'मैं हूँ' (I AM) की योजनाओं को पूरा करने में असमर्थता: अब क्या करें?
❓ प्रश्न:
आप कहते हैं कि 'मैं हूँ' की अपनी योजनाएँ होती हैं जिन्हें वह हमारे माध्यम से इस भौतिक जगत में साकार करता है, जैसे कि जीवन के सबक सीखना या विभिन्न अनुभवों—चाहे वह पीड़ित और स्रष्टा के बीच हो या गरीब और अमीर के—को गहराई से समझना। आप अक्सर लिखते हैं कि हमारी अधूरी इच्छाएँ हमारे अस्तित्व का इतना विस्तार कर देती हैं कि हमें उन्हें पूरा करने के लिए अगले जन्म की ओर जाना पड़ता है।
लेकिन यदि इन योजनाओं को पूरा करना संभव ही न हो तो क्या करें, क्योंकि मेरा जन्म ही इस दुनिया में जीने और अपनी चीजों पर अधिकार रखने की मनाही के साथ हुआ है? यह स्थिति पृथ्वी ग्रह पर एक ऐसे अवैध प्रवासी की तरह है जिसे किसी भी क्षण यहाँ से बाहर निकाला जा सकता है।
❗️ ली (lee) का उत्तर:
इसके मुख्य सार को समझने की कोशिश करें। मैं जानबूझकर अपनी बात को केवल दो वाक्यों में समेट रहा हूँ और कोई विस्तार नहीं दे रहा हूँ, ताकि मुख्य संदेश की स्पष्टता बनी रहे।
आप ऐसी किसी भी चीज की चाहत नहीं कर सकते जिसे हासिल करना आपके लिए संभव न हो। इच्छा होने का अर्थ ही यह है कि "वह पहले से है" और यदि समय के रैखिक क्रम में देखें, तो इसका मतलब है कि "वह भविष्य में पहले से ही मौजूद है"।




