बच्चों में लचीलापन विकसित करने के लिए माता-पिता को स्वतंत्र समस्या-समाधान की अनुमति देनी चाहिए: विशेषज्ञ
द्वारा संपादित: Olga Samsonova
वर्ष 2026 में बाल मनोविज्ञान के विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया है कि बच्चों के भीतर मानसिक दृढ़ता और मजबूती पैदा करने के लिए अभिभावकों को पीछे हटना होगा और उन्हें अपने स्तर पर समस्याओं का समाधान करने का अवसर देना होगा। यह दृष्टिकोण बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि आत्मनिर्भरता ही वास्तविक शक्ति का आधार बनती है।
डॉक्टर डैनियल एमेन का मत है कि माता-पिता द्वारा अत्यधिक सहायता, जैसे कि बच्चे का स्कूल का काम पूरा कर देना, अनजाने में बच्चे के आत्म-विश्वास और मानसिक सहनशक्ति को कम कर देती है। डॉ. एमेन ने एक व्यावहारिक सुझाव दिया है कि जब बच्चा ऊब महसूस करे, तो माता-पिता को यह पूछना चाहिए, "मुझे आश्चर्य है कि तुम इस बारे में क्या करने वाले हो?" यह प्रश्न बच्चे को स्वयं समाधान खोजने के लिए प्रेरित करता है। इसके अतिरिक्त, डॉ. एमेन ने मानसिक रूप से मजबूत बच्चों के पालन-पोषण के लिए सात मुख्य संवादों पर ज़ोर दिया है, जो सभी आयु वर्ग के बच्चों पर लागू होते हैं, जिनमें चिंता और अवसाद से जूझ रहे युवा भी शामिल हैं।
डॉ. टोवा क्लेन इस विचार का समर्थन करती हैं, यह बताते हुए कि बच्चों को निराशा के अनुभवों से बचाना उनके लचीलेपन के विकास में बाधा डालता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (एपीए) के अनुसार, लचीलापन वह सफल अनुकूलन है जो चुनौतियों के सामने लचीलेपन के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। यह लचीलापन तब बनता है जब बच्चे असफलताओं का सामना करते हैं, लेकिन उन्हें सहानुभूतिपूर्ण समर्थन भी मिलता है।
लचीलापन विकसित करने के लिए कुछ प्रमुख सुरक्षात्मक कारक महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिनमें मजबूत संबंध स्थापित करना, बच्चों को सहायक बनने के लिए प्रोत्साहित करना, और डिजिटल अतिभार के बीच भी दिनचर्या बनाए रखना शामिल है। माता-पिता की सक्रिय भागीदारी बच्चे के व्यक्तित्व, व्यवहार और संज्ञानात्मक क्षमताओं की नींव रखती है, और सहायक पालन-पोषण आत्म-सम्मान और लचीलेपन को बढ़ावा देता है। बच्चों को प्राकृतिक परिणामों का सामना करने और जिम्मेदारी लेने की अनुमति देने से उनमें भविष्य की कठिनाइयों को आत्मविश्वास के साथ संभालने की क्षमता विकसित होती है, जिससे महत्वपूर्ण आंतरिक मुकाबला करने के कौशल का निर्माण होता है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 44 प्रतिशत छात्र तनाव और अवसाद से जूझ रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि बच्चों को स्वतंत्र रूप से समस्याओं से निपटने के लिए सशक्त बनाना आवश्यक है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में चिंता और अवसाद का खतरा दोगुना हो सकता है, क्योंकि बच्चे औसतन प्रतिदिन साढ़े तीन घंटे इन प्लेटफार्मों पर बिताते हैं। इसलिए, बच्चों को अपनी भावनाओं को साझा करने के लिए एक सुरक्षित और प्यार भरा माहौल देना महत्वपूर्ण है, ताकि वे अपनी समस्याओं से अकेले न जूझें।
लचीलापन, जिसे संकट या तनाव की स्थिति से 'वापस लौटने' की क्षमता के रूप में परिभाषित किया गया है, सीखा जा सकता है, जिसका अर्थ है कि हम जीवनकाल में कौशल हासिल कर सकते हैं। यह क्षमता बच्चों को कठिनाई और तनाव से निपटने में मदद करती है, जिससे वे एक मजबूत पीढ़ी का पोषण कर पाते हैं। माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को सही रास्ते पर चलाएं और प्रेम से समझाएं, न कि उनकी गलतियों पर डांटें, क्योंकि बच्चों का पहला विद्यालय उनका घर और पहले शिक्षक उनके माता-पिता होते हैं।
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स्रोतों
Pedijatar.mk
Times of India
Barnard College
Apple Podcasts
American Psychological Association
FADAA: Services Arm of the Florida Behavioral Health Association
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