कनाडा और फ्रांस ने ग्रीनलैंड के नूक में खोले अपने वाणिज्य दूतावास; आर्कटिक में अमेरिकी प्रभाव को संतुलित करने की कवायद

द्वारा संपादित: Svetlana Velgush

शुक्रवार, 6 फरवरी, 2026 को ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मील का पत्थर स्थापित किया गया, जब कनाडा और फ्रांस ने आधिकारिक तौर पर अपने वाणिज्य दूतावासों का उद्घाटन किया। इस दोहरे राजनयिक कदम को आर्कटिक क्षेत्र के इस रणनीतिक द्वीप पर संयुक्त राज्य अमेरिका के बढ़ते प्रभाव और उसकी महत्वाकांक्षाओं के जवाब में एक ठोस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह घटनाक्रम आर्कटिक की बदलती भू-राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है।

कनाडा के नए वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन समारोह बेहद भव्य रहा, जिसमें कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और गवर्नर जनरल मैरी साइमन ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। ओटावा ने अपनी आर्कटिक विदेश नीति की व्यापक समीक्षा के हिस्से के रूप में 2024 की शुरुआत में इस मिशन को स्थापित करने की योजना सार्वजनिक की थी। हालांकि, प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों के कारण इस उद्घाटन को 2025 से आगे बढ़ाकर अब संपन्न किया गया है। कनाडाई अधिकारियों ने इस अवसर पर ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के प्रति अपना अटूट समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक लचीलापन और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्वीप के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कनाडाई प्रतिनिधिमंडल का एक तटरक्षक जहाज के माध्यम से नूक पहुँचना आर्कटिक जल क्षेत्र में ओटावा की बढ़ती सक्रियता का एक प्रतीकात्मक संदेश था।

फ्रांस ने भी इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को नया आयाम देते हुए जीन-नोएल पोइरियर को ग्रीनलैंड का पहला महावाणिज्य दूत नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ ही फ्रांस नूक में इस स्तर का राजनयिक दर्जा प्राप्त करने वाला यूरोपीय संघ का पहला राष्ट्र बन गया है। इस रणनीतिक निर्णय की घोषणा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जून 2025 में की थी। यद्यपि वाणिज्य दूतावास की भौतिक इमारत अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है, लेकिन पोइरियर ने अपनी जिम्मेदारियां संभाल ली हैं। उनके अधिदेश में स्थानीय फ्रांसीसी समुदाय की सहायता करना, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और स्थानीय अधिकारियों के साथ राजनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करना शामिल है। पेरिस ने इस दौरान डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने पूर्ण सम्मान की पुष्टि भी की है।

ये कूटनीतिक गतिविधियां उस समय हो रही हैं जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव पैदा कर दिया था। ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस द्वीप पर नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया था और 2024 में अपने पुनर्चयन के बाद यूरोपीय देशों पर 10% से 25% के बीच टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। हालांकि, हाल ही में दावोस में नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद ट्रम्प के रुख में कुछ नरमी देखी गई है। उन्होंने एक 'रूपरेखा समझौते' पर पहुँचने का दावा किया है और बल प्रयोग की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है, हालांकि इस समझौते की बारीकियां और शर्तें अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

कनाडा और फ्रांस के इन नए मिशनों से पहले, नूक में केवल आइसलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के ही स्थायी वाणिज्य दूतावास मौजूद थे। अमेरिका ने 1953 में अपनी उपस्थिति समाप्त करने के बाद 2020 में फिर से यहाँ अपना दूतावास खोला था। नाटो सहयोगियों द्वारा राजनयिक उपस्थिति में यह विस्तार ग्रीनलैंड की वर्तमान स्वायत्त स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक सामूहिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। डेनमार्क, जो 2009 के स्व-शासन अधिनियम के प्रावधानों के तहत ग्रीनलैंड के विदेशी मामलों और रक्षा की जिम्मेदारी संभालता है, लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि द्वीप की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, नूक में इन नए दूतावासों का खुलना न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि यह वैश्विक शक्तियों के बीच आर्कटिक के भविष्य को लेकर चल रही रस्साकशी को भी दर्शाता है। यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में ग्रीनलैंड न केवल पर्यावरण अनुसंधान बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का भी एक प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

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स्रोतों

  • Fox News

  • The Globe and Mail

  • CTV News

  • CBC News

  • Reuters

  • Euractiv

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