किण्वित खाद्य पदार्थों का महत्व: पाचन और प्रतिरक्षा प्रणाली के बीच संबंध

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

शेफ व्लादिस्लाव पेनोव ने हाल ही में खट्टी छाछ जैसे किण्वित खाद्य पदार्थों के सेवन के महत्व पर प्रकाश डाला है, जो मानव आंत माइक्रोबायोम के लिए महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि किण्वन की प्रक्रिया प्राचीन काल से चली आ रही है, इसके वैज्ञानिक आधार की समझ अब विकसित हुई है। पेनोव के अनुसार, स्वास्थ्य लाभों पर ध्यान केंद्रित करते समय, केवल हानिकारक रोगाणुओं की अनुपस्थिति पर ही नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थ की समग्र गुणवत्ता पर भी ध्यान देना आवश्यक है, जो आधुनिक पोषण विज्ञान के अनुरूप है।

मानव शरीर विज्ञान के संदर्भ में, यह तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है कि लगभग सत्तर प्रतिशत मानवीय प्रतिरक्षा प्रणाली पाचन तंत्र में निवास करती है। इस आंतरिक गढ़ की मजबूती के लिए, किण्वित खाद्य पदार्थों का नियमित रूप से आहार में समावेश अनिवार्य माना जाता है। अनुसंधान स्थापित करते हैं कि पाचन तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली एक दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं, और जठरांत्र प्रणाली का स्वास्थ्य समग्र कल्याण का आधार है। पाचन तंत्र की श्लेष्मा झिल्लियाँ, जिन्हें पहले केवल अवशोषक कोशिकाएँ माना जाता था, अब प्रतिरक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक मानी जाती हैं, जो प्रतिदिन भोजन के साथ आने वाले संभावित रोगजनकों का सामना करती हैं।

विशेषज्ञ पेनोव ने बल दिया कि किण्वित खाद्य पदार्थों का सेवन संयम में किया जाना चाहिए; आहार में छोटे, निरंतर समावेश भी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं। खट्टी छाछ को विशेष रूप से लाभकारी माना गया है, क्योंकि यह प्रोबायोटिक्स का एक अनूठा स्रोत है, जो विटामिन सी, के, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे आवश्यक खनिजों से समृद्ध है। छाछ, जिसे मट्ठा भी कहा जाता है, दही को मथकर बनाया जाता है और यह कैल्शियम का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जिसमें एक गिलास में दैनिक आवश्यकता का लगभग 22% कैल्शियम मिल सकता है। इसमें मौजूद लैक्टोबैसिलस और बिफीडोबैक्टीरियम जैसे प्रोबायोटिक्स आंत के स्वास्थ्य को बहाल करने में सहायता करते हैं।

किण्वन की प्रक्रिया, जिसमें बैक्टीरिया और यीस्ट जैसे सूक्ष्मजीव शर्करा और स्टार्च को उपयोगी यौगिकों में तोड़ते हैं, भोजन को न केवल संरक्षित करती है, बल्कि उसे प्रोबायोटिक्स और एंजाइमों से भी समृद्ध करती है। यह प्रक्रिया पोषक तत्वों की जैवउपलब्धता को बढ़ाती है; उदाहरण के लिए, किण्वन के दौरान दूध में मौजूद लैक्टोज टूट जाता है, जिससे लैक्टोज असहिष्णु व्यक्तियों के लिए दही या छाछ का सेवन आसान हो जाता है। वैश्विक स्तर पर, किण्वित खाद्य पदार्थों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है; ग्रैंड व्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2027 तक वैश्विक किण्वन बाजार 753.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है, जो उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

स्वस्थ आंत माइक्रोबायोम, जिसे किण्वित खाद्य पदार्थों के माध्यम से पोषित किया जाता है, सूजन, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त, आंत और मस्तिष्क आंत-मस्तिष्क अक्ष के माध्यम से जुड़े हुए हैं, और प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों का सेवन चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। इस प्रकार, किण्वित खाद्य पदार्थों का समावेश केवल पाचन सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र प्रतिरक्षा कार्य और मानसिक स्वास्थ्य को भी उन्नत करता है, जो आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक वैज्ञानिक रूप से समर्थित मार्ग प्रस्तुत करता है।

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स्रोतों

  • Az-jenata.bg

  • Actualno.com

  • Blitz.bg (позоваващ се на Bulgaria ON AIR)

  • Българска национална телевизия - BNT

  • Paragraph21.com

  • Nosugar.bg

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