सौंदर्य मानकों से हटकर समग्र कल्याण की ओर बढ़ता रुझान
द्वारा संपादित: Olga Samsonova
शारीरिक रूपरेखा और त्वरित वजन घटाने के समाधानों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति लगातार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों को बढ़ावा दे रही है, जिसका मुख्य कारण सोशल मीडिया पर प्रसारित अवास्तविक सौंदर्य मानक हैं। मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि डिजिटल रूप से संशोधित छवियों के साथ निरंतर तुलना करने से शरीर के प्रति असंतोष, चिंता की भावना और आत्म-सम्मान में कमी आती है। शोधकर्ताओं ने यह भी दर्शाया है कि जिन व्यक्तियों में शरीर को लेकर गंभीर असंतोष होता है, उनमें दिखावट से संबंधित चिंता विकार और अवसाद विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
तत्काल सौंदर्य परिवर्तन की खोज से आत्म-सम्मान में केवल क्षणिक वृद्धि मिलती है, जो अक्सर निराशा और शरीर की छवि के विकृत होने की ओर ले जाती है, खासकर जब वास्तविक स्वरूप फ़िल्टर किए गए संस्करणों से मेल नहीं खाता। इसके विपरीत, वर्ष 2026 के लिए उभरते रुझान समग्र कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने की वकालत करते हैं, जो डिजिटल पूर्णता की बजाय प्रामाणिक आत्म-देखभाल और मानवीय जुड़ाव को प्राथमिकता देता है। यह आंदोलन आहार और दिखावट के संबंध में व्यक्तिगत निर्णय लेने में आत्म-ज्ञान को बढ़ावा देता है, जिसमें आत्म-देखभाल को छोटे, सुसंगत अभ्यासों के रूप में परिभाषित किया गया है जो शरीर और मन दोनों का पोषण करते हैं।
विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि सच्चा आत्म-देखभाल स्वयं के बारे में अच्छा महसूस करने से संबंधित है, न कि किसी आदर्श, अक्सर कृत्रिम, रूप की खोज करने से। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 में भी महिलाओं के स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने की सोच दिखाई गई है, जिसमें मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स के प्रशिक्षण से मातृ स्वास्थ्य को सहारा मिलेगा। यह समग्र दृष्टिकोण स्वास्थ्य को केवल बाहरी दिखावे तक सीमित न रखकर आंतरिक संतुलन पर केंद्रित करता है, जैसा कि ध्यान जैसी गतिविधियों से भी पता चलता है जो स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के माध्यम से शारीरिक और मस्तिष्क प्रक्रियाओं को बदलते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीति धीमी गति अपनाना, अपने शरीर की सुनना और त्वरित सुधारों के बजाय टिकाऊ कल्याण का चयन करना है। लंबे समय तक तनाव झेलने के बाद मानसिक रूप से उबरने के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता होती है, जिसमें जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, शारीरिक मुद्रा और मानसिक स्वास्थ्य आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं; सीधी मुद्रा बनाए रखने से मस्तिष्क को सकारात्मक संकेत मिलते हैं जो भावनात्मक संतुलन और तनाव प्रबंधन में सहायक होते हैं, जबकि झुकी हुई मुद्रा अक्सर अवसाद या चिंता से ग्रस्त लोगों में देखी जाती है। यह दर्शाता है कि आत्म-ज्ञान के माध्यम से व्यक्तिगत विकल्पों को प्राथमिकता देना, चाहे वह आहार हो या शारीरिक मुद्रा, कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आर्थिक मोर्चे पर, जहाँ एक ओर भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, वहीं दूसरी ओर 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए निरंतर 8% वृद्धि आवश्यक मानी जा रही है। यह आर्थिक संदर्भ इस बात को रेखांकित करता है कि व्यक्तिगत कल्याण की खोज को व्यापक सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के साथ जोड़ा जाना चाहिए, जहाँ उत्पादकता और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित किया जाए। इस प्रकार, समग्र कल्याण की ओर यह बदलाव केवल व्यक्तिगत मनोविज्ञान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक जीवनशैली और दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है जो टिकाऊपन और आंतरिक संतुष्टि को बाहरी प्रदर्शन से ऊपर रखता है।
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स्रोतों
Portal R7
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Revista Malu
Viver Bem Unimed
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