फ्रांस में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की घोषणा: सरकार के वित्तीय संकट के बीच एकजुटता का आह्वान

द्वारा संपादित: Татьяна Гуринович

फ्रांस की ट्रेड यूनियनें 18 सितंबर, 2025 को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और हड़ताल के लिए एकजुट हो रही हैं। यह महत्वपूर्ण कदम सरकार द्वारा 2026 के लिए प्रस्तावित कड़े वित्तीय उपायों के विरोध में उठाया गया है। प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरो की अल्पमत सरकार 8 सितंबर को एक विश्वास मत का सामना करेगी, जिससे देश में राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया है।

फ्रांस के प्रमुख ट्रेड यूनियन, जिनमें सबसे बड़ा सीएफडीटी (CFDT) भी शामिल है, ने 18 सितंबर, 2025 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का आह्वान किया है। यह कार्रवाई सरकार की 2026 के लिए प्रस्तावित वित्तीय योजनाओं के प्रति एक स्पष्ट असहमति को दर्शाती है। सीएफडीटी की प्रमुख मैरीलीज लियोन ने सरकार के मसौदा बजट को "भय का घर" बताते हुए इसे पूरी तरह से रद्द करने की यूनियनों की दृढ़ इच्छाशक्ति व्यक्त की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बजट में प्रस्तावित विभिन्न उपाय "अभूतपूर्व क्रूरता" वाले हैं। सीजीटी (CGT) यूनियन की प्रमुख सोफी बिनेट ने भी कहा कि सरकार को "सामाजिक मांगों" पर ध्यान देने के लिए सड़कों पर उतरना आवश्यक है। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के यूनियन ने भी बेहतर वेतन और कार्य परिस्थितियों के समर्थन में 18 सितंबर को हड़ताल का आह्वान किया है। इसके अतिरिक्त, 10 सितंबर को "सब कुछ ब्लॉक करो" (Let's Block Everything) नामक एक अलग नागरिक अभियान के तहत भी विरोध प्रदर्शन निर्धारित हैं, जिनकी तुलना 2018 के "येलो वेस्ट" आंदोलन से की जा रही है, जो जनता के असंतोष की गहराई को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरो की अल्पमत सरकार 8 सितंबर को एक विश्वास मत का सामना करेगी, जिसके हारने की प्रबल संभावना है। बायरो की सरकार को वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से व्यापक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जो उनके €44 बिलियन की बजट कटौती योजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं। यह विश्वास मत, जिसे बायरो ने स्वयं पेश किया है, सरकार को राजनीतिक संकट से निकालने के बजाय उसे और गहराता दिख रहा है, क्योंकि अधिकांश विपक्षी दल उनके खिलाफ मतदान करने का इरादा रखते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक सहमति का अभाव राष्ट्र को अनिश्चितता की ओर धकेल सकता है।

फ्रांस एक गंभीर वित्तीय चुनौती का सामना कर रहा है, जहाँ सार्वजनिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 113% से अधिक हो गया है। सरकार का लक्ष्य 2026 तक राजकोषीय घाटे को 4.6% तक लाना है, जो यूरोपीय संघ के 3% की सीमा के अनुरूप है। हालांकि, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रस्तावित उपाय, जैसे कि दो सार्वजनिक अवकाशों को समाप्त करना और सरकारी खर्चों में वृद्धि को फ्रीज करना, जनता के बीच व्यापक रूप से अलोकप्रिय हैं। प्रधानमंत्री बायरो की व्यक्तिगत लोकप्रियता भी कम है, और उनकी अल्पमत सरकार को संसद में आवश्यक समर्थन जुटाने में लगातार कठिनाई हो रही है। 2018 के "येलो वेस्ट" आंदोलन की यादें अभी भी ताज़ा हैं, जिसने बड़े पैमाने पर सामाजिक अशांति और सरकार पर दबाव बनाने की जनता की क्षमता का प्रदर्शन किया था। वर्तमान विरोध प्रदर्शनों की तुलना भी उसी आंदोलन से की जा रही है, जो दर्शाता है कि जनता का असंतोष एक बार फिर सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद कर सकता है।

इस राजनीतिक अस्थिरता का फ्रांसीसी अर्थव्यवस्था पर गहरा और व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है। व्यापारिक नेताओं ने चिंता व्यक्त की है कि अनिश्चितता के माहौल में उपभोक्ता खर्च में कमी आ सकती है और व्यावसायिक निवेश प्रभावित हो सकता है। कैरफोर (Carrefour) जैसी प्रमुख खुदरा श्रृंखलाओं के सीईओ एलेक्जेंडर बोम्पार्ड ने इस बात पर जोर दिया है कि अनिश्चितता उपभोक्ताओं को खर्च टालने पर मजबूर करती है, जिससे अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचता है। वहीं, फ्रांसीसी नियोक्ता संगठन मेडएफ (Medef) के प्रमुख पैट्रिक मार्टिन ने नेताओं की मतभेदों को दूर करने में असमर्थता की आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि "जो लोग अर्थव्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं, वे हमें भारी जोखिम में डाल रहे हैं।" वित्तीय बाजारों में भी इस स्थिति की प्रतिक्रिया देखी जा रही है; फ्रांसीसी स्टॉक इंडेक्स (CAC 40) में गिरावट आई है और सरकारी बॉन्ड यील्ड (सरकारी ऋण पर ब्याज दर) बढ़ रही है, जो निवेशकों के बीच जोखिम की बढ़ती धारणा को दर्शाता है। जर्मन वित्तीय सेवा फर्म बेरेनबर्ग (Berenberg) के अर्थशास्त्री सोलोमन फीडलर के अनुसार, प्रधानमंत्री बायरो के विश्वास मत हारने का उच्च जोखिम है, क्योंकि उनकी सरकार के पास बहुमत नहीं है और उन्हें राजनीतिक स्पेक्ट्रम के पार विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह राजनीतिक उथल-पुथल न केवल फ्रांस की आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकती है, बल्कि यूरोजोन के लिए भी अनिश्चितता का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है। फ्रांस का बढ़ता सार्वजनिक ऋण और घाटा, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार कड़े कदम उठा रही है, देश की वित्तीय स्थिरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

फ्रांस एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ यूनियनों के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की घोषणा ने सरकार के वित्तीय संकट को और अधिक जटिल बना दिया है। 8 सितंबर का विश्वास मत और उसके बाद 18 सितंबर के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन, देश के राजनीतिक भविष्य और आर्थिक स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होंगे। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि कैसे सामूहिक आवाजें और आर्थिक नीतियां एक-दूसरे को गहराई से प्रभावित करती हैं, और कैसे एक संतुलित, समावेशी दृष्टिकोण सभी के लिए स्थायी समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह समय है कि सभी पक्ष मिलकर समाधान खोजें जो राष्ट्र के व्यापक हित में हों।

स्रोतों

  • Reuters

  • Reuters

  • Reuters

  • AP News

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