
अंडे
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लेखक: Svetlana Velhush

अंडे
मार्च 2026 में, UPF (अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स) शब्द केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में उभर कर सामने आया है। इस महीने पेश की गई विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक वैश्विक रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि हम एक 'मौन महामारी' के बीच में हैं। यह महामारी उन उत्पादों के कारण फैली है जो संरचनात्मक रूप से भोजन की तुलना में औद्योगिक वस्तुओं के अधिक समान हैं। वैज्ञानिकों की मुख्य चिंता केवल चीनी और नमक की अधिकता नहीं है, बल्कि भोजन की 'खाद्य मैट्रिक्स' का पूरी तरह से नष्ट होना है।
गहरी प्रसंस्करण और एक्सट्रूज़न जैसी तकनीकें भोजन को इतना सुपाच्य बना देती हैं कि वे शरीर की प्राकृतिक तृप्ति प्रणालियों को दरकिनार कर देती हैं। इसके परिणामस्वरूप, मस्तिष्क में डोपामाइन की लत लग जाती है, जिससे लोग इन उत्पादों को बार-बार खाने के लिए मजबूर होते हैं। शोध बताते हैं कि यह प्रक्रिया प्राकृतिक भूख को खत्म कर देती है और मोटापे के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों का मार्ग प्रशस्त करती है।
समस्या की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मार्च 2026 तक विकसित देशों में दैनिक आहार का 60% हिस्सा UPF बन चुका है। नए वैज्ञानिक शोधों ने अब स्पष्ट रूप से UPF को 30 से अधिक नकारात्मक स्वास्थ्य परिणामों से जोड़ा है। इनमें बांझपन, टाइप 2 मधुमेह और संज्ञानात्मक विकार जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं, जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं।
बढ़ते स्वास्थ्य संकट को देखते हुए सरकारों ने अब कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने 'जंक फूड' के विज्ञापनों पर रात 9:00 बजे (watershed 21:00) के बाद ही अनुमति देने जैसे सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा, उत्पादों पर प्रसंस्करण के स्तर की अनिवार्य लेबलिंग लागू की गई है। पिछले छह महीनों में 'UPF की पहचान कैसे करें' और 'UPF-मुक्त ब्रांड' जैसे सर्च कीवर्ड्स में 400% की भारी वृद्धि देखी गई है, जो जनता की बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
जनवरी 2026 से ब्रिटेन में EPR (विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व) नियम प्रभावी हो गए हैं। ये नियम उन निर्माताओं पर भारी जुर्माना लगाते हैं जो जटिल और गैर-पुनर्चक्रण योग्य पैकेजिंग का उपयोग करते हैं, जो आमतौर पर UPF उत्पादों में देखी जाती है। इसी तरह, अमेरिका में 'मेक अवर चिल्ड्रन हेल्दी अगेन' (MAHA) रणनीति के तहत थैलेट्स और BHA जैसे खाद्य योजकों की सुरक्षा की व्यापक समीक्षा शुरू की गई है, जिन्हें दशकों से सुरक्षित माना जा रहा था।
खाद्य उद्योग अब 'क्लीन लेबल' तकनीकों के माध्यम से इस चुनौती का जवाब दे रहा है। रासायनिक पायसीकारी (emulsifiers) के स्थान पर, नए स्टार्टअप अब प्रिसिजन फर्मेंटेशन और फाइबर की 'क्रायो-स्ट्रक्चरिंग' जैसी उन्नत विधियों का उपयोग कर रहे हैं। इससे ऐसे तैयार भोजन (ready meals) बनाए जा रहे हैं जिनकी शेल्फ-लाइफ लंबी है, लेकिन उनमें केवल सब्जियां, अनाज और प्राकृतिक प्रोटीन जैसे पारदर्शी तत्व ही शामिल होते हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 एक ऐसा मोड़ साबित होगा जहाँ उपभोक्ता कैलोरी के बजाय तकनीकी श्रृंखला की 'पारदर्शिता' के आधार पर उत्पादों का चुनाव करेंगे। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन को बदलने की मुख्य रणनीति NOVA वर्गीकरण के समूह 1-3 की ओर बढ़ना है। इसमें असंसाधित या न्यूनतम संसाधित खाद्य पदार्थ और पारंपरिक रूप से घर पर तैयार किए गए व्यंजन शामिल हैं।
दैनिक जीवन में बदलाव के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव इस प्रकार हैं:
कुछ सरल प्रतिस्थापन भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। उदाहरण के लिए, मीठे योगर्ट की जगह प्राकृतिक ग्रीक योगर्ट और ताजी बेरीज का उपयोग करें। सॉसेज या प्रोसेस्ड मीट के बजाय घर के बने कबाब या साबुत मांस का उपयोग करना बेहतर है। साथ ही, औद्योगिक रूप से निर्मित ब्रेड के स्थान पर खमीर (sourdough) वाली पारंपरिक ब्रेड को अपनाएं और तैयार सॉस के बजाय जैतून का तेल, मसाले और नींबू का उपयोग करें।
2026 के प्रमुख रुझानों में 'फाइबर-मैक्सिंग' और प्राकृतिक रूप से किण्वित (fermented) उत्पादों जैसे कि किमची और केफिर की मांग में भारी वृद्धि देखी जा रही है। कई निर्माता अब अपने उत्पादों से अनावश्यक रसायनों को हटाकर उन्हें फिर से तैयार कर रहे हैं। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि सभी संसाधित खाद्य पदार्थ समान रूप से हानिकारक नहीं होते; मुख्य लक्ष्य विशेष रूप से 'अल्ट्रा-प्रोसेस्ड' श्रेणी को कम करना है।
अंततः, कम संसाधित भोजन की ओर बढ़ना कोई कठिन डाइट प्लान नहीं है, बल्कि यह असली भोजन पकाने के बुनियादी सिद्धांतों की ओर एक वापसी है। इसे आज के समय में बिना किसी सख्त कानूनी प्रतिबंध के जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक माना जा रहा है। असली और प्राकृतिक सामग्री से बना भोजन ही भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा की कुंजी है।
World Health Organization (WHO) — глобальный отчет о влиянии степени обработки пищи на неинфекционные заболевания (NCDs)
British Medical Journal (BMJ) — мета-анализ 2025-2026 гг., связывающий UPF с рисками для 30+ систем организма