राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार, 12 जनवरी 2026 को घोषणा की कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ होने वाले सभी कारोबार पर तत्काल प्रभाव से 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। राष्ट्रपति ने इस आदेश को "अंतिम और निर्णायक" बताया। यह कदम ईरान में गंभीर आर्थिक परिस्थितियों से उपजे सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, जो अब पादरी प्रतिष्ठान को हटाने की मांग में बदल गए हैं। एक अमेरिकी मानवाधिकार समूह ने इन अशांतियों में 500 से अधिक मौतों और 10,000 से अधिक गिरफ्तारियों की सूचना दी है।
चीन के दूतावास ने वाशिंगटन की इस एकतरफा कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि "टैरिफ युद्धों और व्यापार युद्धों में कोई विजेता नहीं होता"। राष्ट्रपति ट्रम्प ने पुष्टि की कि सैन्य विकल्पों पर भी व्हाइट हाउस में विचार किया जा रहा है, हालांकि उन्होंने कूटनीति को प्राथमिक प्रतिक्रिया बताया। यह व्यापारिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ अधिनियम (IEEPA) के तहत ट्रम्प द्वारा पहले लगाए गए व्यापक टैरिफ की वैधता की समीक्षा कर रहा है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि मौजूदा शुल्कों में यह नया 25 प्रतिशत टैरिफ जुड़ने पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर "सार्थक झटका" लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट में IEEPA टैरिफ की वैधता पर सुनवाई हो चुकी है, और निर्णय की उम्मीद 2026 की शुरुआत में थी, जिससे आयातकों के लिए संभावित रिफंड का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है।
इसके समानांतर, मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को, ताइवान ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक व्यापक व्यापार समझौते पर "सामान्य सहमति" बनने की घोषणा की। यह वार्ता अप्रैल 2025 में शुरू हुई थी, जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुरू में ताइवानी निर्यात पर 32 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया था। लगभग अंतिम रूप ले चुके इस समझौते के तहत, ताइवान के आयात पर अमेरिकी टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जो जापान और दक्षिण कोरिया को दिए गए दरों के बराबर होगा।
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) से संबंधित है, जिसने एरिजोना में कम से कम पाँच अतिरिक्त सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र बनाने का वादा किया है। यह प्रतिबद्धता पहले से चल रही छह फैक्ट्रियों की योजना पर आधारित है, जिससे कुल निवेश US$165 बिलियन तक पहुँच सकता है, जो अमेरिका में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश है। ताइवान का लक्ष्य "स्टैकिंग टैरिफ के बिना पारस्परिक टैरिफ कटौती" हासिल करना और सेमीकंडक्टर्स के लिए धारा 232 के तहत तरजीही उपचार सुरक्षित करना था।
अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों पर टिप्पणी करते हुए सहयोग जारी रहने का संकेत दिया। ताइवानी राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने अनुकूल शर्तों को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी निवेश बढ़ाने और रक्षा खर्च में वृद्धि करने का संकल्प लिया है। इस रक्षा प्रतिबद्धता में 2026 में सकल घरेलू उत्पाद के 3.3% तक रक्षा खर्च पहुंचाने के लक्ष्य के साथ आठ वर्षों में US$40 बिलियन का एक पूरक बजट प्रस्तावित है। यह व्यापारिक विकास ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका चीन के प्रभुत्व को संतुलित करने के लिए अपने भरोसेमंद भागीदारों के साथ सहयोग गहरा कर रहा है।




