नियमित दैनिक सैर से जीवनकाल में वृद्धि संभव: डॉ. संजय भजराज

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय भजराज के अनुसार, निरंतर दैनिक शारीरिक गतिविधि स्वास्थ्य अवधि और दीर्घायु बढ़ाने की सबसे महत्वपूर्ण रणनीति है। यह सरल, प्रतिदिन 20 से 30 मिनट की बाहरी सैर, या 10,000 कदमों का लक्ष्य, एक शक्तिशाली कायाकल्प उपकरण के रूप में कार्य करता है। यह निम्न-प्रभाव वाली गतिविधि हृदय रोग, मधुमेह और संज्ञानात्मक गिरावट जैसी प्रमुख पुरानी बीमारियों के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम करने की क्षमता रखती है।

शोध निष्कर्ष बताते हैं कि जो व्यक्ति प्रतिदिन 10,000 कदम चलते हैं, उनमें हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा काफी कम हो जाता है। एक वर्ष तक इस लक्ष्य को बनाए रखने से डिमेंशिया का खतरा 50% तक कम हो सकता है। यह दृष्टिकोण जटिल जैव-हैक या औषधीय उपचारों के बजाय सुलभ और निरंतर गतिविधि पर जोर देता है। निरंतर चलने की दिनचर्या रक्तचाप को नियंत्रित करने और परिसंचरण में सुधार करने में सहायक होती है, जिससे हृदय प्रणाली को मजबूती मिलती है।

नियमित रूप से चलने से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर प्रभावी ढंग से कम होता है, जो हृदय और मस्तिष्क दोनों के लिए हानिकारक माना जाता है। विशेषज्ञों का मत है कि केवल 30 मिनट की दैनिक सैर, जो पूरे दिन के केवल 3 प्रतिशत समय के बराबर है, कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव कर सकती है। सुबह की सैर, विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त (लगभग 3:30 से 5:30 बजे के बीच) में, वातावरण में प्राण-ऊर्जा की अधिकता के कारण याददाश्त और एकाग्रता को बेहतर बनाती है, क्योंकि इस समय कॉर्टिसोल का स्तर प्राकृतिक रूप से बढ़ना शुरू होता है।

डॉ. भजराज इस बात पर बल देते हैं कि 80% से अधिक पुरानी बीमारियाँ जीवनशैली से प्रेरित होती हैं, जो गति को जटिल फार्माकोलॉजी से ऊपर रखती हैं। यह सिद्धांत इंगित करता है कि दीर्घायु की शुरुआत विशेष आहार या जटिल दिनचर्या से नहीं, बल्कि सुलभ, निरंतर गतिविधि से होती है। शोधों से यह भी पता चला है कि जो लोग प्रतिदिन 10,000 कदम से कम चलते हैं, उनमें लगातार चलने वालों की तुलना में मृत्यु दर अधिक होती है, जिससे गति की मात्रा का महत्व स्पष्ट होता है।

इसके विपरीत, कुछ अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि कदमों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति कितनी देर तक लगातार चलता है; उदाहरण के लिए, 10 से 15 मिनट तक लगातार चलने वालों में हृदय संबंधी रोगों का खतरा केवल 4% पाया गया। नियमित रूप से चलने से एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे 'फील-गुड' हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो तनाव कम करने और भावनात्मक लचीलेपन को बढ़ाने में सहायक होते हैं। यह आदत चिंता और मनोदशा में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकती है।

सुबह की रोशनी शरीर की सर्कैडियन लय को रीसेट करती है, जिससे मेलाटोनिन का उत्पादन बंद होता है और रात में गहरी नींद आती है। 10,000 कदम चलना लगभग 7 से 8 किलोमीटर के बराबर होता है, और इस नियमितता से एक महीने के भीतर मेटाबॉलिज्म में सुधार और रक्तचाप में कमी जैसे बदलाव दिखने लगते हैं। यह कम तीव्रता वाला व्यायाम जोड़ों पर कम दबाव डालता है, जिससे यह व्यापक आयु वर्ग के लिए उपयुक्त बन जाता है, और यह हड्डियों के घनत्व को बढ़ाकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसे खतरों को कम करने में भी योगदान देता है। यह सरल दैनिक अभ्यास, जो जटिल चिकित्सा हस्तक्षेपों से दूर है, वास्तव में स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने का एक मौलिक स्तंभ है।

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स्रोतों

  • Hindustan Times

  • US Cardiologist says THIS is the most powerful tool to cut heart disease risk in half!

  • How Health Coaching Heals the Heart, With Dr. Sanjay Bhojraj

  • Dr. Bhojraj, cardiologist: "You don't need to biohack your way to longevity. Simplicity saves lives"

  • Cardiologist says simple daily habit 'halves' risk of heart disease - Gloucestershire Live

  • Without Knowing, These 7 Evening Habits Cause Heart Disease - VOI.id

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