गाजा में शांति योजना के दूसरे चरण की शुरुआत: हमास के निरस्त्रीकरण पर गहराते मतभेद और कूटनीतिक चुनौतियां

द्वारा संपादित: Tatyana Hurynovich

14 जनवरी, 2026 को गाजा पट्टी के भविष्य को लेकर ट्रंप प्रशासन द्वारा तैयार की गई शांति योजना के दूसरे चरण की आधिकारिक रूप से शुरुआत हुई। इस नए चरण का मुख्य उद्देश्य युद्धविराम की स्थिति से आगे बढ़कर क्षेत्र के विसैन्यीकरण, एक कुशल तकनीकी शासन (technocratic governance) की स्थापना और युद्ध से तबाह हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना है। इस रणनीतिक पहल के तहत 'नेशनल कमेटी फॉर गाजा मैनेजमेंट' (NCGM) का गठन किया गया है, जिसे क्षेत्र में नागरिक सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस नवगठित समिति के नेतृत्व के लिए फिलिस्तीनी प्राधिकरण के पूर्व उप मंत्री अली शात (Ali Shaat) को अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। अली शात के प्रशासनिक कार्यों और समिति की गतिविधियों की देखरेख का जिम्मा संयुक्त राष्ट्र के पूर्व विशेष दूत निकोले म्लादेनोव (Nickolay Mladenov) को दिया गया है। म्लादेनोव इस क्षेत्र में 'उच्च प्रतिनिधि' (High Representative) के रूप में कार्य करेंगे, जिससे इस पूरी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रदान की जा सके।

प्रशासनिक ढांचे की बात करें तो एनसीजीएम में 15 फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट शामिल किए गए हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं। समिति के अध्यक्ष अली शात ने अपने विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका संगठन "हथियारों के बजाय बुद्धि और कौशल" के आधार पर शासन चलाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समिति अपनी कार्यप्रणाली में किसी भी सशस्त्र समूह के साथ कोई समन्वय या सहयोग नहीं करेगी, जो कि क्षेत्र में एक स्वतंत्र नागरिक प्रशासन की स्थापना की दिशा में एक साहसिक कदम है।

हालांकि, इस शांति प्रक्रिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण बनी हुई है। हमास ने वर्तमान में हल्के छोटे हथियारों को भी सौंपने से पूरी तरह इनकार कर दिया है, जिससे गतिरोध पैदा हो गया है। इस स्थिति पर वाशिंगटन ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया गया, तो इसके "गंभीर परिणाम" हो सकते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय दबाव इस योजना की सफलता के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

सुरक्षा के मोर्चे पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) के आंकड़ों के अनुसार, 10 अक्टूबर, 2025 से अब तक युद्धविराम के कम से कम 78 उल्लंघन दर्ज किए गए हैं। हिंसा की हालिया घटना 13 जनवरी, 2026 को राफा में हुई, जहां एक इजरायली टैंक को निशाना बनाया गया। इस हमले के जवाब में, 15 जनवरी, 2026 को इजरायल ने फिर से हवाई हमले शुरू कर दिए, जिससे शांति वार्ता में एक बार फिर अस्थिरता पैदा हो गई है।

वर्तमान कूटनीतिक स्थिति यह है कि इजरायल ने अपनी सेना को "येलो लाइन" (Yellow Line) के पीछे हटाने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर हमास के निरस्त्रीकरण में होने वाली प्रगति से जोड़ दिया है। इजरायली पक्ष का मानना है कि जब तक हथियारों के समर्पण और सुरक्षा गारंटी पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक सेना की वापसी संभव नहीं है। इस प्रकार, गाजा का भविष्य अब पूरी तरह से इस बात पर निर्भर है कि आने वाले हफ्तों में विसैन्यीकरण के मुद्दे पर कितनी प्रगति होती है।

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स्रोतों

  • اليوم السابع

  • FDD

  • Il Riformista

  • العين الإخبارية

  • euronews

  • بوابة الأهرام

  • NATO News

  • Doha Forum

  • Asharq Al-Awsat

  • EgyptToday

  • The Washington Post

  • Reuters

  • Foundation for Defense of Democracies (FDD)

  • Time Magazine

  • The Guardian

  • IranWire

  • Al Jazeera

  • Reuters

  • Middle East Monitor

  • Chatham House

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  • U.S. Department of State

  • Business Today

  • YouTube

  • JINSA

  • U.S. Department of the Treasury

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