इंडोनेशियाई जल में विश्व के सबसे बड़े डुगोंग आवास की पुष्टि
द्वारा संपादित: Olga Samsonova
दक्षिण पश्चिम मालुकु के समुद्री संरक्षण क्षेत्रों, विशेष रूप से रोमांग और डेमार द्वीपों पर, वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री जैव विविधता का खुलासा हुआ है। वर्ष 2025 में किए गए एक वैज्ञानिक अभियान ने इस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र की उत्कृष्ट स्थिति की पुष्टि की, जिसमें स्वस्थ प्रवाल भित्तियाँ, समुद्री घास के मैदान और मैंग्रोव शामिल हैं। यह खोज इंडोनेशिया के समुद्री संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो इस क्षेत्र के अद्वितीय पारिस्थितिक मूल्य को रेखांकित करती है।
इस गहन सर्वेक्षण के दौरान, शोधकर्ताओं ने डॉल्फ़िन, शार्क, समुद्री कछुए और व्हेल सहित कई प्रकार के समुद्री जीवों को प्रलेखित किया। सबसे महत्वपूर्ण खोज रोमांग द्वीप के निकट हुई, जहाँ इंडोनेशिया का सबसे बड़ा ज्ञात डुगोंग आवास स्थापित किया गया, जिसमें कुल 32 डुगोंग व्यक्तियों की गणना की गई। डुगोंग, जिन्हें 'समुद्री गाय' भी कहा जाता है, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और भारत में भी इनकी आबादी कम हो रही है, जहाँ इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है।
यह विशेष समुद्री क्षेत्र कम से कम 24 संरक्षित और संकटग्रस्त समुद्री प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवासन गलियारे के रूप में कार्य करता है। यह तथ्य इस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को और बढ़ाता है, क्योंकि यह कई संवेदनशील प्रजातियों के जीवन चक्र को बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। भारत में भी, पाक खाड़ी में स्थापित डुगोंग संरक्षण रिजर्व, जो लगभग 448.34 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, इसी तरह के संरक्षण उद्देश्यों को पूरा करता है और इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा एक आदर्श मॉडल के रूप में मान्यता मिली है।
इन वैज्ञानिक निष्कर्षों के आधार पर, इंडोनेशियाई अधिकारी अब इस क्षेत्र के प्रबंधन नीतियों को निर्देशित कर रहे हैं। संरक्षण रणनीतियों में पारिस्थितिक सुरक्षा और स्थानीय आर्थिक लाभों के बीच संतुलन स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने ऐसे वित्त पोषण योजनाओं की रूपरेखा तैयार की है जहाँ संरक्षण की सफलता सीधे क्षेत्रीय आर्थिक विकास का समर्थन करेगी, जिसमें टिकाऊ पर्यटन एक प्रमुख घटक है। यह दृष्टिकोण भारत के प्रयासों से मेल खाता है, जहाँ संरक्षण रिजर्व बनाए जाने से छोटे और सीमांत मछुआरों को भी लाभ हुआ है।
इस समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के बावजूद, यह क्षेत्र विनाशकारी मछली पकड़ने की प्रथाओं, प्लास्टिक प्रदूषण और परित्यक्त मछली पकड़ने के जालों (घोस्ट नेट्स) जैसे गंभीर खतरों का सामना कर रहा है। इन खतरों से निपटने के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वित प्रबंधन की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, भारत में, डुगोंग के आवास को नष्ट करने वाले समुद्री तल ट्रॉलिंग और प्रदूषण को प्रमुख खतरों के रूप में पहचाना गया है, जिसके कारण वहां पारा और ऑर्गेनोक्लोरिन यौगिकों का संचय देखा गया है।
इंडोनेशियाई अधिकारियों के लिए, इस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक बहु-आयामी दृष्टिकोण आवश्यक होगा, जिसमें अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना शामिल है। यह खोज स्पष्ट करती है कि समुद्री संरक्षण केवल प्रजातियों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जटिल आर्थिक और सामाजिक प्रबंधन चुनौती भी है, जिसे वैज्ञानिक डेटा के आधार पर हल किया जाना चाहिए। यह क्षेत्र, अपनी उच्च जैव विविधता के साथ, वैश्विक समुद्री संरक्षण मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान रखता है।
6 दृश्य
स्रोतों
detik Travel
Duta Nusantara Merdeka
Berita Terkini Indonesia
ANTARA News
detikTravel
Merdeka.com
इस विषय पर और अधिक समाचार पढ़ें:
क्या आपने कोई गलती या अशुद्धि पाई?हम जल्द ही आपकी टिप्पणियों पर विचार करेंगे।