एआई संवाद में कृत्रिम निकटता: फ्रीबर्ग-हाइडेलबर्ग अध्ययन और भारत में सामाजिक निहितार्थ

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

प्रगतिशील शिक्षा के क्षेत्र में सीखने और मानवीय विकास को उन्नत करने के लिए नवीन कार्यप्रणाली की खोज जारी है। इस संदर्भ में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के अप्रत्याशित प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया गया है, विशेष रूप से मानव निकटता और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने की प्रवृत्ति पर। फ्रीबर्ग और हाइडेलबर्ग विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन ने एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत किया है, जो पारंपरिक धारणाओं को चुनौती देता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि प्रतिभागियों को यह जानकारी नहीं दी गई थी कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ संवाद कर रहे हैं, तो एआई द्वारा उत्पन्न प्रतिक्रियाओं ने मानवीय प्रतिक्रियाओं के समान ही निकटता की भावना उत्पन्न की। यह परिणाम भावनात्मक रूप से गहन बातचीत के दौरान विशेष रूप से स्पष्ट हुआ, जहाँ एआई ने मानव वार्ताकारों को निकटता स्थापित करने में पीछे छोड़ दिया। इस बढ़ी हुई निकटता का मुख्य कारण एआई द्वारा प्रदर्शित 'स्व-प्रकटीकरण' की उच्च दर थी, जिसके तहत मशीन ने अधिक व्यक्तिगत जानकारी साझा की। संबंध मनोविज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार, भेद्यता विश्वास के निर्माण की प्रक्रिया को गति प्रदान करती है, और एआई द्वारा यह कृत्रिम भेद्यता प्रतिभागियों के साथ एक त्वरित जुड़ाव स्थापित करने में सफल रही।

हालांकि, जब प्रतिभागियों को यह पता चला कि वे एक मशीन से बात कर रहे हैं, तो कथित निकटता और विश्वास में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप संचार की गहराई कम हो गई। यह विरोधाभास स्पष्ट करता है कि मानवीय पहचान की कमी भावनात्मक जुड़ाव की नींव को कमजोर करती है। यह खोज भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ 13 से 35 वर्ष की आयु के लगभग 57% युवा अकेलेपन के कारण भावनात्मक सहारे के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं।

वर्ष 2026 की शुरुआत के ये निष्कर्ष मनोवैज्ञानिक सहायता, देखभाल और शिक्षा के क्षेत्र में एआई की क्षमता की ओर इशारा करते हैं, खासकर उन सेवाओं में जिन्हें 'एआई साथी' कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने इस बात पर गंभीर चेतावनी जारी की है कि लोग अनजाने में एआई के साथ सामाजिक बंधन बना सकते हैं, जिससे निर्भरता बढ़ सकती है और वास्तविक दुनिया के सामाजिक कौशल कमजोर हो सकते हैं। भारत के इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने भी छात्रों द्वारा जेनरेटिव एआई के अत्यधिक उपयोग के खिलाफ चेतावनी दी है, खासकर जब इसका उपयोग आलोचनात्मक सोच के विकल्प के रूप में किया जाता है। [cite:2,cite:3,cite:4] यह स्थिति एआई गवर्नेंस के लिए एक तकनीकी-कानूनी मॉडल की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जिसमें मानवीय पर्यवेक्षण और जोखिम-आनुपातिक नियंत्रण शामिल हों।

फ्रीबर्ग विश्वविद्यालय ने शिक्षण में एआई के लिए लगभग 600,000 यूरो का वित्तपोषण प्रदान किया है, जो शिक्षा में एआई के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है। इस उभरते हुए परिदृश्य में, 2026 में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है, जो इन भावनात्मक संबंधों के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नैतिक और नियामक नियमों की तत्काल आवश्यकता पर बल देता है। यह संतुलन साधना आवश्यक है कि एआई को एक सहायक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाए, न कि मानवीय संबंधों के प्रतिस्थापन के रूप में।

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स्रोतों

  • ČT24 - Nejdůvěryhodnější zpravodajský web v ČR - Česká televize

  • Artificial Intelligence can generate a feeling of intimacy - Uni Freiburg

  • Research When Artificial Intelligence Creates Stronger Emotional Closeness than a Human - Heidelberg University

  • Teaching AI Ethics 2026: Emotions and Social Chatbots - Leon Furze

  • AI chatbots and digital companions are reshaping emotional connection

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