संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों पर प्रस्ताव पारित किया; चीन ने विरोध किया

द्वारा संपादित: gaya ❤️ one

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) ने गुरुवार, 18 दिसंबर, 2025 को एक महत्वपूर्ण वार्षिक प्रस्ताव को अपनाया, जिसमें रूस द्वारा यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों की स्थिति पर कड़ी निंदा की गई। यह दस्तावेज़ रूस के आक्रमण की निंदा करता है, यूक्रेन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि करता है, और कब्जे वाले क्षेत्रों में व्यवस्थित दुर्व्यवहारों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी को मजबूत करने का आह्वान करता है।

इस संकल्प के समर्थन में 79 देशों ने मतदान किया, जबकि 16 सदस्य देशों ने इसके विरुद्ध मतदान किया, और 73 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया। विरोध करने वाले देशों के समूह में रूस, बेलारूस, ईरान, क्यूबा, निकारागुआ और चीन शामिल थे। चीन का यह रुख विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है, क्योंकि पहले के एक संबंधित प्रस्ताव पर, चीन ने विरोध करने के बजाय मतदान से परहेज किया था, हालांकि इस बार वह विरोध करने वालों में शामिल रहा।

यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा, जिन्होंने 5 सितंबर, 2024 को पदभार संभाला था, ने इस अनुमोदन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज़ गंभीर मानवाधिकारों और मानवीय कानून के उल्लंघन की अंतरराष्ट्रीय निगरानी को बढ़ाता है और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की अनिवार्यता पर जोर देता है। यह वार्षिक प्रस्ताव प्रक्रिया यूक्रेन द्वारा 2016 से शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य कब्जे वाले क्षेत्रों, जिसमें क्रीमिया और सेवस्तोपोल शामिल हैं, में दस्तावेजित दुर्व्यवहारों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बनाए रखना है।

2025 के इस अद्यतन प्रस्ताव में नए प्रावधान शामिल किए गए हैं जो रूसी कब्जे वाले अधिकारियों द्वारा किए गए अत्याचारों, अमानवीय व्यवहार और यूक्रेनी युद्धबंदियों तथा अवैध रूप से हिरासत में लिए गए नागरिकों के खिलाफ अन्य घोर मानवाधिकार उल्लंघनों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं। यह दस्तावेज़ स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोगों के निष्कर्षों पर आधारित है, जो कब्जे वाले क्षेत्रों और रूस के भीतर भी जबरन गुमशुदगी और यातना के मामलों की पुष्टि करते हैं।

इसके अतिरिक्त, संकल्प में कब्जे वाले क्षेत्रों के सैन्यीकरण, स्थानीय निवासियों की रूसी सशस्त्र बलों में जबरन भर्ती, पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों के उत्पीड़न, और सांस्कृतिक विरासत के विनाश पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। विदेश मंत्री सिबिहा, जो पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय के उप-प्रमुख के रूप में कार्यरत थे और 2016 से 2021 तक तुर्की में यूक्रेन के राजदूत रह चुके हैं, ने इस समर्थन के लिए 79 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह संकल्प पिछले वर्ष के संकल्पों की निरंतरता को दर्शाता है, जिसमें 2024 के संकल्प में पहली बार रूस के आक्रमण को 'यूक्रेन के खिलाफ आक्रामक युद्ध' कहा गया था। महासभा ने इस दस्तावेज़ को 19 नवंबर को अपनी तीसरी समिति (Third Committee) में हुए पिछले मतदान (78 पक्ष, 15 विपक्ष, 74 अनुपस्थित) के बाद अपनाया, जो इस बात का संकेत है कि पूर्ण महासभा में समर्थन थोड़ा अधिक मजबूत रहा। यह राजनयिक प्रयास अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए रखने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक औपचारिक कदम है।

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स्रोतों

  • Deutsche Welle

  • Ukrainian National News (UNN)

  • Ukrinform

  • UN Meetings Coverage and Press Releases

  • Andrii Sybiha - Wikipedia

  • Kyiv Post

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