अलास्का की ब्रूक्स रेंज में नदियाँ और धाराएँ चिंताजनक रूप से नारंगी रंग में बदल रही हैं। यह परिवर्तन पिघलते पर्माफ्रॉस्ट का सीधा परिणाम है, जिससे सदियों से जमी हुई मिट्टी पिघलती है और उसमें फंसे हुए खनिज, जैसे लोहा, कैडमियम और एल्यूमीनियम, जलमार्गों में मिल जाते हैं। यह प्रक्रिया पानी को अम्लीय बनाती है और जलीय जीवन के लिए विषाक्त धातुओं को छोड़ती है। शोधकर्ताओं ने उत्तरी अलास्का में 75 से अधिक स्थानों पर इस रंग परिवर्तन को दर्ज किया है, जहाँ कुछ जल नमूनों का पीएच स्तर सिरके के बराबर अम्लीय पाया गया है। पानी में लोहे की उच्च सांद्रता, जो ऑक्सीकरण होने पर पानी को नारंगी रंगत देती है, इस परिवर्तन का मुख्य कारण है। यह घटना जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों का एक स्पष्ट संकेत है, क्योंकि आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत से लगभग चार गुना तेजी से गर्म हो रहा है।
पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से न केवल ये धातुएँ निकलती हैं, बल्कि यह नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। प्रभावित धाराओं से मछली प्रजातियों के गायब होने और जलीय कीट विविधता में गिरावट की रिपोर्टें पारिस्थितिक प्रभावों को स्पष्ट करती हैं। ये जलमार्ग सैल्मन जैसी महत्वपूर्ण मछली प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण प्रजनन स्थल हैं, जो आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय मत्स्य पालन के लिए आवश्यक हैं। पानी की गुणवत्ता में यह बदलाव पूरे खाद्य जाल को प्रभावित कर सकता है।
स्थानीय समुदायों के लिए भी चिंताएँ बढ़ रही हैं, जो इन जल स्रोतों पर निर्भर हैं। पीने के पानी की सुरक्षा और मत्स्य पालन पर दीर्घकालिक प्रभाव एक बढ़ती हुई चिंता का विषय है। शोधकर्ता इस समस्या की सीमा को समझने और इसके प्रभावों को कम करने के तरीकों का पता लगाने के लिए आगे के अध्ययन कर रहे हैं। यह घटना जलवायु परिवर्तन के अप्रत्याशित और दूरगामी परिणामों को उजागर करती है, जो न केवल प्राकृतिक परिदृश्यों को बदल रहा है बल्कि उन समुदायों के जीवन को भी प्रभावित कर रहा है जो इन संसाधनों पर निर्भर हैं।



