चीन की बड़ी पहल: 1 मई 2026 से 53 अफ्रीकी देशों के लिए आयात शुल्क पूरी तरह समाप्त होगा
द्वारा संपादित: Tatyana Hurynovich
चीन जनवादी गणराज्य ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए उन 53 अफ्रीकी देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क को पूरी तरह से शून्य करने का निर्णय लिया है, जिनके बीजिंग के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध हैं। इस महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की घोषणा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 14 फरवरी, 2026 को इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में आयोजित 39वें वार्षिक अफ्रीकी संघ (AU) शिखर सम्मेलन के दौरान की। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह नई तरजीही कर व्यवस्था 1 मई, 2026 से प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी, जो चीन-अफ्रीका व्यापार संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ेगी।
यह नई पहल वास्तव में उस मौजूदा कर छूट प्रणाली का एक व्यापक विस्तार है, जिसके तहत दिसंबर 2024 से 33 सबसे कम विकसित अफ्रीकी देशों (LDCs) को चीनी बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच की सुविधा दी गई थी। इस कदम का प्राथमिक उद्देश्य अफ्रीकी महाद्वीप से चीन को होने वाले निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि करना है, जो दोनों पक्षों के बीच 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को और अधिक सुदृढ़ करने की बीजिंग की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, चीनी प्रशासन ने 'ग्रीन चैनल' की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और अफ्रीकी उत्पादों के लिए आयात संबंधी कागजी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का भी आश्वासन दिया है।
शिखर सम्मेलन के दौरान, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के लिए चल रही बातचीत की प्रक्रिया को तेज करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस समझौते का उद्देश्य न केवल व्यापार बढ़ाना है, बल्कि उच्च मूल्य वर्धित (high value-added) अफ्रीकी वस्तुओं के लिए चीनी बाजार के दरवाजे खोलना भी है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन का यह निर्णय वैश्विक स्तर पर बढ़ते संरक्षणवाद और विशेष रूप से पिछले अमेरिकी प्रशासन द्वारा अपनाई गई टैरिफ नीतियों के जवाब में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें तो चीन और अफ्रीका के बीच बढ़ती व्यापारिक निर्भरता स्पष्ट दिखाई देती है। चीन के सामान्य सीमा शुल्क प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों पक्षों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 348.05 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2024 की तुलना में 17.7% की प्रभावशाली वृद्धि है। हालांकि, व्यापार के ढांचे में एक स्पष्ट असंतुलन बना हुआ है; जहां 2025 में चीन से अफ्रीका को होने वाला निर्यात 25.8% बढ़कर 225.03 अरब डॉलर हो गया, वहीं अफ्रीका से चीन को होने वाला आयात केवल 5.4% की वृद्धि के साथ 123.02 अरब डॉलर ही रहा। तुलना के लिए, 2024 में कुल व्यापार 295.56 अरब डॉलर था, जो उससे पिछले वर्ष की तुलना में 4.8% अधिक था।
इस शुल्क मुक्त योजना का लाभ पाने वाले 53 देशों की सूची में मोरक्को साम्राज्य भी शामिल है, जो उत्तरी अफ्रीका में एक प्रमुख आर्थिक शक्ति है। हालांकि, यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि किंगडम ऑफ एस्वातिनी (जिसे पहले स्वाजीलैंड के नाम से जाना जाता था) को इस सूची से बाहर रखा गया है। इसका मुख्य कारण एस्वातिनी द्वारा ताइवान को दी गई राजनयिक मान्यता है, जिसे बीजिंग अपनी 'एक चीन नीति' के तहत स्वीकार नहीं करता है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि चीन की आर्थिक प्राथमिकताएं और व्यापारिक रियायतें उसकी कूटनीतिक और राजनीतिक शर्तों के साथ गहराई से जुड़ी हुई हैं।
अफ्रीकी निर्यात-आयात बैंक (Afreximbank) जैसे प्रमुख वित्तीय और विश्लेषणात्मक संस्थानों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह भी सचेत किया है कि इन रियायतों का पूर्ण लाभ उठाने के लिए अफ्रीकी देशों को आंतरिक संरचनात्मक सुधार करने होंगे। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अफ्रीकी देशों को अपने लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे में सुधार करने और क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं (value chains) को विकसित करने की आवश्यकता है। अंततः, इस चीनी पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएं केवल कच्चे माल के निर्यात तक सीमित रहने के बजाय, उच्च मूल्य वाले तैयार उत्पादों के निर्यात में कितनी सक्षम हो पाती हैं।
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स्रोतों
Infomédiaire
Ecofin Agency
Discovery Alert
Africanews
Business Insider Africa
Hespress
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