कामकाजी कुत्तों के मस्तिष्क का आकार पालतू नस्लों की तुलना में छोटा: शोध के नए निष्कर्ष
द्वारा संपादित: Katerina S.
वैज्ञानिक समुदाय में लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि स्तनधारियों में शरीर के वजन की तुलना में बड़ा मस्तिष्क उच्च बुद्धिमत्ता का संकेत है। जंगली जीवों के मामले में यह धारणा अक्सर सही साबित होती है, लेकिन हालिया शोध एक अलग ही कहानी बयां करते हैं। पालतू कुत्तों के मामले में, चयनात्मक प्रजनन (selective breeding) ने इस सार्वभौमिक नियम को बदल दिया है, जिससे मस्तिष्क के आयतन और संज्ञानात्मक क्षमताओं के बीच के सीधे संबंध पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस विषय पर गहराई से अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने 172 विभिन्न नस्लों के 1,600 से अधिक कुत्तों की खोपड़ियों का विस्तृत विश्लेषण किया। मोंटपेलियर विश्वविद्यालय (University of Montpellier) और ज्यूरिख विश्वविद्यालय (University of Zurich) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के शोधकर्ताओं ने 'रिलेटिव एंडोक्रानियल वॉल्यूम' (REV) का उपयोग किया। 'बायोलॉजी लेटर्स' (Biology Letters) पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के परिणामों ने नस्ल के कार्य और व्यवहार संबंधी विशेषताओं के बीच अप्रत्याशित संबंध उजागर किए हैं।
शोध के चौंकाने वाले परिणामों से पता चला कि जिन कुत्तों को आत्म-नियंत्रण, सहनशक्ति और जटिल संज्ञानात्मक कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया गया है, उनका REV सबसे कम था। चरवाहा कुत्तों (herding dogs) और खोज एवं बचाव (search-and-rescue) कार्यों में लगे कुत्तों, जैसे कि रॉटवाइलर (Rottweilers) और साइबेरियन हस्की (Siberian Huskies) में शरीर के अनुपात में मस्तिष्क का आकार काफी छोटा पाया गया। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि उनकी असाधारण क्षमताएं मस्तिष्क के आकार पर नहीं, बल्कि तंत्रिका नेटवर्क (neural networks) के अधिक कुशल और विशिष्ट संगठन पर निर्भर करती हैं।
इसके विपरीत, चिहुआहुआ (Chihuahuas) और पोमेरेनियन (Pomeranians) जैसी छोटी सजावटी नस्लें, जिन्हें मुख्य रूप से साथ निभाने के लिए पाला गया है, उनमें सापेक्ष मस्तिष्क आयतन (REV) सबसे अधिक देखा गया। अध्ययन के अनुसार, उच्च REV वाली इन नस्लों में अक्सर अलगाव की चिंता (separation anxiety), डर और ध्यान आकर्षित करने की तीव्र इच्छा जैसे व्यवहार संबंधी लक्षण अधिक पाए जाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सामाजिक मेलजोल के लिए किए गए चयनात्मक प्रजनन ने विकासवादी दिशा को उन व्यवहारों की ओर मोड़ दिया है जिनमें बड़े मस्तिष्क की आवश्यकता नहीं होती।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह शोध पुष्टि करता है कि पालतू कुत्तों का मस्तिष्क उनके पूर्वजों, यानी ग्रे भेड़ियों (gray wolves) की तुलना में औसतन 20% छोटा होता है। मस्तिष्क के आकार में यह कमी लगभग 25,000 साल पहले शुरू हुई पालतू बनाने की प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में ही आ गई थी। हालांकि, आधुनिक समय में शहरीकरण और जटिल सामाजिक परिवेश के कारण नई नस्लों के मस्तिष्क के आकार में प्राचीन नस्लों की तुलना में वृद्धि देखी गई है। इओट्वोस लोरैंड विश्वविद्यालय (Eötvös Loránd University) की एनिको कुबिनी (Enikő Kubinyi) का मानना है कि मानव द्वारा निर्धारित कठिन वातावरण और बढ़ती मांगों ने आधुनिक नस्लों में इस विकास को प्रेरित किया होगा।
निष्कर्षतः, मानव-प्रेरित विकास ने कुत्तों के मस्तिष्क की संरचना को मौलिक रूप से बदल दिया है। यहाँ सफलता का पैमाना मस्तिष्क का कुल आकार नहीं, बल्कि कार्यात्मक विशेषज्ञता (functional specialization) बन गया है। यह स्पष्ट है कि किसी कुत्ते की सीखने की क्षमता सीधे तौर पर उसके मस्तिष्क के सापेक्ष आयतन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि उसका मस्तिष्क विशिष्ट कार्यों के लिए कितना बेहतर तरीके से अनुकूलित है।
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स्रोतों
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