A look at the work of scientists on a drilling mission on the remote and inaccessible Thwaites Glacier in West Antarctica - tinyurl.com/55x8wp2y #Aspermont #ThwaitesGlacier #BritishAntarcticSurvey #KoreaPolarResearchInstitute #IceDrilling #Antarctica #ClimateChange
थ्वाइट्स ग्लेशियर मिशन की आंशिक सफलता: महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त, लेकिन निगरानी उपकरण बर्फ में खो गए
द्वारा संपादित: Uliana Soloveva
पश्चिमी अंटार्कटिका के विशाल थ्वाइट्स ग्लेशियर, जिसे दुनिया भर में 'प्रलय का ग्लेशियर' (Doomsday Glacier) के नाम से जाना जाता है, पर हाल ही में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अभियान चलाया गया। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य बर्फ की विशाल परतों के नीचे छिपे रहस्यों को उजागर करना था, और टीम ने पहली बार ग्लेशियर के मुख्य आधार से प्रत्यक्ष माप लेने में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की। हालांकि, इस वैज्ञानिक उपलब्धि के साथ एक निराशाजनक खबर भी आई; मिशन के दौरान स्थापित की गई दीर्घकालिक निगरानी प्रणाली बर्फ की कठोर परिस्थितियों के कारण वहीं फंस गई, जिससे इसे आंशिक रूप से असफल माना जा रहा है।
शोधकर्ताओं ने इस अभियान के दौरान अस्थायी मापन उपकरणों को तैनात करने में सफलता पाई, जिन्होंने ग्लेशियर के निचले हिस्से में अत्यंत अशांत महासागरीय स्थितियों को दर्ज किया है। इन उपकरणों ने यह भी खुलासा किया कि अपेक्षाकृत गर्म पानी ग्लेशियर के आधार में प्रवेश कर रहा है और बर्फ को नीचे से तेजी से पिघलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ये अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारियां ग्लेशियर की 'ग्राउंडिंग लाइन' के पास से जुटाई गई हैं, जो एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ बर्फ समुद्र के संपर्क में आती है। थ्वाइट्स ग्लेशियर का आकार यूनाइटेड किंगडम के बराबर है, और इसकी गहराई तक पहुँचने के लिए वैज्ञानिकों ने 'हॉट वाटर ड्रिलिंग' तकनीक का उपयोग करते हुए लगभग 1000 मीटर गहरा एक ऊर्ध्वाधर छेद किया था।
मिशन के दौरान आई तकनीकी चुनौतियों के कारण, वैज्ञानिक टीम को वहां से जल्द ही सुरक्षित निकलना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपनी विशाल 'मूरिंग प्रणाली' को ड्रिल होल के भीतर ही छोड़ना पड़ा। यह प्रणाली विशेष रूप से दो वर्षों तक निरंतर डेटा संग्रह करने के लिए तैयार की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपकरण के खोने का मुख्य कारण ग्लेशियर की अत्यधिक गति है, जो प्रतिदिन नौ मीटर तक खिसकने की क्षमता रखता है। अंटार्कटिका के इन दुर्गम क्षेत्रों में फील्ड वर्क करना हमेशा से ही उच्च जोखिम भरा रहा है, जहाँ सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत ही कम समय में कई प्राकृतिक और तकनीकी कारकों का सटीक तालमेल होना अनिवार्य है।
थ्वाइट्स ग्लेशियर पर किया गया यह शोध वैश्विक जलवायु सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान में समुद्र के जलस्तर में होने वाली कुल वृद्धि में इस अकेले ग्लेशियर का योगदान 8 प्रतिशत है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि यह ग्लेशियर पूरी तरह से ढह जाता है, तो दुनिया भर में समुद्र का स्तर लगभग 65 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। हालांकि दीर्घकालिक निगरानी उपकरण खो गए हैं, लेकिन जो प्रारंभिक डेटा वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक निकाला है, उसे समुद्र स्तर में वृद्धि के भविष्य के मॉडलों को सटीक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
यह पूरा शोध कार्य 'इंटरनेशनल थ्वाइट्स ग्लेशियर कोलैबोरेशन' (ITGC) के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसमें 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खोई हुई निगरानी प्रणाली संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के एक साझा कार्यक्रम का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पश्चिमी अंटार्कटिक आइस शीट का गहन अध्ययन करना है। प्रसिद्ध समुद्र विज्ञानी कीथ माकिंसन ने बताया कि ग्लेशियर के 'मुख्य ट्रंक' के नीचे गर्म और तीव्र गति वाले पानी के प्रवाह के बारे में प्राप्त पहले प्रत्यक्ष आंकड़ों ने इसकी अस्थिरता में महासागर की निर्णायक भूमिका की पुष्टि की है। ये पायलट डेटा भविष्य के अभियानों की योजना बनाने के लिए वैज्ञानिक रूप से बहुत मूल्यवान साबित होंगे।
ग्लेशियर की स्थिति का संदर्भ इस तथ्य से और भी गंभीर हो जाता है कि थ्वाइट्स पिछले आठ दशकों से लगातार पीछे हट रहा है, और पिछले तीस वर्षों में इस प्रक्रिया की गति में भारी तेजी आई है। इसके पूर्वी हिस्से में स्थित 'शेल्फ आइस', जो एक मजबूत सहारे के रूप में काम करती थी, अब बड़ी और गहरी होती दरारों के कारण अपनी मजबूती खो रही है। इससे ग्लेशियर का अमंडसेन सागर की ओर खिसकना और भी तेज हो गया है। इस खतरे को देखते हुए, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने कुछ साहसिक समाधान प्रस्तावित किए हैं, जैसे कि गर्म समुद्री धाराओं को रोकने के लिए 80 किलोमीटर लंबी और 150 मीटर ऊँची एक विशाल पानी के नीचे की दीवार या 'पर्दा' बनाना।
इस मिशन के निष्कर्ष यह स्पष्ट करते हैं कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने के लिए अंटार्कटिका जैसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में काम करना कितना आवश्यक है। भले ही कुछ महत्वपूर्ण उपकरण बर्फ की गहराई में खो गए हों, लेकिन वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त की गई प्रारंभिक जानकारी भविष्य की वैश्विक रणनीतियों को आकार देने में मदद करेगी। यह शोध न केवल थ्वाइट्स ग्लेशियर की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण बर्फ भंडारों की रक्षा के लिए निरंतर और साहसी वैज्ञानिक प्रयासों की आवश्यकता है।
स्रोतों
Daily Mail Online
Polar Journal
British Antarctic Survey
The Independent
Yourweather.co.uk
Green Matters
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