
मध्य पूर्व के संघर्ष से उपजे तेल संकट के प्रभाव को कम कर रहे हैं इलेक्ट्रिक वाहन
लेखक: Tatyana Hurynovich

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कच्चा तेल हमेशा से एक सबसे संवेदनशील और कमजोर कड़ी रहा है, लेकिन वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) इस निर्भरता को तेजी से कम करने का काम कर रहे हैं। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न होने वाले संभावित ईंधन संकट के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में इन आधुनिक वाहनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। परिवहन क्षेत्र में हो रहा यह क्रांतिकारी बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।
एनालिटिकल सेंटर 'एम्बर' (Ember) की एक हालिया और विस्तृत रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों ने वैश्विक स्तर पर प्रतिदिन 1.7 मिलियन बैरल तेल की खपत को विस्थापित कर दिया है। यह आंकड़ा 2024 के 1.3 मिलियन बैरल के मुकाबले एक बहुत बड़ी छलांग को दर्शाता है। तेल की मांग में आई यह कमी किसी छोटे तेल उत्पादक देश के कुल दैनिक उत्पादन के बराबर है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति और मांग के संतुलन को बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो रही है।
एम्बर द्वारा प्रस्तुत किए गए ये अनुमान काफी संतुलित और रूढ़िवादी माने जा रहे हैं, जबकि ब्लूमबर्ग (Bloomberg) के हालिया विश्लेषण में यह संख्या और भी अधिक प्रभावशाली बताई गई है। ब्लूमबर्ग के शोध के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों ने प्रतिदिन लगभग 2.3 मिलियन बैरल तेल की मांग को बाजार से बाहर कर दिया है। यह मात्रा ईरान के कुल तेल निर्यात (2.4 मिलियन बैरल) के लगभग बराबर है, जो स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रिक क्रांति कितनी तीव्रता के साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के प्रभुत्व को चुनौती दे रही है।
वर्ष 2025 तक की स्थिति देखें तो वैश्विक कार बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 20% के आंकड़े को पार कर गई है। विशेष रूप से यूरोप और चीन जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह हिस्सेदारी 25% से 30% के बीच पहुंच चुकी है। पिछले एक वर्ष के दौरान बैटरी की कीमतों में 15% से 20% की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों का परिचालन पेट्रोल कारों की तुलना में कहीं अधिक किफायती हो गया है। आज के समय में उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की लागत में लगभग 60% से 70% तक की बड़ी बचत देखी जा रही है।
एम्बर के प्रमुख विशेषज्ञ दान वाल्टर (Daan Walter) ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि तेल आज भी वैश्विक अर्थव्यवस्था की 'अकिलीज़ हील' यानी सबसे कमजोर नस बना हुआ है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि 1970 के दशक के ऊर्जा संकटों के विपरीत, आज हमारे पास इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में एक ठोस और वास्तविक विकल्प मौजूद है। ये वाहन न केवल पेट्रोल कारों के मुकाबले निरंतर सस्ते और सुलभ हो रहे हैं, बल्कि विभिन्न देशों को भविष्य के संभावित आर्थिक झटकों और ऊर्जा संकटों से सुरक्षित रखने में भी एक सुरक्षा कवच की तरह मदद कर रहे हैं।
यह सकारात्मक प्रवृत्ति आने वाले समय में और भी अधिक मजबूत होने की संभावना है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के दीर्घकालिक अनुमानों के अनुसार, 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहन प्रतिदिन 5 से 7 मिलियन बैरल तेल की मांग को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। इसके साथ ही, वर्ष 2025 में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में 40% की भारी वृद्धि और यूरोपीय संघ एवं अमेरिका में बैटरी उत्पादन पर बढ़ते निवेश ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों को काफी हद तक कम कर दिया है। अंततः, मध्य पूर्व का वर्तमान संकट परिवहन क्षेत्र के 'विद्युतीकरण' के लिए एक बड़े उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है, जो पूर्ण ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर एक निर्णायक कदम होगा।
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