घोड़ों की विश्राम शैली: खड़े रहकर हल्की नींद और REM नींद की आवश्यकता
द्वारा संपादित: Olga Samsonova
घोड़ों में खड़े रहकर झपकी लेने की अनूठी क्षमता उनके विकासवादी इतिहास की एक महत्वपूर्ण देन है, जो उन्हें शिकार बनने वाले प्राणियों की श्रेणी में रखती है। यह अनुकूलन उन्हें खुले परिवेश में संभावित खतरों के प्रति तत्काल प्रतिक्रिया देने और तेजी से भागने की स्थिति बनाए रखने की अनुमति देता है। यह जैविक अनिवार्यता उनके अस्तित्व की कुंजी रही है, क्योंकि लेटे हुए प्राणी को खतरे की स्थिति में उठने में लगने वाला कुछ सेकंड का विलंब भी घातक सिद्ध हो सकता है।
इस खड़े रहने के दौरान आराम प्राप्त करने के लिए, घोड़े एक विशेष शारीरिक संरचना का उपयोग करते हैं जिसे 'स्टे अपैरेटस' कहा जाता है। यह तंत्र उनके प्रमुख जोड़ों, जैसे घुटनों और टखनों, को निष्क्रिय रूप से 'लॉक' कर देता है, जिससे कंकाल तंत्र बिना अधिक मांसपेशीय प्रयास के शरीर का भार वहन करता है। इस 'लॉकिंग' व्यवस्था के कारण, घोड़े अपनी मांसपेशियों को शिथिल कर सकते हैं और खड़े-खड़े हल्की नींद (स्लो-वेव स्लीप) ले सकते हैं, जिससे उनकी ऊर्जा का संरक्षण होता है। यह प्रक्रिया उन्हें लगातार सतर्कता बनाए रखने में सहायता करती है, क्योंकि वे बारी-बारी से अपने पैरों को आराम देते हैं, जिससे किसी भी पैर पर अत्यधिक तनाव नहीं पड़ता।
हालांकि, गहन विश्राम और मस्तिष्क कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक रैपिड आई मूवमेंट (REM) नींद प्राप्त करने हेतु घोड़ों को जमीन पर लेटना अनिवार्य होता है। वयस्क घोड़ों को प्रतिदिन औसतन केवल 30 मिनट से लेकर दो घंटे तक की REM नींद की आवश्यकता होती है, जो उनकी कुल नींद का एक छोटा हिस्सा है। यह गहरी नींद आमतौर पर तब ली जाती है जब परिवेश पूर्णतः सुरक्षित महसूस होता है, जैसे कि शांत अस्तबल में या जब झुंड के अन्य सदस्य पहरेदारी कर रहे हों। यदि घोड़े लंबे समय तक लेटे रहते हैं, तो उनके फेफड़ों और पेट पर दबाव बढ़ने से रक्त संचार बाधित हो सकता है, जो उनके लिए हानिकारक है।
घरेलू घोड़ों के कल्याण के दृष्टिकोण से, इस खड़े रहने वाले हल्के आराम और गहरी REM नींद की आवश्यकता के बीच संतुलन को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। पशु कल्याण विशेषज्ञों के अवलोकन के अनुसार, यदि घोड़े को पर्याप्त गहरी नींद नहीं मिलती है, तो वे नींद की कमी या अचानक पतन जैसी स्थितियों का अनुभव कर सकते हैं। घोड़े का विकास, जिसका सबसे प्राचीन ज्ञात पूर्वज ईओहिप्पस या हाइरैकोथीरियम था, जो लगभग 5,50,00,000 वर्ष पूर्व ईयोसीन युग में उत्पन्न हुआ, निरंतर शिकारियों से बचने की आवश्यकता से प्रेरित रहा है। प्राचीन भारतीय ग्रंथ शालिहोत्र में भी अश्व चिकित्सा और घोड़ों के गुणों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
घोड़ों की शारीरिक बनावट, जिसमें उनकी सीधी और लंबी रीढ़ की हड्डी शामिल है, उन्हें बैठने की स्थिति में असहज बनाती है, क्योंकि इससे उनके आंतरिक अंगों पर दबाव पड़ता है और फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यह जैविक मजबूरी उन्हें हमेशा 'तैयार' स्थिति में रहने के लिए प्रेरित करती है। घोड़े अपनी ऊर्जा और ताकत के कारण मनुष्यों की तुलना में बहुत कम नींद लेते हैं, कुछ अनुमानों के अनुसार वे दिन भर में कुल 2.9 से 5 घंटे तक ही आराम करते हैं, जिसे वे छोटी-छोटी झपकियों में पूरा करते हैं। इस प्रकार, घोड़े का खड़ा रहना केवल एक आदत नहीं, बल्कि लाखों वर्षों के विकास का परिणाम है जो उनकी सुरक्षा और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को सुनिश्चित करता है।
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स्रोतों
Postoast
Wikipedia
Onlinepethealth
Encyclopedia Britannica
The Equine Institute
The Indian Express
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