अदरक के स्वास्थ्य लाभों और पाक उपयोगों की पुष्टि

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

अदरक, जिसका वैज्ञानिक नाम जिंजिबर ऑफिसिनेल है, एक प्राचीन कंद है जिसका उपयोग सदियों से मसाले और पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है। यह मूल रूप से दक्षिण पूर्व एशिया का निवासी है और 2000 ईसा पूर्व तक भारत और चीन में फैल चुका था, जहाँ इसे आयुर्वेद और चीनी चिकित्सा प्रणालियों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। अदरक में जिंजरोल, शोगोल, पैराडोल और जिंजरोन जैसे प्रमुख जैवसक्रिय यौगिक मौजूद हैं, जो इसके औषधीय गुणों को बढ़ाते हैं। हालिया शोधों ने इसके दैनिक सेवन के लाभों को और अधिक मजबूती प्रदान की है।

नियमित रूप से अदरक का सेवन करने से व्यायाम के बाद होने वाली मांसपेशियों की पीड़ा में कमी देखी गई है। जॉर्जिया विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में, प्रतिभागियों को लगातार 11 दिनों तक अदरक के सप्लीमेंट्स दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कसरत के बाद पहले 24 घंटों में दर्द में लगभग 25 प्रतिशत तक की कमी का अनुभव हुआ। यह प्रभाव मुख्य रूप से जिंजरोल जैसे यौगिकों से प्राप्त अदरक के शक्तिशाली सूजनरोधी गुणों के कारण होता है। इसके अतिरिक्त, अदरक में 25 से अधिक एंटीऑक्सीडेंट विशेषताएं होती हैं, जो इसे फ्री रेडिकल्स से लड़ने और लिपिड पेरोक्सीडेशन को रोकने में प्रभावी बनाती हैं, जिससे यह हृदय रोग और मधुमेह जैसी उम्र संबंधी बीमारियों से बचाव में सहायक हो सकता है।

पाचन स्वास्थ्य के क्षेत्र में, अदरक एक सिद्ध सहायक है। यह गैस्ट्रिक गतिशीलता को बढ़ाकर और पाचक रसों के उत्पादन को प्रोत्साहित करके पाचन क्रिया को बेहतर कर सकता है, जिससे अपच, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। अदरक में मौजूद जिंजरोल पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है, जिससे भोजन का प्रसंस्करण तेज होता है। इसके अलावा, अदरक को मतली और मोशन सिकनेस को कम करने में भी प्रभावी पाया गया है, और यह पेट की परत की रक्षा करके सीने में जलन को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकता है। अदरक की यह बहुआयामी क्रिया इसे समग्र जीवन शक्ति और चयापचय समर्थन प्रदान करने वाला एक दैनिक सुपरफूड स्थापित करती है।

पाक कला में अदरक की बहुमुखी प्रतिभा अतुलनीय है, जो इसे भारतीय व्यंजनों का एक अभिन्न अंग बनाती है। इसे विभिन्न रूपों में दैनिक आहार में आसानी से शामिल किया जा सकता है। एक सरल और लोकप्रिय तरीका नींबू और शहद के साथ अदरक की चाय बनाना है, जो विशेष रूप से सर्दी और खांसी के मौसम में लाभकारी सिद्ध होती है। ताज़े अदरक को कद्दूकस करके सीधे स्टिर-फ्राई, सूप, करी और मैरिनेड में मिलाया जा सकता है, जिससे व्यंजनों में एक विशिष्ट गर्माहट और तीखापन आता है। पारंपरिक रूप से, सर्दियों में प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'अदरक पाक' भी तैयार किया जाता है, जिसमें अदरक को घी और मेवों के साथ पकाया जाता है।

ऐतिहासिक रूप से, अदरक का महत्व केवल स्वाद तक सीमित नहीं रहा है; रोमन काल में इसकी कीमत एक भाड़े के घोड़े के बराबर तक पहुँच गई थी, जो इसके मूल्य को दर्शाता है। वर्तमान वैश्विक उत्पादन में, भारत एक प्रमुख भूमिका निभाता है, जो 2023 के आंकड़ों के अनुसार कुल वैश्विक उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्पादित करता है। अदरक की खेती भारत के केरल, ओडिशा, असम, मेघालय और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में प्रमुखता से की जाती है। इस प्रकार, जिंजरोल और शोगोल जैसे सक्रिय तत्वों से समृद्ध यह जड़, अपने सिद्ध एंटी-इंफ्लेमेटरी, पाचन-सहायक और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण, स्वास्थ्य और पाक कला दोनों क्षेत्रों में अपनी केंद्रीय भूमिका को लगातार मजबूत कर रही है।

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स्रोतों

  • ElNacional.cat

  • Brieflands

  • vertexaisearch.cloud.google.com

  • News-Medical

  • Fit&Well

  • New Hope Network

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