वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के लिए एक अद्वितीय भंडारण स्थल में प्राचीन हिमखंडों के ब्लॉक रखे हैं, ताकि पृथ्वी के अतीत के जलवायु के ये तेजी से गायब हो रहे साक्ष्य सदियों तक संरक्षित रह सकें।
14 जनवरी 2026 को अंटार्कटिका के सुदूर 'कॉनकॉर्डिया' अनुसंधान स्टेशन पर दुनिया के पहले वैश्विक पर्वत हिम कोर (Ice Core) भंडार गृह का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया गया। यह दूरदर्शी पहल 'आइस मेमोरी फाउंडेशन' द्वारा साकार की गई है, जो प्रमुख यूरोपीय वैज्ञानिक संस्थानों का एक साझा संघ है। इस संघ में फ्रांस के राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (CNRS) और विकास अनुसंधान संस्थान (IRD) के साथ-साथ इटली के वेनिस स्थित 'का फोस्करी विश्वविद्यालय' (Ca' Foscari University of Venice) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। इस परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारण लुप्त हो रहे पृथ्वी के प्राचीन जलवायु रिकॉर्ड को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।
AFP की इन्फोग्राफिक में Ice Memory Foundation द्वारा आइस-कोर नमूनों के संग्रह के स्थान और उसके द्वारा अंटार्कटिका में बनाए गए संरक्षण क्षेत्र को दिखाया गया है ताकि इन्हें संरक्षित किया जा सके, जो 14 जनवरी को खुला।
'आइस मेमोरी' नामक यह अनूठा भंडार गृह एक विशाल बर्फ की गुफा के रूप में निर्मित है, जिसे अंटार्कटिक सतह से नौ मीटर नीचे घनी बर्फ की परतों में खोदा गया है। यहाँ का तापमान प्राकृतिक रूप से लगभग -52 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहता है, जो नमूनों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए सर्वोत्तम है। अंटार्कटिक संधि प्रणाली द्वारा 2024 में अनुमोदित यह 'पैसिव स्टोरेज' तकनीक किसी भी कृत्रिम शीतलन या बिजली की खपत की आवश्यकता को समाप्त करती है। यह व्यवस्था नमूनों को बिजली की विफलता या किसी भी संभावित भू-राजनीतिक अस्थिरता के खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रखती है। इस केंद्र में पहुँची पहली खेप में 1.7 टन बर्फ के नमूने शामिल हैं, जिन्हें फ्रांस के मोंट ब्लांक और स्विट्जरलैंड के ग्रैंड कॉम्बिन ग्लेशियरों से निकाला गया था। इन अमूल्य नमूनों ने इटली के ट्रिएस्ट शहर से 50 दिनों की लंबी प्रशीतित (refrigerated) समुद्री और जमीनी यात्रा पूरी कर अंटार्कटिका तक का सफर तय किया है।
फाउंडेशन के उपाध्यक्ष और वेनिस के का फोस्करी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कार्लो बारबंटे ने इस अवसर पर कहा कि यह कदम भविष्य के वैज्ञानिकों के लिए वायुमंडलीय गैसों, एरोसोल और प्रदूषकों के ऐतिहासिक डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि आने वाले दशकों में ऐसी उन्नत प्रौद्योगिकियां विकसित हो सकती हैं जो आज के दौर में उपलब्ध नहीं हैं, और ये सुरक्षित रखे गए हिम कोर उन भविष्य के शोधों के लिए आधार बनेंगे। 2015 में शुरू हुई 'आइस मेमोरी' परियोजना का महत्वाकांक्षी लक्ष्य अगले 20 वर्षों के भीतर दुनिया के 20 महत्वपूर्ण ग्लेशियरों से नमूने एकत्र करना है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि यूनेस्को द्वारा समन्वित 'क्रायोस्फेरिक साइंसेज के लिए कार्रवाई का दशक' (2025–2034) की शुरुआत के साथ मेल खाती है। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद से वैश्विक स्तर पर ग्लेशियरों ने अपनी कुल बर्फ का लगभग 5% हिस्सा खो दिया है।
'कॉनकॉर्डिया' स्टेशन, जो अंटार्कटिक पठार के 'डोम सी' (Dome C) क्षेत्र में स्थित है, का प्रबंधन संयुक्त रूप से फ्रांसीसी ध्रुवीय संस्थान (IPEV) और इतालवी राष्ट्रीय अंटार्कटिक अनुसंधान कार्यक्रम (PNRA) द्वारा किया जाता है। हिम कोर के स्थायी संरक्षण के लिए इस स्थान का चयन पृथ्वी पर इसकी सबसे स्थिर और कठोर प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण किया गया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने इन नमूनों को जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए अनिवार्य 'संदर्भ बिंदु' करार दिया है। यूनेस्को द्वारा समर्थित यह 'आइस मेमोरी' पहल दुनिया की पहली ऐसी लाइब्रेरी बनने की ओर अग्रसर है, जहाँ मानवता के भविष्य के लिए बर्फ के रूप में इतिहास को संजोया जा रहा है।