकित्सकों ने 40 की उम्र के बाद थकान से निपटने के लिए स्वस्थ वसा के सेवन, नियमित व्यायाम और पूरी नींद चक्र को बनाए रखने जैसे उपायों की सलाह दी है। इस आयु वर्ग में, एक जगह बैठे रहने की आदत को धूम्रपान जितना ही खतरनाक माना जाता है, और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को नजरअंदाज करना एक बड़ी गलती हो सकती है, क्योंकि 40 के बाद हर दशक में 3 से 5 प्रतिशत मांसपेशियां कम हो जाती हैं। इस प्रकार, चालीसवाँ वर्ष केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण जाँच बिंदु है जहाँ शारीरिक संकेतों को पहचानना और सक्रिय रूप से आत्म-देखभाल को अपनाना आने वाले वर्षों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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स्रोतों
News18
VICE
UConn Today
Narayana Health
Milann | The Fertility Specialist
Texas Public Radio
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