प्याज और लहसुन के संरक्षण के लिए उन्नत भंडारण तकनीकें और सावधानियां

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करने और उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उद्देश्य से नवीन तकनीकों का विकास जारी है, जिसमें प्याज और लहसुन जैसी महत्वपूर्ण मसाला फसलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ये दोनों भारतीय व्यंजनों के आधार स्तंभ हैं, जिनकी खेती से किसानों को अच्छी आय प्राप्त हो सकती है, बशर्ते उनका संरक्षण वैज्ञानिक ढंग से किया जाए। नमी और प्रकाश के संपर्क में आने से होने वाली सामान्य सड़न को रोकने के लिए अब उन्नत संरक्षण विधियाँ अपनाई जा रही हैं, जो इन कंदों की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में सहायक हैं।

पेशेवर स्तर पर, छह से आठ महीनों तक प्याज और लहसुन की ताजगी सुनिश्चित करने के लिए एक विशिष्ट भंडारण विधि का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में, इन सामग्रियों को ठंडे और अंधेरे स्थानों पर, सूखे और महीन रेत या बिना नमक वाले चावल के मिश्रण (सब्सट्रेट) में परत दर परत जमाया जाता है। यह विधि नमी के अवशोषण को नियंत्रित करती है और अंकुरण तथा क्षय को धीमा करने वाले प्रकाश से बचाती है। इसके अतिरिक्त, कटाई के बाद, बल्बों को अंतिम भंडारण से पहले गर्म हवा से पूर्व-सुखाना उनकी दीर्घायु को दोगुना कर सकता है, क्योंकि यह प्रारंभिक सुखाने की प्रक्रिया फफूंदी और बैक्टीरिया के विकास के जोखिम को कम करती है।

घरेलू स्तर पर, जहां बड़े पैमाने पर रेत या चावल का उपयोग अव्यावहारिक हो सकता है, वहां उचित वायु संचार (वेंटिलेशन) बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसके लिए, छिद्रित कागज के थैलों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जो उत्पाद को बाहरी तत्वों से सुरक्षित रखते हुए उसे 'सांस लेने' की अनुमति देते हैं। प्लास्टिक के थैलों से बचना आवश्यक है क्योंकि वे नमी को फँसा लेते हैं, जिससे सड़न की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके विपरीत, हवादार जालीदार थैले या बुनी हुई टोकरियाँ ठंडे, अंधेरे कोनों में भंडारण के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं, जहाँ तापमान लगभग 60 से 65 डिग्री फ़ारेनहाइट के आसपास नियंत्रित हो।

संरक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण और अक्सर अनदेखी की जाने वाली सावधानी यह है कि प्याज और लहसुन को आलू से हर हाल में दूर रखा जाना चाहिए। यह अलगाव आवश्यक है क्योंकि आलू से निकलने वाली गैसें, विशेष रूप से एथिलीन, प्याज और लहसुन के पकने और खराब होने की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। कुछ स्रोतों के अनुसार, प्याज से निकलने वाली गैस आलू को 30% तेजी से खराब कर सकती है। इसलिए, इन तीनों को अलग-अलग भंडारण क्षेत्रों में रखना इष्टतम है ताकि सल्फर यौगिकों की वृद्धि और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सके।

फसल प्रबंधन के व्यापक संदर्भ में, प्याज और लहसुन की गुणवत्ता उनकी कटाई के समय पर भी निर्भर करती है। आमतौर पर, लहसुन की कटाई रोपण के 120 से 150 दिनों के भीतर की जाती है, जब पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और ऊपरी हिस्सा सूख जाता है। कटाई के बाद, गांठों को ग्रेडिंग करके और पत्तियों की चोटी बांधकर 10 से 15 दिनों तक पेड़ की छाया या खुली छत के नीचे सुखाना आवश्यक है, बशर्ते पत्तियों में नमी कम हो। भीमा ओमकार और भीमा पर्पल जैसी उन्नत किस्मों को विशेष रूप से अच्छी भंडारण क्षमता के लिए विकसित किया गया है, जो किसानों को वर्षभर आपूर्ति बनाए रखने में मदद करती हैं। इन तकनीकों का पालन करके खाद्य अपव्यय को कम किया जा सकता है।

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स्रोतों

  • To je nápad!

  • dobre jedlo

  • Plný hrniec

  • Opotravinách

  • Rady a tipy pre záhradu

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