कैसे Carol of the Bells यूक्रेनी लोकगीत के रूप में शुरू हुआ | REUTERS
भारत में ऑस्ट्रिया-यूक्रेन सांस्कृतिक संवाद: 2025–2030 कार्यक्रम के तहत संगीत का संगम
द्वारा संपादित: Inna Horoshkina One
ऑस्ट्रिया और यूक्रेन ने मिलकर 2025 से 2030 तक की अवधि के लिए अपनी सांस्कृतिक साझेदारी को औपचारिक रूप दिया है। इस सहयोग को नई दिल्ली में एक जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जो संगीत, साहित्य और संवाद मंचों को एक साथ लाता है। यह पहल कला की स्वतंत्रता को केवल एक नारे के बजाय आदान-प्रदान के एक व्यावहारिक अभ्यास के रूप में स्थापित करती है।
इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान की शुरुआत एक समय-उपयुक्त और सटीक सूत्र के साथ हुई। वियना के जैज़ युगल, माइकला राबिट्श (Michaela Rabitsch) और रॉबर्ट पावलिक (Robert Pawlik) ने यूक्रेनी संगीतकार और नृवंश-संगीत विज्ञानी डॉ. तारस फिलेनको (Dr. Taras Filenko) के साथ मिलकर प्रस्तुति दी। इस संगम के केंद्र में लियोन्तोविच का प्रसिद्ध गीत 'शेड्रिक' था। यह गीत अब केवल एक 'क्रिसमस हिट' के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक कोड के रूप में प्रस्तुत हुआ, जो अपना मूल स्वरूप बनाए रखते हुए भी रूप बदलने की क्षमता रखता है।
यह कार्यक्रम केवल एक बार का आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस परियोजना का संचालन नई दिल्ली स्थित ऑस्ट्रियाई सांस्कृतिक मंच (Austrian Cultural Forum New Delhi) द्वारा किया जा रहा है। इसमें 2026 में निवास (residencies) सहित आगे की गतिविधियों की योजना शामिल है। यह स्पष्ट करता है कि यह सहयोग किसी सांकेतिक शाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सहयोग की एक लंबी लहर है जो भविष्य में भी जारी रहेगी।
इस तरह के संयुक्त प्रयासों से वैश्विक मंच पर क्या नया आयाम जुड़ता है? यह दुनिया के संगीत में एक कोमल, किंतु दृढ़ स्वर जोड़ता है। यह वह स्थिति है जहाँ विभिन्न परंपराएं एक-दूसरे को 'मिलाने' के बजाय, वास्तव में एक-दूसरे को सुनती हैं। इस आपसी श्रवण से स्वतंत्रता का एक नया साझा राग उत्पन्न होता है। यह भारतीय दर्शकों के लिए एक अनूठा अनुभव है, जहाँ यूरोपीय शास्त्रीय और लोक संगीत की धाराएँ एक साथ बहती हैं।
नई दिल्ली में इस तरह के आयोजन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने का एक सांस्कृतिक माध्यम प्रदान करता है। संगीत की सार्वभौमिक भाषा सीमाओं को पार करने में सहायक होती है। डॉ. फिलेनको जैसे विद्वानों की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि लोक संगीत की जड़ें और अकादमिक गहराई दोनों ही इस आदान-प्रदान का हिस्सा बनें। यह सहयोग कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर देता है, जो वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है।
सांस्कृतिक कूटनीति के इस नए अध्याय में, ऑस्ट्रिया और यूक्रेन दोनों ही यह दर्शा रहे हैं कि कलात्मक साझेदारी कैसे जटिल भू-राजनीतिक माहौल में भी सद्भाव और समझ का सेतु बन सकती है। 2025 से 2030 तक की यह अवधि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों की नींव रखेगी, जिसका प्रभाव केवल संगीत तक सीमित न रहकर साहित्य और अन्य कला रूपों तक भी फैलेगा। यह एक ऐसी साझेदारी है जो साझा मूल्यों और रचनात्मकता के माध्यम से भविष्य को आकार देने का प्रयास कर रही है।
स्रोतों
NewsDrum
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Welcome to National Book Trust of India - New Delhi World Book Fair 2025
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