अफगानिस्तान के विश्वविद्यालयों से 679 किताबें हटाई गईं: तालिबान का वैचारिक शुद्धि अभियान

द्वारा संपादित: Татьяна Гуринович

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने देश के विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्रणाली को बदलने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दिसंबर 2023 में, उच्च शिक्षा मंत्रालय ने देश भर के विश्वविद्यालयों से 679 किताबों को हटाने और प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई कानून, सामाजिक विज्ञान, शरिया, पत्रकारिता, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावित करती है। इस कदम को अफगानिस्तान की शिक्षा प्रणाली में वैचारिक और सामाजिक "शुद्धि" के व्यापक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्रालय ने उन पुस्तकों को हटाने का निर्देश दिया है जो "हनाफी न्यायशास्त्र, विचारधारा, शरिया, पत्रकारिता, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र" के विपरीत मानी जाती हैं। इसमें अफगान कानून के मूल सिद्धांत, महिलाओं के अधिकार, लोकतंत्र और सार्वजनिक संबंधों में महिलाओं की भूमिका से संबंधित पुस्तकें, साथ ही ऐतिहासिक ग्रंथ, नैतिकता और पाप व अनैतिकता के कारणों पर पुस्तकें भी शामिल हैं। ये पुस्तकें कथित तौर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई या संदर्भ के रूप में उपयोग की जा रही थीं।

काबुल विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ सलाहकार, नासिर अल-अल्लाह स्टेनकज़ई ने कहा कि इन पुस्तकों को हटाने का कारण यह है कि "उनके लिए कोई विकल्प नहीं है"। वहीं, काबुल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर फियाज़ुल्लाह जलाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तालिबान के ये कार्य "अफगानिस्तान के छात्रों को सौ साल पीछे ले जाएंगे"। यह स्थिति अफगानिस्तान में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और विविधता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, साथ ही देश के बौद्धिक और सामाजिक विकास पर दीर्घकालिक असर डाल सकती है।

यह कदम तालिबान द्वारा शिक्षा प्रणाली पर वैचारिक नियंत्रण बनाए रखने की चल रही प्रवृत्ति को दर्शाता है। दिसंबर 2023 में, उच्च शिक्षा मंत्रालय ने पहले भी विश्वविद्यालयों से "हनाफी न्यायशास्त्र" के विपरीत पुस्तकों और "वैचारिक" पुस्तकों को हटाने और उनके स्थान पर "सिरात नबावी" (पैगंबर की जीवनी) पर पुस्तकें शामिल करने का अनुरोध किया था। यह वर्तमान कार्रवाई उसी नीति का विस्तार है, जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान में उच्च शिक्षा की सामग्री को नियंत्रित करना और निर्देशित करना है।

ऐतिहासिक रूप से, तालिबान ने शिक्षा प्रणाली को "इस्लामीकरण" और "वैचारिकरण" करने का प्रयास किया है, जिसमें मानवाधिकारों, महिलाओं के अधिकारों और लोकतंत्र से संबंधित सामग्री को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। यह अफगानिस्तान के युवाओं के बौद्धिक विकास और राष्ट्र के भविष्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। इस प्रकार के प्रतिबंध अकादमिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और सामाजिक विकास पर दूरगामी प्रभाव डालते हैं, जिससे देश की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है।

स्रोतों

  • Deutsche Welle

  • روزنامه ۸صبح

  • BBC News فارسی

  • روزنامه ۸صبح

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