सौर फ्लीयर को क्या शक्ति देता है? Solar Orbiter अंततः इस दीर्घ-स्थायी पहेली के उत्तर दे रहा है। मिशन ने सूरज की सतह पर एक 'चुम्बकीय हिमपात' को फ़्लेयर रिलीज़ होने से ठीक पहले पकड़ लिया।
जनवरी 2026 के शुरुआती दिनों में सूर्य की बढ़ी हुई गतिविधि के बीच, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और नासा (NASA) का संयुक्त सोलर ऑर्बिटर मिशन महत्वपूर्ण अवलोकन डेटा प्रदान कर रहा है। इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य यह समझना है कि सूर्य अपने चारों ओर के सौरमंडल, जिसे हेलियोस्फीयर कहा जाता है, को कैसे उत्पन्न और नियंत्रित करता है। फरवरी 2020 में प्रक्षेपित सोलर ऑर्बिटर, बुध ग्रह की कक्षा से भी करीब जाकर सूर्य का अवलोकन करता है, जिससे यह पृथ्वी-आधारित वेधशालाओं के लिए दुर्गम उच्च-अक्षांश क्षेत्रों की तस्वीरें लेने में सक्षम होता है। इस संयुक्त मिशन की अनुमानित लागत लगभग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसका प्रारंभिक परिचालन 2026 के अंत तक निर्धारित है, जिसमें 2030 तक विस्तार की संभावना है।
इस अवधि के दौरान, सौर भौतिकी के लिए महत्वपूर्ण घटनाएँ घटीं, जिनमें 18 जनवरी 2026 को एक शक्तिशाली एक्स-क्लास सौर ज्वाला का विस्फोट शामिल था। इस ज्वाला के बाद एक तीव्र कोरोनल मास इजेक्शन (CME) हुआ, जो 19 जनवरी 2026 को पृथ्वी से टकराया, जिसके परिणामस्वरूप GOES पैमाने पर S4 (गंभीर) के रूप में वर्गीकृत एक तीव्र सौर विकिरण तूफान आया। राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के अनुसार, S4 स्तर की यह घटना अक्टूबर 2003 के 'हैलोवीन' तूफान के बाद सबसे तीव्र थी। इस घटना ने ध्रुवीय मार्गों पर अंतरिक्ष यात्रियों और उड़ानों के लिए विकिरण जोखिम को बढ़ाया, साथ ही भूस्थैतिक कक्षा में उपग्रहों और उच्च आवृत्ति (HF) रेडियो संचार को प्रभावित किया।
सोलर ऑर्बिटर की अनूठी कक्षा, जो इसे सूर्य के करीब लगभग 0.284 खगोलीय इकाई तक लाती है, इसे हेलियोस्फीयर के आंतरिक, अनछुए क्षेत्रों का अध्ययन करने की अनुमति देती है। मिशन की उच्च-अक्षांश विज्ञान चरण फरवरी 2025 में शुरू हुई, जिसने अंतरिक्ष यान को सौर भूमध्य रेखा से 17° के अधिकतम झुकाव तक पहुँचाया। यह झुकाव 2026 के अंत तक 24° तक बढ़ने वाला है, जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों के अधिक व्यापक दृश्य प्राप्त होंगे, जो सौर चक्र की वर्तमान समझ के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सूर्य हाल ही में अपने वर्तमान सौर चक्र के चरम को पार कर चुका है।
अतीत की सफलताओं ने भविष्य के लिए आधार तैयार किया है: सोलर ऑर्बिटर और नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (SDO) के संयुक्त डेटा का उपयोग करके, वैज्ञानिकों ने अप्रैल से जुलाई 2024 के बीच सक्रिय क्षेत्र NOAA 13664 को लगातार 94 दिनों तक ट्रैक किया। यह किसी एक सौर सक्रिय क्षेत्र का सबसे लंबा निरंतर अवलोकन रिकॉर्ड है, जिसने वैज्ञानिकों को इसके जन्म से लेकर क्षय तक के पूरे जीवन चक्र का अध्ययन करने की अनुमति दी। इस तरह के विस्तृत डेटा संग्रह से सौर भौतिकी की गहरी समझ विकसित होती है, जो भविष्य के अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी में सहायता करती है।
आगे की वैज्ञानिक चर्चा के लिए, ESA/NASA सोलर ऑर्बिटर, नासा के IRIS, और ISRO के आदित्य मिशनों की प्रगति पर केंद्रित एक संयुक्त वैज्ञानिक कार्यशाला बर्लिन में 16 से 19 मार्च 2026 तक हार्नैक हाउस में आयोजित होने वाली है। यह बैठक हेलियोस्फीयर से लेकर सूर्य के आंतरिक भाग तक के विषयों को कवर करेगी और हेलियोस्फीयर को आकार देने में चुंबकीय क्षेत्र की भूमिका पर प्रकाश डालेगी। जनवरी 2026 की इस तीव्र गतिविधि के मद्देनजर, ESA ने पुष्टि की है कि इस तरह की अंतरिक्ष मौसम की घटनाओं की निरंतर निगरानी आगामी आर्टेमिस मिशनों के लिए महत्वपूर्ण है, जो इस वर्ष चंद्रमा पर अपने पहले अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले हैं।