वसंत-ग्रीष्म 2026 फैशन सीजन में दुबलेपन के मानकों की वापसी: एक विश्लेषण

द्वारा संपादित: Katerina S.

हाल ही में संपन्न हुए वसंत-ग्रीष्म 2026 के फैशन सीजन के विश्लेषण ने वैश्विक रैंप पर मॉडलों के प्रतिनिधित्व के बदलते मानकों को उजागर किया है। लगभग 198 फैशन शो के गहन अध्ययन से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि प्रदर्शित किए गए 97.1 प्रतिशत परिधान 'अत्यधिक दुबली' मॉडलों द्वारा पहने गए थे, जो अमेरिकी साइज US 0–4 की श्रेणी में आते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव 1990 के दशक के 'हेरोइन चिक' सौंदर्यशास्त्र के पुनरुद्धार का संकेत है, जो पिछले कुछ वर्षों में बॉडी-इंक्लूसिविटी यानी शारीरिक समावेशिता की दिशा में हुई प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो, वर्ष 2024 के दौरान हुए 230 शो में केवल 0.8 प्रतिशत परिधान ही XL या उससे बड़े साइज की मॉडलों द्वारा प्रदर्शित किए गए थे, जबकि 95.5 प्रतिशत हिस्सेदारी छोटे साइज (XXS-S) की थी। वोग नीदरलैंड्स की पूर्व संपादक, एलीज सिचेक (Yeliz Cicek) ने भी हालिया प्रस्तुतियों के दौरान 38 या उससे बड़े साइज की मॉडलों की लगभग पूर्ण अनुपस्थिति पर चिंता व्यक्त की है। विविधता के प्रति उद्योग की यह पीछे हटती सोच समावेशी प्रथाओं के प्रति उसकी वास्तविक प्रतिबद्धता को संदिग्ध बनाती है।

इस प्रतिगामी प्रवृत्ति के पीछे विशेषज्ञ कई प्रमुख कारकों को जिम्मेदार मानते हैं, जिनमें उद्योग का बढ़ता दबाव और विलासितापूर्ण जीवनशैली का प्रदर्शन शामिल है। इसके अलावा, वजन घटाने वाली दवाओं, विशेष रूप से सेमाग्लूटाइड-आधारित दवाओं की बढ़ती उपलब्धता ने भी इस प्रवृत्ति को हवा दी है। मूल रूप से टाइप 2 मधुमेह के इलाज के लिए विकसित ये दवाएं अब तेजी से वजन कम करने के साधन के रूप में लोकप्रिय हो गई हैं, जिसका प्रभाव अमेरिका और यूरोप के लगभग 7 प्रतिशत वयस्कों पर देखा जा रहा है।

इस घटना को अनौपचारिक रूप से 'ओज़ेम्पिक चिक' का नाम दिया गया है, और इसका असर अब खुदरा व्यापार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उदाहरण के लिए, लंदन में दर्जी अब व्यावसायिक सूटों को छोटा और फिट करने के ऑर्डर में भारी वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। यह चलन दर्शाता है कि कैसे चिकित्सा क्षेत्र के बदलाव फैशन और व्यक्तिगत शैली को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे बाजार में नए प्रकार की मांग पैदा हो रही है।

'हेरोइन चिक' का सौंदर्यशास्त्र, जिसकी पहचान कभी केट मॉस (Kate Moss) और उनकी विशिष्ट काया थी, 1980 के दशक के ग्लैमर के विपरीत एक अलग छवि को बढ़ावा देता था। यह शैली, जो अपने पीलेपन और अत्यधिक दुबलेपन के लिए जानी जाती है, एक बार फिर फैशन और सामाजिक समस्याओं के बीच के संबंधों को उजागर कर रही है। यह सौंदर्य बोध समाज में सुंदरता और स्वास्थ्य की धारणाओं को भी गहराई से प्रभावित करता है।

अंत में, बाल रोग विशेषज्ञों ने भी इन अवास्तविक दृश्य मानकों के प्रति गहरी चिंता जताई है, क्योंकि इनका युवा पीढ़ी के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जहाँ एक ओर उद्योग ने समावेशिता का दावा किया था, वहीं आंकड़ों में आई यह गिरावट दर्शाती है कि व्यावसायिक हितों और पुराने सौंदर्य मानकों का प्रभाव अभी भी काफी गहरा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या फैशन जगत अपनी इस दिशा को बदलेगा या फिर दुबलेपन की यह पुरानी लहर एक बार फिर मुख्यधारा पर हावी रहेगी।

4 दृश्य

स्रोतों

  • EenVandaag

  • Oh Em Gee Blog

  • Fashion United

  • EenVandaag

  • NU.nl

  • FashionUnited

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