दीर्घायु और बेहतर स्वास्थ्य के लिए रात में गुनगुने स्नान की वैज्ञानिक अनुशंसा

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

वैज्ञानिक सहमति इस बात की पुष्टि करती है कि सोने से एक से दो घंटे पहले प्रतिदिन गुनगुने पानी से स्नान या शॉवर लेना दीर्घायु और समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए एक सरल किंतु प्रभावी दैनिक क्रिया है। यह अभ्यास शरीर विज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग करके विश्राम को बढ़ावा देता है, जिससे नींद की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। हृदय रोग विशेषज्ञ ऑरेलियो रोजास इस पद्धति पर जोर देते हैं, क्योंकि यह मानव शरीर की आंतरिक प्रक्रियाओं का लाभ उठाती है ताकि नींद की गुणवत्ता को अनुकूलित किया जा सके।

इस प्रक्रिया का मूल तंत्र गर्म पानी के संपर्क में आने के बाद त्वचा की रक्त वाहिकाओं का फैलाव है, जिसके लिए अनुशंसित तापमान सीमा 40 से 42.5 डिग्री सेल्सियस के बीच बताई गई है। यह वासोडिलेशन शरीर की गर्मी को बाहर निकालने में सहायता करता है, जिससे शरीर के मुख्य तापमान में आवश्यक गिरावट आती है। यह तापमान में कमी मस्तिष्क को मेलाटोनिन नामक प्रमुख हार्मोन जारी करने का संकेत देती है, जो नींद-जागने के चक्र को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। व्यवस्थित समीक्षाओं ने इस विशिष्ट समय-निर्धारण की पुष्टि की है, जिससे नींद आने में लगने वाला समय कम होता है, नींद की दक्षता में सुधार होता है, और व्यक्तिपरक नींद की गुणवत्ता बढ़ती है।

कुछ शोध बताते हैं कि गर्म पानी से नहाने से हृदय स्वास्थ्य भी दुरुस्त रहता है और उच्च रक्तचाप की समस्या से भी निजात मिल सकती है। बेहतर नींद सीधे तौर पर मूर्त दीर्घायु लाभों से जुड़ी हुई है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली का सुदृढ़ीकरण, शरीर में सूजन में कमी, और संभावित रूप से कोशिकीय उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में धीमी गति शामिल है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सर्वोत्तम परिणामों के लिए, स्नान या शॉवर बिस्तर पर जाने से लगभग 90 मिनट पहले लिया जाना चाहिए ताकि शरीर को धीरे-धीरे ठंडा होने का पर्याप्त समय मिल सके। यह प्रोटोकॉल समग्र स्वास्थ्य परिणामों का समर्थन करता है, जिससे पुरानी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।

कानपुर के लोहिया आरोग्य अस्पताल के डॉ. शैलेंद्र मिश्रा के अनुसार, रात में सोने से एक से दो घंटे पहले नहाने से दिनभर की थकान दूर होती है और शरीर विश्राम की स्थिति में आ जाता है। इसके अतिरिक्त, रात में स्नान करने से दिन भर शरीर पर जमा हुए कीटाणु और संक्रमण दूर होते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा कम होता है। यह अभ्यास शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए उत्तम माना गया है।

हालांकि, सावधानी बरतना भी आवश्यक है; बहुत अधिक गर्म पानी त्वचा को शुष्क कर सकता है और जलन पैदा कर सकता है, क्योंकि गर्म पानी रक्त वाहिकाओं को फैलाता है, जिससे त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मत है कि यदि पानी का तापमान बहुत अधिक हो, तो जलने का जोखिम रहता है, और 38 से 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान से बचना चाहिए। पानी हवा की तुलना में गर्मी को बेहतर तरीके से स्थानांतरित करता है, इसलिए 40 डिग्री सेल्सियस का पानी भी अलग महसूस हो सकता है। यह दैनिक अनुष्ठान तनाव को कम करने में भी सहायक सिद्ध होता है; दिन भर के काम और तनाव के बाद, सोने से कुछ घंटे पहले स्नान करने से चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। त्वचा के दृष्टिकोण से, रात में स्नान करने से त्वचा साफ और स्पष्ट होती है, जिससे मुंहासे और एक्जिमा जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है, और त्वचा स्वस्थ तथा चमकदार बनती है। यह संपूर्ण स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक सुविचारित कदम है, जो वैज्ञानिक आधार पर समर्थित है।

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स्रोतों

  • El Periódico Mediterráneo

  • Vanitatis

  • El Confidencial

  • PubMed

  • HOLA

  • elEconomista.es

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