हीलियम प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण नासा ने आर्टेमिस II मिशन की लॉन्चिंग टाली
लेखक: Tatyana Hurynovich
नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने बोइंग कंपनी द्वारा विकसित अपने शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट को लॉन्च पैड से वापस व्हीकल असेंबली बिल्डिंग (VAB) में ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह महत्वपूर्ण निर्णय शनिवार, 21 फरवरी 2026 को रॉकेट के ऊपरी चरण में एक गंभीर तकनीकी खराबी का पता चलने के बाद लिया गया है। इस खराबी का मुख्य कारण इंटरिम क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज (ICPS) में हीलियम गैस के प्रवाह में अचानक आई रुकावट को बताया जा रहा है।
नासा प्रशासन के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस तकनीकी समस्या के कारण अब मार्च 2026 की शुरुआत में निर्धारित आर्टेमिस II मिशन के प्रक्षेपण की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। पहले इस मिशन को 6 मार्च को लॉन्च करने की योजना बनाई गई थी। मिशन के चालक दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर (पायलट), और क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ) के साथ कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। विशेष रूप से, इन अंतरिक्ष यात्रियों ने शुक्रवार शाम से ही अपना अनिवार्य दो सप्ताह का क्वारंटीन शुरू कर दिया था, जिससे इस देरी ने मिशन की जटिलताओं को और बढ़ा दिया है।
इंजीनियरों के अनुसार, हीलियम गैस का उपयोग रॉकेट इंजनों को साफ करने और तरल हाइड्रोजन (LH2) तथा तरल ऑक्सीजन (LOX) के टैंकों को दबावयुक्त बनाए रखने के लिए किया जाता है। यह नई समस्या पिछले अनुभवों से भिन्न है। इससे पहले, 2 फरवरी 2026 को आयोजित 'वेट ड्रेस रिहर्सल' (WDR) के दौरान तरल हाइड्रोजन के रिसाव के कारण मिशन में बाधा आई थी, हालांकि 19 फरवरी को किया गया दोबारा परीक्षण सफल रहा था। नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञ वर्तमान में खराब फिल्टर, चेक वाल्व की विफलता या ग्राउंड लाइनों और रॉकेट के बीच क्विक डिस्कनेक्ट (QD) इंटरफेस में संभावित खराबी जैसे विभिन्न पहलुओं की गहन जांच कर रहे हैं।
लगभग 322 फीट (98 मीटर) ऊंचे इस विशालकाय रॉकेट को मरम्मत के लिए VAB में वापस ले जाना अनिवार्य हो गया है ताकि आवश्यक उपकरणों तक पहुंच बनाई जा सके। हालांकि, इंजीनियर अभी भी लॉन्च पैड LC-39B पर ही मरम्मत की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। यदि मार्च की लॉन्च विंडो, जिसमें 6 से 9 मार्च और 11 मार्च की तारीखें शामिल थीं, हाथ से निकल जाती है, तो अगला अवसर अप्रैल 2026 में ही मिल पाएगा। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, अप्रैल की संभावित लॉन्च तिथियों में 1, 3-6 और 30 अप्रैल शामिल हो सकती हैं।
आर्टेमिस II मिशन ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 1972 में 'अपोलो 17' के बाद पृथ्वी की निचली कक्षा से परे पहला मानवयुक्त मिशन होगा। यह 10 दिवसीय चंद्र परिक्रमा यात्रा भविष्य के लैंडिंग मिशनों के लिए आवश्यक प्रणालियों का परीक्षण करेगी। नासा ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी चुनौतियों के बावजूद चालक दल की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मिशन में पहली बार एक अफ्रीकी अमेरिकी (ग्लोवर), पहली महिला (कोच) और पहली बार एक कनाडाई नागरिक (हैनसेन) चंद्रमा के मिशन पर जा रहे हैं।
यह वर्तमान देरी आर्टेमिस कार्यक्रम के व्यापक ढांचे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर स्थायी मानवीय उपस्थिति स्थापित करना है। आर्टेमिस II की सफलता ही 2028 के लिए नियोजित आर्टेमिस III मिशन का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिसमें चंद्रमा की सतह पर मानव की वापसी का लक्ष्य रखा गया है। अंतरिक्ष अन्वेषण के इस चरण में सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता न करना नासा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, ताकि भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सके।
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