पेरू के अमेज़न वर्षावनों के दलदली इलाकों में साइकैड की नई प्रजाति 'Zamia urarinorum' की खोज

द्वारा संपादित: An goldy

पेरू के अमेज़न वर्षावन के हृदय स्थल में एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने साइकैड (cycad) की एक बिल्कुल नई प्रजाति की खोज की है, जिसे आधिकारिक तौर पर 'Zamia urarinorum' नाम दिया गया है। फरवरी 2026 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'Phytotaxa' में प्रकाशित यह शोध अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रजाति उन कठिन परिस्थितियों में फल-फूल रही है जिन्हें पहले इन पौधों के लिए घातक माना जाता था। आमतौर पर साइकैड, जो 200 मिलियन से अधिक वर्षों के विकासवादी इतिहास वाले प्राचीन बीज वाले पौधे हैं, अच्छी जल निकासी वाली उष्णकटिबंधीय मिट्टी पसंद करते हैं। हालांकि, यह नई प्रजाति अमेज़न के उन दलदली क्षेत्रों में पाई गई है जहाँ साल भर पानी भरा रहता है, जो वनस्पति विज्ञान की पुरानी धारणाओं को चुनौती देता है।

इस खोज का श्रेय एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय टीम को जाता है, जिसमें पेरूवियन इंस्टीट्यूट फॉर अमेज़न रिसर्च (IIAP) और पोंटिफिकल कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ पेरू (PUCP) के विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्हें मोंटगोमरी बॉटनिकल सेंटर (MBC) का भी सहयोग प्राप्त हुआ। इस अनोखे पौधे को पेरू के लोरेटो प्रांत में टिग्रिलो और उरितुयाकु नदियों के बीच स्थित दुर्गम क्षेत्रों में पहचाना गया है। 'Zamia urarinorum' की सबसे विशिष्ट खूबी इसकी 'हाइपोक्सिया' यानी ऑक्सीजन की भारी कमी को सहने की शारीरिक क्षमता है। दलदली मिट्टी में पानी की अधिकता के कारण ऑक्सीजन का स्तर बहुत गिर जाता है, लेकिन यह पौधा वहां भी जीवित रहने के लिए अनुकूलित हो चुका है। 'Zamia' वंश में इस तरह का पारिस्थितिक लचीलापन पहले कभी नहीं देखा गया था और यह विज्ञान के लिए पूरी तरह से नया है।

अगर शारीरिक बनावट की बात करें, तो 'Zamia urarinorum' अपनी करीबी संबंधी प्रजाति 'Zamia multidentata' से काफी मिलती-जुलती है, लेकिन शोधकर्ताओं ने इनमें कुछ बुनियादी अंतर पाए हैं। नई प्रजाति के तने पर पत्तियों की संख्या काफी कम होती है, जहाँ 'Z. multidentata' में 8 से 14 पत्तियां होती हैं, वहीं इसमें केवल 2 से 5 पत्तियां ही पाई जाती हैं। इसके अलावा, इसकी पत्तियां अधिक लंबी और संकरी होती हैं, जिनके किनारों पर सूक्ष्म दांते केवल ऊपरी हिस्सों में ही मौजूद होते हैं। इसके प्रजनन अंग यानी पराग शंकु भी आकार में छोटे होते हैं और उनमें एक विशेष प्रकार का रोमिल (tomentose) अक्ष होता है। इस अध्ययन की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने ब्राजील के एक्रे राज्य के बाहर पहली बार पेरू के क्षेत्र में 'Z. multidentata' की मौजूदगी के प्रमाण भी पेश किए हैं।

स्थानीय 'उरारिना' (Urarina) समुदाय के सम्मान में नामित यह प्रजाति न केवल वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में जल चक्र के नियमन और दलदली मिट्टी में कार्बन सोखने में भी बड़ी भूमिका निभाती है। हालांकि, इस नई खोज पर वर्तमान में संकट के बादल मंडरा रहे हैं। लोरेटो क्षेत्र में अवैध स्वर्ण खनन की बढ़ती गतिविधियों ने इस नाजुक पर्यावरण को खतरे में डाल दिया है। खनन के कारण नदियों में पारे का प्रदूषण बढ़ रहा है और जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। कानूनी विशेषज्ञ सेसर इपेंज़ा (César Ipenza) ने चेतावनी दी है कि 2026 में सोने की कीमतें 2,000 डॉलर प्रति औंस के करीब होने के कारण अवैध गतिविधियों में भारी उछाल आया है। इसके साथ ही, 'अमेज़न जलमार्ग' और इकिटोस-सारामिरिज़ा सड़क जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी इस क्षेत्र की जैव विविधता के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

अंततः, 'Zamia urarinorum' की खोज यह दर्शाती है कि अमेज़न के जंगलों में अभी भी जैव विविधता के कितने अनमोल खजाने छिपे हुए हैं जिनका दस्तावेजीकरण होना बाकी है। यह खोज इस स्थानिक प्रजाति के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। वर्तमान में, UNAP के साथ मिलकर IUC कार्यक्रम जैसे स्थानीय प्रबंधन प्रयास लोरेटो में टिकाऊ समाधान खोजने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में जुटे हैं। मानवीय दबाव और औद्योगिक विस्तार के इस दौर में, ऐसी दुर्लभ प्रजातियों को बचाना न केवल विज्ञान के लिए, बल्कि पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन के भविष्य के लिए भी अनिवार्य है।

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स्रोतों

  • Diário da Região

  • Phytotaxa

  • Noticias Ambientales

  • Montgomery Botanical Center

  • CNN en Español

  • Portal Amazônia

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