ऑस्ट्रेलियाई स्टार्टअप कॉर्टिकल लैब्स ने मानव न्यूरॉन्स की मदद से अपने बायो-कंप्यूटर को 'डूम' (Doom) खेलना सिखाया
द्वारा संपादित: Tatyana Hurynovich
ऑस्ट्रेलियाई बायोटेक स्टार्टअप कॉर्टिकल लैब्स ने जैविक कंप्यूटिंग (biological computing) के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर स्थापित किया है। कंपनी ने अपने उन्नत CL-1 प्लेटफॉर्म के माध्यम से वास्तविक समय में अनुकूलन क्षमता और सीखने के कौशल का सफल प्रदर्शन किया है। इस अनूठी प्रणाली में प्रयोगशाला में विकसित मानव न्यूरॉन्स का उपयोग किया गया है, जिसने पहली बार तीन आयामी (3D) वीडियो गेम 'डूम' (DOOM) के जटिल वातावरण के साथ संवाद किया। मार्च 2026 की नवीनतम प्रगति के रूप में देखी जा रही यह उपलब्धि, 2021 के उस शुरुआती प्रयोग का एक विकसित रूप है, जिसमें 'डिशब्रेन' (DishBrain) नामक प्रणाली ने सरल 2D गेम 'पोंग' खेलना सीखा था।
CL-1 प्लेटफॉर्म को कंपनी द्वारा दुनिया के पहले प्रोग्राम करने योग्य जैविक कंप्यूटर के रूप में पेश किया गया है। यह प्रणाली लगभग 200,000 जीवित मानव न्यूरॉन्स पर आधारित है, जिन्हें रक्त की स्टेम कोशिकाओं से तैयार किया गया है और एक हाई-डेंसिटी माइक्रोइलेक्ट्रोड ऐरे (HD-MEA) पर व्यवस्थित किया गया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल डेटा को जैविक संकेतों में अनुवादित करना है। 'डूम' गेम की दृश्य जानकारी को विद्युत उत्तेजना के विशिष्ट पैटर्न में बदला जाता है, जिसे सीधे न्यूरॉन्स तक पहुँचाया जाता है। इसके जवाब में, कोशिकाओं द्वारा उत्पन्न प्रतिक्रियाओं को गेम के भीतर नेविगेशन, दुश्मनों की पहचान और शूटिंग जैसे कार्यों के रूप में डिकोड किया जाता है। मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी ब्रेट कैगन के नेतृत्व में, शोधकर्ताओं ने एक संरचित फीडबैक सिस्टम लागू किया, जहाँ सटीक क्रियाओं के लिए व्यवस्थित संकेत और त्रुटियों के लिए अनियमित संकेत दिए गए, जिससे जैविक प्रणाली को सीखने के लिए प्रोत्साहन मिला।
सॉफ्टवेयर और जैविक हार्डवेयर के बीच इस जटिल समन्वय को एक स्वतंत्र डेवलपर शॉन कोल ने और भी सुलभ बना दिया है। उन्होंने कंपनी के प्रोप्राइटरी ऑपरेटिंग सिस्टम और पायथन एपीआई (Python API) का उपयोग करते हुए मात्र एक सप्ताह के भीतर सिस्टम को 'डूम' खेलने के लिए प्रोग्राम करने में सफलता प्राप्त की। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भविष्य में जैविक प्रणालियों और पारंपरिक कोडिंग के बीच की दूरी को कम किया जा सकता है। हालांकि, कॉर्टिकल लैब्स का मानना है कि वर्तमान में इन न्यूरॉन्स का प्रदर्शन अभी शुरुआती स्तर पर है। ये कोशिकाएं एक नौसिखिए खिलाड़ी की तरह व्यवहार करती हैं, जिनमें अभी तक वह स्थानिक स्मृति (spatial memory) या रणनीतिक कौशल विकसित नहीं हुआ है जो खेल के कठिन स्तरों को पार करने के लिए आवश्यक होता है।
कॉर्टिकल लैब्स के सीईओ होंग वेन चोंग के अनुसार, CL-1 का लक्ष्य पारंपरिक सिलिकॉन-आधारित प्रोसेसर को प्रतिस्थापित करना नहीं है। इसके बजाय, यह तकनीक उन विशेष एआई प्रणालियों के लिए विकसित की जा रही है जहाँ कम ऊर्जा खपत और वास्तविक समय में प्रतिक्रिया देना अनिवार्य है, जैसे कि उन्नत ड्रोन और स्वायत्त रोबोट। यह पहल वैश्विक स्तर पर एआई क्षेत्र में बढ़ रहे ऊर्जा संकट का एक प्रभावी समाधान पेश करती है। ऊर्जा दक्षता इस बायो-कंप्यूटिंग तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है; CL-1 का प्रत्येक ब्लॉक केवल 30 वॉट बिजली की खपत करता है। यह मात्रा एक आधुनिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) द्वारा उपयोग की जाने वाली बिजली की तुलना में नगण्य है, जो इसे भविष्य की हरित तकनीक का एक मजबूत दावेदार बनाती है।
व्यावसायिक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, मेलबर्न स्थित इस स्टार्टअप ने अपने पहले 'बायोसेंटर डेटा सेंटर' प्रोटोटाइप के लॉन्च की घोषणा की है, जिसमें 120 CL-1 इकाइयां शामिल की गई हैं। इसके साथ ही, कंपनी ने 'डे-वन' (DayOne) फर्म के साथ मिलकर सिंगापुर में एक विशाल केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के योंग लू लिन स्कूल ऑफ मेडिसिन के सहयोग से तैयार किया जा रहा यह प्रोजेक्ट ऑस्ट्रेलिया के बाहर कंपनी की पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्थापना होगी। इस केंद्र में विभिन्न चरणों में 1,000 तक CL-1 ब्लॉक स्थापित किए जाने की उम्मीद है, जो 'वेट-वेयर' (wet-ware) कंप्यूटिंग को बड़े पैमाने पर परखने के लिए एक वैश्विक परीक्षण केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
2019 में अपनी स्थापना के बाद से ही कॉर्टिकल लैब्स ने वैज्ञानिक जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। विशेष रूप से 2022 में 'डिशब्रेन' के प्रयोगों ने न्यूरॉन्स के उपयोग को लेकर व्यापक नैतिक चर्चाओं को जन्म दिया था। वर्तमान में, कंपनी 'कॉर्टिकल क्लाउड' (Cortical Cloud) नामक अपनी क्लाउड सेवा के माध्यम से दुनिया भर के शोधकर्ताओं को इस अनूठे प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्रदान कर रही है। यह सेवा वैज्ञानिकों और डेवलपर्स को दूरस्थ रूप से जीवित न्यूरल नेटवर्क के साथ प्रयोग करने और जैविक बुद्धिमत्ता की नई सीमाओं को खोजने का अवसर देती है, जो भविष्य की कंप्यूटिंग तकनीक में एक नए युग की शुरुआत कर सकती है।
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स्रोतों
Journal du Geek
Gizmodo
Tom's Hardware
Cortical Labs
PC Gamer
Military.com
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