एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले में, अमेरिकी अपीलीय अदालत ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ अवैध थे। यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियों अधिनियम (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति के अधिकार की व्याख्या पर केंद्रित है, जो राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति को आयात को विनियमित करने की शक्ति प्रदान करता है। अदालत ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया कि IEEPA राष्ट्रपति को ऐसे व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। यह निर्णय 14 अक्टूबर, 2025 तक प्रभावी रहेगा, जिससे ट्रम्प प्रशासन को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अवसर मिलेगा।
यह मामला छोटे अमेरिकी व्यवसायों और 12 डेमोक्रेटिक-नेतृत्व वाले राज्यों द्वारा दायर मुकदमों से उत्पन्न हुआ है। इन वादियों का तर्क था कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने के लिए अधिकृत नहीं करता है, और यह कि संविधान के अनुसार, टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि IEEPA में टैरिफ या उसके समान शब्दों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, और न ही इसमें राष्ट्रपति की शक्ति पर स्पष्ट सीमाएं हैं।
पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस फैसले को "अत्यधिक पक्षपातपूर्ण" बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है और विश्वास व्यक्त किया है कि सुप्रीम कोर्ट इसे पलट देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ को हटाने से देश के लिए "एक बड़ी आपदा" होगी। दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय अमेरिकी व्यापार नीति और कार्यकारी तथा विधायी शाखाओं के बीच शक्ति संतुलन के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है। ऐतिहासिक रूप से, अमेरिकी संविधान कांग्रेस को कर, शुल्क, आयात शुल्क और उत्पाद शुल्क लगाने और एकत्र करने की शक्ति प्रदान करता है। हालांकि, समय के साथ, कांग्रेस ने राष्ट्रपति को व्यापार समझौतों पर बातचीत करने और टैरिफ दरों को समायोजित करने के लिए कुछ अधिकार सौंपे हैं। 1934 के पारस्परिकता व्यापार समझौते अधिनियम ने राष्ट्रपति को कांग्रेस की अतिरिक्त मंजूरी के बिना टैरिफ दरों को 50% तक बदलने और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर बातचीत करने की क्षमता दी।
इस फैसले का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ सकता है। जुलाई 2025 तक एकत्र किए गए $159 बिलियन के टैरिफ संभावित रूप से वापस किए जा सकते हैं। छोटे व्यवसायों पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ा है, क्योंकि कई को टैरिफ के कारण बढ़ी हुई लागतों का सामना करना पड़ा है, जिससे उन्हें कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं या अपने लाभ मार्जिन को कम करना पड़ा है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि इन टैरिफ नीतियों के परिणामस्वरूप अमेरिकी परिवारों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला अमेरिकी व्यापार नीति के भविष्य और राष्ट्रपति की आर्थिक शक्तियों की सीमा पर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय इस बात को निर्धारित करेगा कि क्या राष्ट्रपति के पास इस तरह के व्यापक टैरिफ लगाने की शक्ति है, और यह अमेरिकी व्यापार और अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगा।