संतरे के छिलके से विशिष्ट मिष्ठान का निर्माण: शून्य-अपशिष्ट नवाचार

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, संतरे के छिलके जैसे जैविक अपशिष्ट को अब मूल्यवान और विशिष्ट कैंडीज में परिवर्तित किया जा रहा है। यह पहल शून्य-अपशिष्ट (Zero-Waste) पाक कला की बढ़ती वैश्विक प्रवृत्ति के साथ संरेखित है और खाद्य उद्योग में जैविक अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है, जहाँ पूर्व में त्याज्य पदार्थों का रचनात्मक उपयोग किया जा रहा है।

इस रूपांतरण प्रक्रिया में सावधानीपूर्वक निष्पादन की आवश्यकता होती है, जिसमें छिलकों की प्राकृतिक कड़वाहट को दूर करने के लिए उन्हें कई बार उबाला जाता है, जिसके परिणामस्वरूप एक चबाने योग्य और मीठा व्यंजन तैयार होता है। इस नवीन उपयोगिता में एक आधुनिक परिष्कार जोड़ा गया है, जहाँ सूखे हुए छिलकों को उच्च कोको सामग्री वाली डार्क चॉकलेट में डुबोया जाता है। डार्क चॉकलेट, जिसमें अक्सर 70 प्रतिशत या उससे अधिक कोको होता है, फ्लेवोनोइड्स और कैटेचिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और हृदय स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक हो सकती है।

यह रूपांतरण खट्टे फलों के अपशिष्ट की बहुमुखी प्रतिभा को उजागर करता है, जिसका उपयोग केवल कैंडी तक ही सीमित नहीं है; बल्कि इसे बेकरी उत्पादों और पेय पदार्थों के लिए चिप्स या स्वाद बढ़ाने वाले पाउडर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। पारंपरिक कैंडी बनाने की विधि में, कड़वाहट कम करने के लिए छिलकों को उबालने के बाद, उन्हें चीनी की चाशनी में पकाया जाता है और फिर सुखाया जाता है। कुछ व्यंजनों में, अंतिम उत्पाद के स्वाद को बढ़ाने के लिए चाशनी में संतरे के रस का उपयोग किया जाता है, जिससे एक हल्का खट्टा-मीठा स्वाद आता है।

वैश्विक स्तर पर, खाद्य अपशिष्ट एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बना हुआ है। खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, मानव उपभोग के लिए उत्पादित लगभग एक तिहाई भोजन, जो 1.3 बिलियन टन है, प्रतिवर्ष बर्बाद हो जाता है। इस बर्बादी का एक बड़ा हिस्सा जैविक ठोस अपशिष्ट होता है, जिसके प्रबंधन के लिए खाद बनाने जैसी तकनीकें अपनाई जाती हैं। संतरे के छिलके का यह उपयोग इस व्यापक समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है, जो अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में बदलने के 'वेस्ट टू वेल्थ' दर्शन को पुष्ट करता है।

इस प्रकार के नवाचार खाद्य क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देते हैं, खासकर भारत जैसे देशों में, जहाँ स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भी जैविक कचरा प्रबंधन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह प्रक्रिया खाद्य अपशिष्ट प्रबंधन नियमों, 2016 के सिद्धांतों के अनुरूप है, जो स्रोत पर कचरे के अलग भंडारण पर जोर देते हैं। संतरे के छिलके का यह परिवर्तन, जो पहले लैंडफिल में जाकर मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैस उत्पन्न करता, अब एक स्वादिष्ट और कार्यात्मक खाद्य उत्पाद बन गया है, जो टिकाऊ उपभोग की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित करता है।

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स्रोतों

  • Liputan 6

  • Liputan6.com

  • Mureks

  • Liputan6.com

  • Radar Malang

  • Batam Pos

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