किम जोंग उन की बेटी किम जू ए बीजिंग में पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखीं, उत्तराधिकार की अटकलें तेज
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उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने हाल ही में अपनी बेटी किम जू ए के साथ बीजिंग की एक महत्वपूर्ण यात्रा की, जो उनकी पहली ज्ञात अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति थी। इस यात्रा ने इस बात की अटकलों को और हवा दी है कि क्या वह अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार की जा रही हैं। यह घटनाक्रम उत्तर कोरिया के नेतृत्व में संभावित बदलावों की ओर इशारा करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
सितंबर 2025 की शुरुआत में हुई इस यात्रा के दौरान, किम जोंग उन और उनकी लगभग 12-13 वर्षीय बेटी किम जू ए ने बीजिंग में एक सैन्य परेड में भाग लिया। यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी। तस्वीरों में किम जू ए को अपने पिता के ठीक पीछे खड़े देखा गया, जो आमतौर पर उच्च-पदस्थ अधिकारियों के लिए आरक्षित स्थान है। यह पहली बार था जब किम जू ए ने किसी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे उनके उत्तराधिकारी बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।
दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा (NIS) का मानना है कि किम जू ए अपने पिता की सबसे संभावित उत्तराधिकारी हैं। यह आकलन उनकी बढ़ती सार्वजनिक उपस्थिति और राज्य मीडिया द्वारा उन्हें दिए गए उपाधियों पर आधारित है। हालांकि, उत्तर कोरियाई समाज में पारंपरिक पितृसत्तात्मक मूल्यों के कारण, एक महिला नेता के सत्ता में आने को लेकर कुछ अधिकारी संदेह व्यक्त करते हैं। यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या उत्तर कोरियाई समाज, जो लंबे समय से पुरुष नेतृत्व के अधीन रहा है, एक महिला शासक को स्वीकार करेगा।
किम जू ए को पहली बार नवंबर 2022 में एक बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के दौरान सार्वजनिक रूप से देखा गया था। तब से, वह विभिन्न सैन्य और राजनयिक कार्यक्रमों में अपने पिता के साथ दिखाई देती रही हैं, जिससे उनके उत्तराधिकारी के रूप में तैयार होने की अटकलें तेज हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि चीन की यात्रा, जहां उन्होंने अन्य राष्ट्राध्यक्षों के साथ भाग लिया, किम जू ए के लिए एक महत्वपूर्ण राजनयिक अनुभव है और यह उनके भविष्य के नेतृत्व की भूमिका के लिए एक मजबूत संकेत है।
चीन और उत्तर कोरिया के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंध रहे हैं, जो 1949 में राजनयिक संबंधों की स्थापना से शुरू हुए थे। कोरियाई युद्ध के दौरान चीन ने उत्तर कोरिया का समर्थन किया था, और 1961 में दोनों देशों ने एक रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए थे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच मौजूदा संबंधों को और मजबूत करती है और उत्तर कोरिया के लिए एक महत्वपूर्ण राजनयिक मंच प्रदान करती है। सैन्य परेड उत्तर कोरियाई शासन के लिए अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने और आंतरिक एकता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है। किम जू ए की इन परेडों में उपस्थिति, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मंच पर, उनके बढ़ते महत्व और संभावित उत्तराधिकार योजना का एक हिस्सा मानी जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उत्तर कोरिया का नेतृत्व भविष्य में इस दिशा में कैसे आगे बढ़ता है और किम जू ए की भूमिका कैसे विकसित होती है।
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स्रोतों
Deutsche Welle
El País
Reuters
AP News
BBC News
The Diplomat
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