दक्षिण कोरिया के घरेलू नूरी रॉकेट (KSLV-II) ने अपनी चौथी उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की, जो देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के निजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रक्षेपण 27 नवंबर, 2025 को कोरियाई मानक समय (KST) के अनुसार तड़के 1:13 बजे नारो अंतरिक्ष केंद्र, गोह्युंग, दक्षिण जेओला प्रांत से हुआ। सेंसर संबंधी समस्या के कारण प्रक्षेपण में मामूली विलंब हुआ, लेकिन यह नूरी रॉकेट का पहला रात्रि प्रक्षेपण भी था, जो इसकी परिचालन क्षमता को दर्शाता है।
इस मिशन का प्रबंधन नवगठित कोरिया एयरोस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (KASA) द्वारा किया गया, जिसकी स्थापना मई 2024 में हुई थी और जिसके प्रशासक यून यंग-बिन हैं। इस उड़ान में निजी क्षेत्र की भागीदारी निर्णायक थी, क्योंकि उत्पादन, संयोजन और प्रक्षेपण संचालन की जिम्मेदारी पहली बार निजी कंपनी हनवा एयरोस्पेस (Hanwha Aerospace) को सौंपी गई थी, जिसने कोरिया एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (KARI) से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्राप्त किया है।
South Korea’s Nuri (KSLV-II F4)b🇰🇷🚀#1 of 2025 @kari2030's Nuri 🚀launch will place CAS500-3 into a 550–600 km SSO, supported by a 12-CubeSat rideshare spanning Earth observation, space weather, IoT comms, and in-orbit tech validation. #NuriF4 #Seoul #Korea #Kslv2 @with_KASA
47 मीटर ऊंचे इस रॉकेट ने कुल 13 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया। प्राथमिक पेलोड 516 किलोग्राम का CAS500-3 पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह था, जिसे कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है। CAS500-3 का उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का सत्यापन करना, पृथ्वी के अरोरा और एयरग्लो का अध्ययन करना तथा चुंबकीय क्षेत्रों और प्लाज्मा को मापना है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों द्वारा विकसित 12 छोटे क्यूबसैट भी कक्षा में स्थापित किए गए, जो वायुमंडलीय अध्ययन और समुद्री प्लास्टिक की निगरानी जैसे प्रयोगों को आगे बढ़ाएंगे।
यह सफल प्रक्षेपण पिछली सफलताओं की श्रृंखला को जारी रखता है, जो अक्टूबर 2021 की शुरुआती विफलता के बाद कार्यक्रम की स्थिरता को रेखांकित करता है। KASA का लक्ष्य दक्षिण कोरिया को शीर्ष पांच अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल करना है, और यह निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिसमें 2030 के मध्य तक पुन: प्रयोज्य रॉकेट विकसित करने की योजना शामिल है।
भविष्य की योजनाओं में 2026 और 2027 में और नूरी प्रक्षेपण शामिल हैं, जो देश की दीर्घकालिक अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं, जिसमें 2032 तक चंद्रमा पर लैंडर भेजना भी शामिल है, को बल प्रदान करते हैं। इस मिशन की सफलता जटिल अभियानों के निजी क्षेत्र द्वारा सफलतापूर्वक प्रबंधन की क्षमता को प्रदर्शित करती है, जो दक्षिण कोरिया की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।


