
पुर्तगाल में 133 मिलियन वर्ष पुराने नए शंकुधारी पौधे 'क्लासोस्ट्रोबस एमीलेन्सिस' की पहचान
द्वारा संपादित: An goldy

पुर्तगाल के ऐतिहासिक टॉरेस वेद्रास (Torres Vedras) क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जो वनस्पति विज्ञान के इतिहास को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोइम्ब्रा (University of Coimbra) के विशेषज्ञों के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने 133 मिलियन वर्ष पुराने एक नए शंकुधारी पौधे की सफलतापूर्वक पहचान की है। यह दुर्लभ जीवाश्म पुर्तगाल की प्रसिद्ध 'वेल-कोर्टिसो' (Vale-Cortiço) जीवाश्म संरचना में पाया गया है, जो अपनी प्राचीन परतों के लिए जानी जाती है। वैज्ञानिकों को यहाँ एक अत्यंत दुर्लभ और असाधारण रूप से संरक्षित नर शंकु (male cone) जैसी संरचना मिली है। इस नई प्रजाति को आधिकारिक तौर पर 'क्लासोस्ट्रोबस एमीलेन्सिस' (*Classostrobus amealensis*) नाम दिया गया है, जो पृथ्वी के इतिहास के निचले क्रीटेशियस (Lower Cretaceous) काल से संबंधित है।
यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि पुर्तगाली पेलियोबोटनी (paleobotany) के क्षेत्र में लंबे समय से अनुत्तरित रहे कई सवालों के जवाब देने में सक्षम है। इस प्रजाति का विशिष्ट नाम 'एमीलेन्सिस' उस छोटे से स्थानीय क्षेत्र 'अमीयल' (Ameal) को समर्पित है, जहाँ से इस अनमोल नमूने को पहली बार प्राप्त किया गया था। शोधकर्ताओं ने इस प्राचीन शंकुधारी प्रजाति को अब विलुप्त हो चुके 'चेरोलेपिडियासी' (Cheirolepidiaceae) परिवार के सदस्य के रूप में वर्गीकृत किया है। प्राचीन काल की जलवायु परिस्थितियों को समझने और उनके पुनर्निर्माण के लिए इस परिवार के पौधों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये पौधे विशेष रूप से गर्म और शुष्क वातावरण में पनपने के लिए विकसित हुए थे, जिसका प्रमाण उनके भीतर पाए जाने वाले विशिष्ट परागकणों से मिलता है, जिन्हें 'क्लासोपोलिस' (*Classopollis*) वंश के अंतर्गत रखा जाता है।
गहन वैज्ञानिक विश्लेषणों और सूक्ष्म परीक्षणों के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि 'क्लासोस्ट्रोबस एमीलेन्सिस' वास्तव में 'फ्रेनेलोप्सिस टेक्सीरे' (*Frenelopsis teixeirae*) नामक एक अन्य प्रसिद्ध प्राचीन प्रजाति की नर प्रजनन संरचना है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ये पौधे प्राचीन काल में इस पूरे क्षेत्र में व्यापक रूप से फैले हुए थे। वेल-कोर्टिसो की उसी भूगर्भीय परत से प्राप्त वानस्पतिक अवशेषों और 'क्लासोस्ट्रोबस एमीलेन्सिस' के बाहरी क्यूटिकल्स में पाए जाने वाले रंध्रों (stomata) की सूक्ष्म विशेषताओं के बीच एक स्पष्ट समानता देखी गई है। यह सह-अस्तित्व इस बात की पुष्टि करता है कि *F. teixeirae* के पौधों ने ही इन विशिष्ट शंकुओं को जन्म दिया था। ये शंकु आगे चलकर 'क्लासोपोलिस मार्टिनोटी' (*Classopollis martinottii*) नामक परागकणों का उत्पादन करते थे, जो उस समय की पारिस्थितिकी का एक अभिन्न हिस्सा थे।
इस व्यापक शोध परियोजना में रूसी विज्ञान अकादमी के पेलियोन्टोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, चेक गणराज्य के प्राग स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय और नीदरलैंड के नेचुरलिस बायोडायवर्सिटी सेंटर के शीर्ष वैज्ञानिकों ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। इस शोध के विस्तृत निष्कर्षों को मई 2026 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'क्रीटेशियस रिसर्च' (*Cretaceous Research*) में प्रकाशित करने की योजना है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोइम्ब्रा के प्रसिद्ध पेलियोबोटनिस्ट मारियो मिगुएल मेंडेस (Mário Miguel Mendes) और उनकी टीम ने इस बात पर जोर दिया है कि चेरोलेपिडियासी परिवार के सदस्य केवल अर्ध-शुष्क या तटीय क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि वे तुलनात्मक रूप से ठंडे अक्षांशों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सक्षम थे। 'क्लासोस्ट्रोबस एमीलेन्सिस' की यह खोज न केवल पुर्तगाल की प्राचीन पेलियोफ्लोरा विरासत को समृद्ध करती है, बल्कि क्रीटेशियस काल के सटीक जलवायु मॉडल तैयार करने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक डेटा भी प्रदान करती है, जो शुरुआती क्रीटेशियस काल में 'फ्रेनेलोप्सिस' वंश के व्यापक प्रसार की पुष्टि करता है।
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स्रोतों
PT Jornal
Green Savers
24 Notícias
MARE - Universidade de Coimbra
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Notícias UC
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