एआई-डिज़ाइन किए गए व्यक्तिगत एमआरएनए कैंसर वैक्सीन से श्वान रोज़ी के ट्यूमर में उल्लेखनीय कमी

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है, जहाँ टर्मिनल मैस्ट सेल कैंसर से जूझ रही स्टैफ़ोर्डशायर बुल टेरियर मिक्स नस्ल की श्वान, रोज़ी, के लिए एक व्यक्तिगत एमआरएनए कैंसर वैक्सीन विकसित की गई है। यह नवाचार पारंपरिक उपचारों की विफलता के बाद सामने आया, जिसने पशु चिकित्सा ऑन्कोलॉजी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है।

डेटा वैज्ञानिक पॉल कोनिनघम ने इस परियोजना का नेतृत्व किया, जो रोज़ी को बचाने की उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति से प्रेरित थी। उन्होंने रोज़ी के ट्यूमर ऊतक का जीनोमिक अनुक्रमण (genomic sequencing) करवाने के लिए न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय (UNSW) के साथ सहयोग किया, जिसकी लागत लगभग 3,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर आई। इस अनुक्रमण प्रक्रिया ने स्वस्थ कोशिकाओं और ट्यूमर कोशिकाओं के बीच के आनुवंशिक अंतरों को उजागर किया, जो वैक्सीन डिजाइन का आधार बना। इस जटिल डेटा विश्लेषण में उन्नत एआई उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसमें ओपनएआई का चैटजीपीटी और गूगल डीपमाइंड का अल्फाफोल्ड शामिल थे। कोनिनघम ने चैटजीपीटी का उपयोग एक शोध सहायक के रूप में किया, जिसने उन्हें इम्यूनोथेरेपी के बारे में जानकारी दी और आवश्यक विशेषज्ञों से संपर्क करने का सुझाव दिया। अल्फाफोल्ड का उपयोग ट्यूमर उत्परिवर्तन (mutations) से उत्पन्न होने वाले प्रोटीनों के त्रि-आयामी आकार को मॉडल करने के लिए किया गया था, ताकि व्यवहार्य लक्ष्यों की पहचान की जा सके। कोनिनघम के स्वयं के मालिकाना मशीन लर्निंग एल्गोरिदम ने उन नियोएंटीजन (neoantigens) को सटीकता से चुना जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सबसे अधिक प्रेरित करने की क्षमता रखते थे।

चयनित नियोएंटीजन के आधार पर, प्रोफेसर पॉल थोरडारसन की टीम, जो UNSW के आरएनए इंस्टीट्यूट की निदेशक हैं, ने एमआरएनए वैक्सीन प्रोटोकॉल को संश्लेषित किया, जिसे एक लिपिड नैनोपार्टिकल में पैक किया गया था। यह संश्लेषण प्रक्रिया, जिसे मैन्युअल साहित्य समीक्षा में महीनों लग सकते थे, एआई की सहायता से दो महीने से भी कम समय में पूरी हो गई। वैक्सीन को दिसंबर 2025 में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ वेटरनरी साइंस में प्रोफेसर रेचल अलावना द्वारा प्रशासित किया गया था, जिनके पास इस तरह के पशु चिकित्सा प्रयोगों के लिए आवश्यक नैतिक अनुमोदन था। इस प्रक्रिया में तीन महीने का नैतिक अनुमोदन प्राप्त करने की नौकरशाही भी शामिल थी।

प्रायोगिक वैक्सीन ने प्रारंभिक चरण में उल्लेखनीय सफलता दिखाई, जिसके परिणामस्वरूप मार्च 2026 तक एक ट्यूमर लगभग 75% तक सिकुड़ गया, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह कमी 50% बताई गई है। रोज़ी की ऊर्जा में उल्लेखनीय वापसी हुई है, जिसमें वह बाड़ कूदने और खरगोशों का पीछा करने लगी है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि यह एक एकल मामला अध्ययन है, और मैस्ट सेल ट्यूमर कभी-कभी स्वतः ही सिकुड़ सकते हैं। प्रोफेसर थोरडारसन ने टिप्पणी की कि रोज़ी का मामला सिखाता है कि व्यक्तिगत चिकित्सा एमआरएनए तकनीक के साथ समयबद्ध तरीके से अत्यधिक प्रभावी हो सकती है, और यह सफलता मानव ऑन्कोलॉजी में समान उपचारों के विकास में तेजी ला सकती है। कोनिनघम और उनकी टीम अब पहले उपचार के प्रति अनुत्तरदायी रहे ट्यूमर के लिए एक दूसरी वैक्सीन डिजाइन करने पर काम कर रहे हैं।

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स्रोतों

  • Semana.com Últimas Noticias de Colombia y el Mundo

  • Logos Press

  • UNSW Newsroom

  • Mint

  • TheStreet

  • Hindustan Times

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