शैरन स्टोन की वकालत: अवास्तविक युवा आदर्शों को त्यागकर वर्तमान आयु को स्वीकारें

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

प्रसिद्ध हस्ती शैरन स्टोन ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि व्यक्तियों को उन अवास्तविक युवा आदर्शों का पीछा करने के बजाय अपनी वर्तमान आयु को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए जो प्राप्त करना असंभव हैं। स्टोन ने इस विचार को दृढ़ता से खारिज किया है कि सुंदरता या आकर्षण केवल यौवन से ही जुड़ा हुआ है, एक ऐसा दृष्टिकोण जो अक्सर मीडिया और समाज में प्रचलित होता है। स्टोन का दृढ़ मत है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के किसी भी चरण में स्वयं का सर्वश्रेष्ठ संस्करण बनने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो आत्म-मूल्य और व्यक्तिगत उत्कृष्टता को शाश्वत युवावस्था की खोज से ऊपर रखता है।

यह दर्शन जीवन के विभिन्न पड़ावों में सार्थक प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक प्रेरणादायक ढाँचा प्रदान करता है। यह दृष्टिकोण समकालीन समाज में प्रचलित 'एंटी-एजिंग' उत्पादों के अत्यधिक चलन के विपरीत है, जिनके बारे में कुछ विचारकों का मानना है कि वे उम्र बढ़ने को स्वीकार करने की क्षमता को कम कर सकते हैं। जबकि कुछ लोग इन उत्पादों को सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक मानते हैं, अन्य लोग तर्क देते हैं कि अत्यधिक ध्यान केंद्रित करने से ज्ञान और अनुभव जैसे उम्र बढ़ने के सकारात्मक पहलुओं की अनदेखी हो सकती है।

सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रयान फर्नांडो जैसे विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ हस्तियाँ अपनी उम्र से कम दिखने के लिए आनुवंशिक परीक्षण और माइक्रोबायोम परीक्षण पर आधारित दीर्घायु आहार का पालन करती हैं, जिसमें मुख्य रूप से चीनी और वसा का प्रतिबंध शामिल होता है। यह दर्शाता है कि बाहरी रूप को बनाए रखने के लिए उद्योग में एक समानांतर प्रयास मौजूद है, भले ही स्टोन का संदेश आंतरिक स्वीकृति पर केंद्रित हो। शैरन स्टोन का यह दृष्टिकोण उस व्यापक सांस्कृतिक दबाव से अलग है जो अक्सर हॉलीवुड में अभिनेताओं पर पड़ता है, जहाँ युवा दिखना करियर के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर मुख्य भूमिकाओं के लिए।

कुछ हस्तियाँ, जैसे कि अनिल कपूर, अपनी आयु के बावजूद लगातार युवा दिखते हैं, जिसका श्रेय अक्सर गहन शारीरिक गतिविधियों, विशेष आहार और सौंदर्य उपचारों को दिया जाता है। इसके विपरीत, कई अन्य हस्तियाँ, जैसे कि जूलियन मूर, हॉलीवुड में महिलाओं के खिलाफ उम्रवाद पर टिप्पणी करती रही हैं, जो इस बात को रेखांकित करता है कि उम्र बढ़ने को लेकर एक आंतरिक और बाहरी संघर्ष मौजूद है। स्टोन का संदेश इस धारणा को चुनौती देता है कि बाहरी रखरखाव ही एकमात्र मार्ग है, और इसके बजाय आंतरिक विकास को प्राथमिकता देता है।

जीवन के उत्तरार्ध में, उम्र बढ़ने के साथ ज्ञान और अनुभव का संचय होता है, जो जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा सकता है, बशर्ते व्यक्ति ने आवश्यक तैयारी की हो। 70 वर्षीय लेखिका उषा जेसुदासन ने अकेलेपन को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से नए दोस्त बनाए और दूसरों की देखभाल में समय लगाया, जिससे यह सिद्ध होता है कि जीवन के चरण बदलने पर भी उद्देश्य पाया जा सकता है। कुछ लोग मानते हैं कि उम्र बढ़ने के लाभों में खुद को जानना और अपनी त्वचा में सहज होना शामिल है, साथ ही लोगों को प्रभावित करने की चिंता कम होना एक प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान करता है।

शैरन स्टोन का दर्शन, जो व्यक्तिगत उत्कृष्टता और आत्म-स्वीकृति पर केंद्रित है, इन अनुभवों के साथ मेल खाता है, जो यह दर्शाता है कि उम्र केवल एक संख्या है, लेकिन जीवन के प्रति दृष्टिकोण हमारी संतुष्टि को निर्धारित करता है। यह दृष्टिकोण, जो आंतरिक विकास को महत्व देता है, जीवन के हर चरण में सार्थकता और पूर्णता की ओर ले जाता है, जो शाश्वत युवावस्था के भ्रम से कहीं अधिक स्थायी है। माता अमृतानंदमयी देवी, जिनका जन्म 27 सितंबर 1953 को हुआ था, मानवतावादी गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध हैं, और उनका दर्शन दूसरों के दुःख को दूर करने में खुशी खोजने पर आधारित है। हालाँकि उनका कार्य सीधे तौर पर शैरन स्टोन के सौंदर्य संबंधी विचारों से संबंधित नहीं है, लेकिन उनका जीवन दूसरों की सेवा के माध्यम से व्यक्तिगत उद्देश्य की पूर्ति का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो स्टोन के 'सर्वश्रेष्ठ संस्करण' बनने के विचार के साथ एक उच्च स्तर पर प्रतिध्वनित होता है—चाहे वह आत्म-स्वीकृति के माध्यम से हो या निस्वार्थ सेवा के माध्यम से। यह व्यापक दृष्टिकोण जीवन के सभी चरणों में सार्थक योगदान के महत्व को स्थापित करता है, जो केवल बाहरी दिखावे से परे है।

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स्रोतों

  • Economic Times

  • Alamy

  • HELLO! Magazine

  • Wikipedia

  • The Economic Times

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