तनाव प्रबंधन में इलियिज्म: स्वयं के नाम का उपयोग करने का मनोवैज्ञानिक आधार

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

मनोवैज्ञानिक अनुसंधान यह पुष्टि करता है कि तनावपूर्ण स्थितियों के दौरान 'मैं' के बजाय अपने स्वयं के नाम का उपयोग करने से भावनात्मक विनियमन में वृद्धि होती है। यह विशिष्ट भाषाई परिवर्तन, जिसे इलियिज्म के नाम से जाना जाता है, व्यक्ति को स्वयं के बारे में तीसरे व्यक्ति में बात करने के लिए प्रेरित करता है। यह प्रक्रिया अभिभूत करने वाली भावनाओं से एक लाभकारी मनोवैज्ञानिक दूरी बनाती है, जिससे व्यक्ति समस्या में डूबे रहने के बजाय उसे बाहरी रूप से देखने की स्थिति में आ जाता है। यह अलगाव अत्यधिक दबाव या अवरोध महसूस होने पर स्पष्टता प्राप्त करने में सहायता करता है।

इलियिज्म की यह पद्धति आंतरिक संवाद पर किए गए अध्ययनों के अनुसार सामाजिक तनाव के बेहतर प्रबंधन और दबाव में प्रदर्शन में सुधार की सुविधा प्रदान करती है। यह साधारण परिवर्तन मानसिक प्रयास की अधिकता की मांग किए बिना भावनात्मक तीव्रता को कम करता है। व्यवहार में, व्यक्तियों को आत्म-आलोचनात्मक विचारों को पुनर्गठित करने की आवश्यकता होती है; उदाहरण के लिए, "मैं अवरुद्ध हूँ" को अपने नाम का उपयोग करके एक निर्देश में बदला जा सकता है, जैसे "[नाम] को इस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।" यह तकनीक स्वचालित नकारात्मक प्रतिक्रियाओं को बाधित करने और विचार पैटर्न को प्रभावी ढंग से व्यवस्थित करने के लिए एक समयोचित सहायक उपकरण के रूप में कार्य करती है।

वाटरलू विश्वविद्यालय में इगोर ग्रॉसमैन जैसे शोधकर्ताओं ने बुद्धिमानीपूर्ण निर्णय लेने के लिए आवश्यक 'मेटाकॉग्निटिव घटकों' पर ध्यान केंद्रित किया है। उनके निष्कर्षों के अनुसार, तीसरे व्यक्ति में बात करने से बौद्धिक विनम्रता और दूसरों के दृष्टिकोण को पहचानने की क्षमता बढ़ती है, जिससे बुद्धिमान तर्क स्कोर में वृद्धि होती है। मिशिगन विश्वविद्यालय में एथन क्रॉस के साथ किए गए एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि तीसरे व्यक्ति में बात करने वाले प्रतिभागियों ने दर्दनाक भावनात्मक अनुभवों और चिंतन से जुड़े आत्म-संदर्भित प्रसंस्करण क्षेत्र (medial prefrontal cortex) में कम मस्तिष्क गतिविधि प्रदर्शित की। यह दर्शाता है कि यह अभ्यास संज्ञानात्मक नियंत्रण को शामिल किए बिना भावनात्मक विनियमन को बढ़ाता है, जो इसे एक सहज रणनीति बनाता है।

जेसन मोसर के मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी क्लिनिकल साइकोफिजियोलॉजी लैब द्वारा किए गए शोध ने इस प्रभाव की तात्कालिकता को उजागर किया। उनके निष्कर्षों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति स्वयं को तीसरे व्यक्ति में संदर्भित करना शुरू करता है तो भावनात्मक संकट बहुत तेज़ी से, एक सेकंड के भीतर, कम हो जाता है। यह त्वरित प्रभाव पुष्टि करता है कि इलियिज्म एक ऑन-द-स्पॉट रणनीति है जो तत्काल भावनात्मक विनियमन की सुविधा प्रदान करती है। यह दृष्टिकोण विशेष रूप से तब उपयोगी है जब व्यक्ति अतीत के दर्दनाक अनुभवों को याद कर रहा हो या संकट के समय में हो, क्योंकि यह शांत और संयमित रहने में मदद करता है।

यह तकनीक आत्म-करुणा को बढ़ावा देने और नकारात्मक आत्म-चर्चा की आवाज़ों को नियंत्रित करने के लिए 'दूरस्थ आत्म-चर्चा' (distanced self-talk) की अवधारणा के तहत आती है। तनाव प्रबंधन के लिए, नियंत्रण योग्य पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है, और यह भाषाई बदलाव बाहरी दृष्टिकोण प्रदान करके इस नियंत्रण की भावना को मजबूत करता है। इस प्रकार, स्वयं के नाम का उपयोग करके आंतरिक संवाद को बदलना, भावनात्मक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक सुलभ और वैज्ञानिक रूप से समर्थित तरीका प्रस्तुत करता है, जिससे व्यक्ति अधिक तर्कसंगत और संतुलित प्रतिक्रिया दे पाता है।

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स्रोतों

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  • 20Minutos

  • Código San Luis

  • ResearchGate

  • Leon Hunter

  • Sonya Looney Show

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