HD 137010 b, जो पृथ्वी के समान होने की संभावना रखता है, में एक संभावित महत्वपूर्ण अंतर है: यह सदैव जमे रहने वाले मंगल से भी ठंडा हो सकता है.
खगोलविदों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण खोज की पुष्टि की है। उन्होंने HD 137010 b नामक एक संभावित एक्सोप्लैनेट की पहचान की है, जिसकी त्रिज्या हमारी पृथ्वी से लगभग छह प्रतिशत बड़ी होने का अनुमान लगाया गया है। इस रोमांचक वैज्ञानिक खोज का विस्तृत विवरण जनवरी 2026 के अंत में प्रतिष्ठित पत्रिका 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स' में प्रकाशित किया गया था। यह ग्रह हमारे सौर मंडल से लगभग 146 से 150 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एक ऐसे तारे की परिक्रमा कर रहा है जो काफी हद तक हमारे सूर्य के समान है। इस शोध में यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न क्वींसलैंड (UniSQ), हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने मिलकर काम किया है, जो इस अध्ययन के वैश्विक महत्व को रेखांकित करता है।
इस खोज की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प और प्रेरणादायक रही है। दरअसल, साल 2017 में 'प्लैनेट हंटर्स' नामक नागरिक विज्ञान परियोजना के प्रतिभागियों ने पहली बार एक धुंधले ट्रांजिट सिग्नल को नोटिस किया था। इस शोध के मुख्य लेखक डॉ. अलेक्जेंडर वेनर ने इस सिग्नल की पहचान तब की थी जब वे केवल हाई स्कूल के छात्र थे। आज वे जर्मनी के हीडलबर्ग में स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी में पोस्टडॉक्टरल फेलो के रूप में कार्यरत हैं। HD 137010 b को पृथ्वी के आकार के एक्सोप्लैनेट उम्मीदवार के रूप में मान्यता मिलना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि ट्रांजिट विधियों के माध्यम से किसी ग्रह की पुष्टि करने के लिए आमतौर पर कई बार गहन अवलोकन की आवश्यकता होती है।
ग्रह की भौतिक विशेषताओं की बात करें तो यह अपने तारे का एक चक्कर लगभग 355 दिनों में पूरा करता है, जो पृथ्वी के एक वर्ष के काफी करीब है। हालांकि यह ग्रह अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र (habitable zone) में होने की लगभग 50 प्रतिशत संभावना रखता है, लेकिन इसकी सतह का तापमान बहुत कम होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहाँ का तापमान -70 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे गिर सकता है, जिससे यह एक "सुपर-स्नोबॉल" की स्थिति में हो सकता है। इसका मुख्य कारण इसका मेजबान तारा HD 137010 है, जो एक K-बौना (K-dwarf) तारा है। यह हमारे सूर्य की तुलना में कम चमकीला और ठंडा है, जिसके कारण इस ग्रह को सूर्य के प्रकाश का केवल एक तिहाई हिस्सा ही प्राप्त होता है, जिससे इसकी जलवायु मंगल ग्रह जैसी बर्फीली हो जाती है।
UniSQ की डॉ. चेल्सी हुआंग ने इस खोज पर टिप्पणी करते हुए बताया कि HD 137010 b की सापेक्ष निकटता इसे भविष्य के उन्नत दूरबीनों के लिए एक असाधारण लक्ष्य बनाती है। विशेष रूप से नासा (NASA) की आगामी 'हैबिटेबल वर्ल्ड्स ऑब्जर्वेटरी' के माध्यम से इस पर और अधिक विस्तृत शोध किया जा सकता है। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो रहने योग्य क्षेत्र में स्थित सबसे करीबी ग्रह केपलर-186f (Kepler-186f) इससे लगभग चार गुना अधिक दूर है और बीस गुना कम चमकीला है। 27 जनवरी 2026 को प्रकाशित इस शोध का वैज्ञानिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह पृथ्वी के समान त्रिज्या और कक्षीय गुणों वाला पहला ऐसा उम्मीदवार है जो एक पर्याप्त चमकीले सूर्य जैसे तारे के सामने से गुजरता है, जिससे भविष्य के अवलोकन सुलभ हो जाते हैं।
स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की डॉ. सारा वेब, जो इस अध्ययन का हिस्सा नहीं थीं, ने एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मानक की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी खगोलीय पिंड को आधिकारिक तौर पर 'पुष्टि शुदा एक्सोप्लैनेट' का दर्जा देने के लिए "गोल्ड स्टैंडर्ड" यानी तीन दर्ज ट्रांजिट की आवश्यकता होती है, जबकि अभी तक केवल एक ही ट्रांजिट रिकॉर्ड किया गया है। फिर भी, 2017 में एकत्र किए गए K2 डेटा के विश्लेषण ने उच्च फोटोमेट्रिक सटीकता दिखाई है, जिससे इस एकल लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले ट्रांजिट को दर्ज करना संभव हो सका। HD 137010 b की संभावित जीवन-अनुकूलता पूरी तरह से वहां के वायुमंडल के घनत्व पर निर्भर करती है, जो इसे भविष्य के मिशनों के लिए वायुमंडलीय मॉडलिंग का एक अनिवार्य विषय बनाता है।