तपनुली से होमालोमेना लिंगुआ-फेलिस की नई प्रजाति: कैसे पौधे की बनावट ने इसे 'बिल्ली की जीभ' का नाम दिया

द्वारा संपादित: An goldy

Kekayaan hayati Indonesia kembali bertambah dengan ditemukannya spesies tanaman baru bernama Homalomena lingua-felis di kawasan Batang Toru, Sumatera Utara. Tanaman ini memiliki ciri unik berupa permukaan daun dengan rambut lebat yang menyerupai tekstur lidah kucing. Meski baru

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इंडोनेशिया की नेशनल रिसर्च एंड इनोवेशन एजेंसी (BRIN) ने आधिकारिक तौर पर उत्तरी सुमात्रा के तपनुली क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों की एक नई स्थानिक प्रजाति की खोज की पुष्टि की है। इस नई वनस्पति को वैज्ञानिक रूप से 'होमालोमेना लिंगुआ-फेलिस' (Homalomena lingua-felis) नाम दिया गया है, जो इस क्षेत्र की अनूठी जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह खोज न केवल वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह सुमात्रा के समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र की ओर दुनिया का ध्यान भी आकर्षित करती है।

इस महत्वपूर्ण प्रजाति की पहचान जनवरी 2024 में बटांग टोरू क्षेत्र में आयोजित एक फील्ड अभियान के दौरान की गई थी। इसके बाद, मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'फायटोकीज़' (PhytoKeys) में इस प्रजाति का टैक्सोनोमिक विवरण विस्तार से प्रकाशित किया गया। इस पौधे को इसका लैटिन नाम, जिसका अर्थ 'बिल्ली की जीभ' होता है, इसकी एक अनूठी शारीरिक विशेषता के कारण दिया गया है: इसकी पत्तियों की ऊपरी सतह घने बालों से ढकी होती है, जिसकी बनावट बिल्ली की जीभ के खुरदरे अहसास की याद दिलाती है। बीआरिन (BRIN) के मुहम्मद रिफकी हरीरी के नेतृत्व में इस शोध दल में हर्बेरियम बांडुंगेंस SITH ITB, सेबेलस मारेट विश्वविद्यालय, IPB विश्वविद्यालय, लैम्पुंग विश्वविद्यालय, इंडोनेशियाई ट्रॉपिकल बॉटनी फाउंडेशन और जंगल फार्म नर्सरी के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल थे।

प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) के मानदंडों के आधार पर की गई प्रारंभिक समीक्षा में 'होमालोमेना लिंगुआ-फेलिस' को 'सुभेद्य' (Vulnerable - VU) श्रेणी में रखने की आवश्यकता बताई गई है। यह चिंताजनक स्थिति इसके अत्यंत सीमित वितरण क्षेत्र और वनों की कटाई एवं अवैध पौधों के संग्रह जैसे गंभीर मानवीय खतरों के कारण उत्पन्न हुई है। होमालोमेना वंश के संदर्भ में, सुमात्रा को जैव विविधता का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहाँ वर्तमान में इसकी 41 ज्ञात प्रजातियाँ मौजूद हैं। हालांकि, एच. लिंगुआ-फेलिस को अस्तित्व के उच्च जोखिम का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इसका प्राकृतिक आवास—समुद्र तल से 15-50 मीटर की ऊंचाई पर स्थित झरनों के पास की चट्टानी दीवारें—पर्यावरण क्षरण के प्रति बहुत संवेदनशील हैं।

वैज्ञानिकों ने 'होमालोमेना लिंगुआ-फेलिस' के वर्गीकरण को इसकी निकटतम संबंधित प्रजाति 'होमालोमेना पेक्सा' (Homalomena pexa) के साथ गहन तुलना के आधार पर स्पष्ट किया है। इस अध्ययन ने दोनों के बीच स्पष्ट रूपात्मक और आनुवंशिक अंतरों को उजागर किया है। मुख्य भिन्नताओं में इसका काफी छोटा डंठल (पेटियोल) शामिल है, जिसकी लंबाई केवल 2.0-4.5 सेमी है, जबकि 'एच. पेक्सा' में यह 7.0-12 सेमी तक होती है। इसके अतिरिक्त, इसके डंठल और पत्तियों की निचली सतह का दानेदार (पैपिलोज़) होना और इसके नर फूलों के क्षेत्र का विशिष्ट शंक्वाकार आकार इसे अपनी श्रेणी में अद्वितीय बनाता है।

यह नई खोज इंडोनेशिया के वनस्पति खजाने के डेटाबेस को समृद्ध करती है और उत्तरी सुमात्रा के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है। बटांग टोरू क्षेत्र, जहाँ यह प्रजाति खोजी गई थी, सुमात्रा में प्राचीन उष्णकटिबंधीय वर्षावन का अंतिम शेष हिस्सा है, लेकिन यह वर्तमान में जलविद्युत परियोजनाओं सहित औद्योगिक विकास के भारी दबाव में है। ग्रीनपीस (Greenpeace) के आंकड़ों के अनुसार, 1990 और 2022 के बीच बटांग टोरू जलग्रहण क्षेत्र में लगभग 70,000 हेक्टेयर जंगल नष्ट हो गया है, जो इसके कुल क्षेत्रफल का लगभग 21 प्रतिशत है। वर्तमान में, इंडोनेशियाई अधिकारी उन 12 कानूनी संस्थाओं की गतिविधियों की जांच कर रहे हैं, जिन पर इस दुर्लभ प्रजाति के आवास के आसपास के जंगलों को नुकसान पहुंचाने का संदेह है।

अंततः, इंडोनेशिया के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों के एक समर्पित समूह द्वारा की गई यह खोज वैश्विक जैव विविधता के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देश की प्रतिष्ठा को और मजबूत करती है। यह स्पष्ट करता है कि इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान, बल्कि कड़े प्रशासनिक और संरक्षण प्रयासों की भी आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियां इस प्राकृतिक विरासत को देख सकें। यह खोज हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के पास अभी भी कई रहस्य हैं जिन्हें सहेजना हमारी जिम्मेदारी है।

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स्रोतों

  • KOMPAS.com

  • BRIN

  • Wikipedia

  • WARTASEKOLAH.ID

  • International Plant Names Index

  • Google Scholar

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