वर्ष 2026 की शुरुआत में, अंटार्कटिका के बाहर बर्फ के सबसे बड़े भंडार, ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर में निरंतर और महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की जा रही है। यह स्थिति वैश्विक समुद्री जलस्तर में होने वाले बदलावों के एक प्राथमिक कारक के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत कर रही है। हाल ही में, कोपरनिकस सेंटिनल-2 (Copernicus Sentinel-2) मिशन ने दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र पर केंद्रित उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली उपग्रह तस्वीरें प्रदान की हैं। इन चित्रों में हेलहेम ग्लेशियर (Helheim Glacier) के पास की खड़ी बर्फीली चट्टानों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जो समुद्र में बर्फ के विसर्जन का एक मुख्य मार्ग है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस विशाल बर्फ के पिंड की गतिशीलता और वैश्विक महासागरीय आयतन में इसके योगदान को सटीक रूप से समझने के लिए निरंतर उपग्रह निगरानी अनिवार्य है। यह ध्यान देने योग्य है कि ग्रीनलैंड से पिघलने वाली प्रत्येक 360 गीगाटन बर्फ वैश्विक समुद्र स्तर में 1 मिलीमीटर की वृद्धि के बराबर होती है।
"not a Greenland-wide...warmer than today" The Greenland-wide ice sheet had warm periods "more than 5°C above present" and the melt volume was so much greater than today that GIS contributed up to 1.2 m more to sea level rise. Retreat margins were 100 km beyond today's.
ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि बर्फ के इतनी तेजी से पिघलने का पूर्व उदाहरण मौजूद है, जिसका खुलासा 'ग्रीनड्रिल प्रोजेक्ट' (GreenDrill Project) द्वारा किया गया है। शोधकर्ताओं ने उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड में प्रूडहो डोम (Prudhoe Dome) में 500 मीटर से अधिक बर्फ की ड्रिलिंग की और वहां के तलछट में लगभग 7,100 साल पुराने रासायनिक संकेतों की खोज की। ये संकेत दर्शाते हैं कि होलोसीन (Holocene) गर्म काल के दौरान यह डोम पूरी तरह से पिघल गया था। उस दौर में, गर्मियों का तापमान वर्तमान स्तरों की तुलना में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान लगाया गया था। जलवायु मॉडल भविष्यवाणी करते हैं कि यदि वर्तमान ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का मार्ग जारी रहा, तो 2100 तक ऐसी ही स्थितियां फिर से बन सकती हैं। यह ऐतिहासिक पीछे हटना बर्फ की चादर की मामूली गर्मी के प्रति संवेदनशीलता पर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
सतह के पिघलने की चिंताओं के साथ-साथ, कुछ भूगर्भीय कारक भी नीचे से बर्फ को प्रभावित कर रहे हैं। ओटावा विश्वविद्यालय (University of Ottawa) के नेतृत्व में एक टीम द्वारा तैयार किए गए विस्तृत त्रि-आयामी मॉडलों से पता चलता है कि ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे असमान गर्मी फंसी हुई है। यह ग्रीनलैंड के एक प्राचीन ज्वालामुखी हॉटस्पॉट (संभवतः आइसलैंड हॉटस्पॉट) के ऊपर से गुजरने का परिणाम है। लगभग 80 से 35 मिलियन वर्ष पहले टेक्टोनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से विकसित यह भू-तापीय विसंगति ग्रीनलैंड के एक चौथाई हिस्से में फैली हुई है। इस गर्मी ने गहराई में बर्फ को पतला कर दिया है और उप-ग्लेशियर पिघले हुए पानी से समृद्ध एक क्षेत्र का निर्माण किया है, जो आज बर्फ की चादर के प्रवाह की गति और उसके आधार की फिसलन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
त्वरित पिघलने के कारण उत्तरी अटलांटिक महासागर में मीठे पानी का भारी प्रवाह 'अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन' (AMOC) की स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। AMOC वैश्विक महासागरीय ऊष्मा परिवहन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है। इस धारा प्रणाली में किसी भी प्रकार की मंदी या संभावित व्यवधान, जिसमें ग्रीनलैंड के पास घने उत्तरी अटलांटिक गहरे पानी का नीचे बैठना शामिल है, उत्तरी गोलार्ध में क्षेत्रीय जलवायु पैटर्न को व्यापक रूप से बदल सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ लीज (University of Liège) द्वारा समन्वित और NIC5 सुपरकंप्यूटर की मदद से किए गए शोध के अनुसार, उच्च उत्सर्जन परिदृश्य (SSP585) के तहत, 2100 तक ग्रीनलैंड सालाना 964 से 1,735 गीगाटन बर्फ खो सकता है। इसके परिणामस्वरूप समुद्र के स्तर में एक मीटर तक की वृद्धि होने की संभावना है। इस निरंतर प्रक्रिया की निगरानी 'पोलर पोर्टल' (Polar Portal) जैसी संस्थाओं द्वारा की जा रही है, जो चार डेनिश सरकारी अनुसंधान संस्थानों की एक संयुक्त पहल है।



