मधुमेह प्रबंधन में अदरक और भूमध्यसागरीय मसालों के संयुक्त लाभों पर शोध
द्वारा संपादित: Olga Samsonova
हालिया वैज्ञानिक विश्लेषणों ने टाइप 2 मधुमेह मेलिटस के संकेतकों के प्रबंधन में अदरक को एक महत्वपूर्ण मसाला बताया है। यह निष्कर्ष प्राकृतिक यौगिकों की चिकित्सीय क्षमता की पुष्टि करने वाले अध्ययनों पर आधारित है। अदरक में मौजूद पॉलीफेनोल्स, विशेष रूप से जिंजरोल, शक्तिशाली सूजनरोधी प्रभाव प्रदर्शित करते हैं और इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सिडनी विश्वविद्यालय में हुए एक शोध में अदरक को टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से प्रभावी पाया गया है, क्योंकि इसके तत्व इंसुलिन की सहायता के बिना ग्लूकोज को मांसपेशियों की कोशिकाओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया को बढ़ा सकते हैं। एक व्यापक समीक्षा में यह पाया गया कि अदरक के सेवन से उपवास ग्लूकोज, एचबीए1सी (HbA1c), और इंसुलिन के स्तर में उल्लेखनीय कमी आई है। इस संदर्भ में, प्रतिदिन लगभग 600 से 3000 मिलीग्राम (mg) अदरक की खुराक ने प्रमुख बायोमार्करों पर स्पष्ट प्रभाव दिखाया है, जो रक्त शर्करा नियंत्रण का प्रयास कर रहे व्यक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, अदरक मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं जैसे लिवर, किडनी और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की सुरक्षा में भी सहायक सिद्ध हुई है।
अदरक के अलावा, भूमध्यसागरीय आहार में शामिल अन्य मसालों ने भी ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सामूहिक लाभ दर्शाए हैं, जिनमें काली जीरी, दालचीनी, हल्दी और केसर शामिल हैं। दालचीनी, उदाहरण के लिए, इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल और वसा को भी घटाने में सहायक है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन नामक सक्रिय यौगिक भी सूजन को कम करने और रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखने में मदद करता है, साथ ही यह अग्न्याशय की कोशिकाओं को क्षति से बचा सकता है। दालचीनी में मौजूद सिनामाल्डिहाइड यौगिक इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जिससे शरीर ग्लूकोज का बेहतर उपयोग कर पाता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, प्रतिदिन 2 ग्राम अदरक का सेवन शुगर को 12 प्रतिशत तक नियंत्रित कर सकता है।
आयुर्वेद में, अदरक का उपयोग प्राचीन काल से भारत और चीन के चिकित्सा ग्रंथों में एक शक्तिशाली पाचक के रूप में वर्णित है, जो पाचन अग्नि को उत्तेजित करता है। हालांकि, इन प्राकृतिक उपायों का उपयोग करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है। अदरक का अत्यधिक सेवन गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम पैदा कर सकता है और सामान्य रक्त शर्करा वाले व्यक्तियों को इससे बचना चाहिए। डाइटीशियन डॉक्टर सुगीता मुटरेजा के अनुसार, मेथी के दाने भी कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करके रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
इस प्रकार, अदरक और अन्य भूमध्यसागरीय मसालों का एकीकरण मधुमेह प्रबंधन के लिए एक बहुआयामी और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो केवल दवा पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक सहायक कदम है। इन मसालों का नियमित, संतुलित सेवन, विशेष रूप से सुबह खाली पेट अदरक का पानी पीना, पाचन तंत्र को मजबूत करने और वजन प्रबंधन में भी सहायता कर सकता है।
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स्रोतों
znaj.ua
Access Medical Labs Blogs
Surrey Live
MDPI
Bali clinic
Healthline
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