वर्ष 2026 में अत्यधिक हस्तक्षेपकारी पालन-पोषण से हटकर हाइब्रिड दृष्टिकोण की ओर रुझान

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

वर्ष 2026 में, बाल विकास विशेषज्ञ 'लॉनमूवर पेरेंटिंग' नामक अत्यधिक हस्तक्षेपकारी परवरिश शैली की गहन समीक्षा कर रहे हैं। इस शैली में माता-पिता जानबूझकर अपने बच्चों के रास्ते से हर बाधा और निराशा को हटा देते हैं। यह अत्यधिक सुरक्षात्मक दृष्टिकोण, भले ही अच्छे इरादों से प्रेरित हो, बच्चों में समस्या-समाधान, जिम्मेदारी की भावना और भावनात्मक लचीलेपन जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल के विकास को बाधित करता है। बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह का व्यवहार बच्चों को यह सूक्ष्म संदेश देता है कि वे स्वयं समस्याओं का सामना करने में असमर्थ हैं।

अनुसंधान यह दर्शाता है कि अत्यधिक संरक्षित वातावरण में पले-बढ़े बच्चों को तनाव प्रबंधन में कठिनाई होती है और किशोरावस्था तथा वयस्कता में उनमें चिंता के स्तर में वृद्धि देखी जाती है। मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं के अनुसार, सच्चा आत्म-विश्वास माता-पिता द्वारा हर मुद्दे को हल करने से नहीं, बल्कि उम्र के अनुरूप संघर्षों से गुजरने से विकसित होता है। अत्यधिक सख्त पालन-पोषण के विपरीत, जो बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और विद्रोह की भावना पैदा कर सकता है, यह नया रुझान बच्चों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करता है।

हाल के वर्षों में, अत्यधिक हस्तक्षेप और अत्यधिक अनुमेयता दोनों के प्रति प्रतिक्रिया के रूप में, 2026 के पालन-पोषण के रुझान एक बदलाव दिखा रहे हैं। कुछ लोग हालिया 'जेंटल पेरेंटिंग' शैलियों के विपरीत 'एफएएफओ' (फाक अराउंड एंड फाइंड आउट) जैसे अधिक कठोर दृष्टिकोणों पर चर्चा कर रहे हैं। जेंटल पेरेंटिंग, जो सहानुभूति और सम्मान पर जोर देती है, मिलेनियल और जेन जी माता-पिता के बीच लोकप्रिय हुई, जो अपने बचपन की सख्त परवरिश से अलग होना चाहते थे, लेकिन कुछ अध्ययनों से पता चला है कि यह माता-पिता पर अत्यधिक भावनात्मक बोझ डाल सकता है।

इसके विपरीत, उभरते हुए सकारात्मक रुझान 'हाइब्रिड पेरेंटिंग' का समर्थन करते हैं, जो प्रभावी शैलियों का मिश्रण है। इसमें माता-पिता और बच्चों दोनों के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को सीमित करने और सख्त व्यवहार प्रबंधन के बजाय भावनात्मक बुद्धिमत्ता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जाता है। डॉ. राहुल चंडोक जैसे मनोचिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि माता-पिता का लगातार फोन में व्यस्त रहना, जिसे 'फोब्बिंग' कहा जाता है, बच्चों में भावनात्मक अलगाव और सामाजिक कौशल की कमी पैदा कर सकता है, जो उनके विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि माता-पिता को पूर्णतावाद से बचना चाहिए और स्वयं तथा अपने बच्चों के लिए अधिक यथार्थवादी अपेक्षाएं अपनानी चाहिए। यह दृष्टिकोण बच्चों को अपनी गलतियों से सीखने और भावनात्मक रूप से विकसित होने का अवसर देता है, जैसा कि चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट नम्रता सिंह ने बताया है कि जेंटल पेरेंटिंग में बच्चों को डांट-डपट के बजाय बातचीत के माध्यम से उनकी गलतियों का एहसास कराया जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बच्चों के विकास पर माता-पिता के व्यवहार का गहरा प्रभाव पड़ता है; एक अध्ययन में पाया गया कि माता-पिता की सख्ती 9 साल से अधिक उम्र के बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक असर डाल सकती है।

2026 में, माता-पिता अपने बच्चों के लिए पोषण, प्रोत्साहन और सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण तत्वों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जैसा कि यूनिसेफ ने संकट के समय में प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास में निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह नया संतुलन, जो अत्यधिक हस्तक्षेप और अत्यधिक ढील के बीच संतुलन साधता है, बच्चों को आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ भविष्य के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखता है, जो कि उम्र-उपयुक्त चुनौतियों के माध्यम से ही संभव है। यह बदलाव माता-पिता को अपने व्यवहार पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करता है, क्योंकि बच्चे शब्दों से अधिक उन कार्यों से सीखते हैं जो वे अपनी आँखों से देखते हैं।

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स्रोतों

  • Sabah

  • Sabah

  • Hürriyet Haberler

  • SavvyMom

  • HTHayat

  • Hürriyet Haberler

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