
यह फ़ोटो केवल चित्रण के लिए है।
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लेखक: Tatyana Hurynovich

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स्कॉटिश एयरलाइन Loganair ने यूनाइटेड किंगडम के विमानन इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए दूरदराज के क्षेत्रों में डाक वितरण के लिए देश का पहला पूर्णतः इलेक्ट्रिक विमान लॉन्च किया है। Loganair ने अमेरिकी कंपनी BETA Technologies द्वारा विकसित ALIA CTOL इलेक्ट्रिक विमान को अपने परिचालन बेड़े में शामिल किया है। इस ऐतिहासिक सेवा की शुरुआत स्कॉटलैंड के Glasgow और Dundee के बीच डाक मार्गों से की गई है। यह परियोजना केवल एक प्रोटोटाइप या परीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि Royal Mail के साथ मिलकर किया जा रहा एक वास्तविक वाणिज्यिक संचालन है, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक परिस्थितियों में विमान के प्रदर्शन का सटीक डेटा एकत्र करना है।
तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो ALIA CTOL विमान की घोषित उड़ान सीमा 336 समुद्री मील (nautical miles) है और इसकी माल ढोने की क्षमता 560 किलोग्राम तक है। इस विमान का शोर स्तर अत्यंत कम है, जो इसे घनी आबादी वाले शहरों के ऊपर से उड़ान भरने के लिए विशेष रूप से अनुकूल बनाता है। Loganair के CEO, Luke Farajallah ने इस अवसर पर कहा कि यह यूरोपीय विमानन क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाला दिन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कार्यक्रम केवल भविष्य की कल्पनाओं या महत्वाकांक्षाओं के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक ठोस उड़ान कार्यक्रम है जो हमारे नेटवर्क पर वास्तविक डेटा प्रदान करेगा कि एक इलेक्ट्रिक विमान वाणिज्यिक वातावरण में कैसे कार्य करता है।
क्षेत्रीय और डाक मार्गों पर इलेक्ट्रिक विमानों का उपयोग कार्बन उत्सर्जन (CO2) को कम करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जहाँ बैटरी तकनीक वर्तमान में सबसे अधिक प्रभावी है। हालांकि लंबी दूरी की उड़ानों के लिए अभी भी SAF (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल) या हाइड्रोजन ईंधन की आवश्यकता बनी रहेगी, लेकिन यह परियोजना एक बड़े वैश्विक रुझान की पुष्टि करती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 के दशक तक लगभग 10 से 20 प्रतिशत क्षेत्रीय उड़ानें पूरी तरह से शून्य-उत्सर्जन वाली हो सकती हैं।
इलेक्ट्रिक उड़ानों के फायदे केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने तक ही सीमित नहीं हैं। इलेक्ट्रिक मोटर अपने स्वभाव से ही पारंपरिक दहन इंजनों की तुलना में बहुत शांत होते हैं, जिससे हवाई अड्डों के आसपास के क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण में भारी कमी आती है। विभिन्न शोध इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि NASA ने 500 मीटर की ऊंचाई पर इन विमानों का शोर स्तर केवल 38 डेसिबल दर्ज किया है, जबकि पारंपरिक इंजनों का शोर 60 डेसिबल तक होता है। इसके अतिरिक्त, SciLead की 2023 की रिपोर्ट 'इलेक्ट्रिक मोटर्स इन एविएशन' के अनुसार, इन विमानों के रखरखाव (Maintenance) की लागत में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा सकती है।
विमानों के शांत संचालन से उन छोटे शहरी हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करने की संभावना बढ़ गई है, जिन्हें पहले शोर संबंधी कड़े प्रतिबंधों के कारण बंद करना पड़ा था। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक मोटरों की यांत्रिक सरलता न केवल रखरखाव के खर्च को कम करती है, बल्कि परिचालन दक्षता में भी सुधार करती है। यह आर्थिक लाभ एयरलाइनों के लिए इस नई तकनीक को अपनाने का एक बहुत ही ठोस और आकर्षक कारण प्रस्तुत करता है।
इन सफलताओं के बावजूद, इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने की राह में कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। वर्तमान में बैटरी के वजन और शक्ति का अनुपात एक बड़ी सीमा है, जिसके कारण इलेक्ट्रिक विमानों का उपयोग केवल कम दूरी और सीमित यात्री क्षमता तक ही संभव है। लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए केवल बैटरी पर आधारित प्रणालियां फिलहाल व्यावहारिक नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर, 5000 किलोमीटर से अधिक की उड़ान के लिए बैटरी का वजन विमान के कुल वजन से भी अधिक हो जाएगा, जिसके लिए सॉलिड-स्टेट या Li-S (लिथियम-सल्फर) बैटरी तकनीक में बड़े शोध की आवश्यकता है।
अंततः, हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे में भी व्यापक बदलाव और आधुनिकीकरण की आवश्यकता है ताकि फास्ट चार्जिंग की सुविधा प्रदान की जा सके। एक साथ कई विमानों को चार्ज करने के लिए आवश्यक बिजली ग्रिड क्षमता विकसित करना एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है, जिसके लिए सरकारों, ऊर्जा प्रदाताओं और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय अनिवार्य है। वर्तमान में FAA (Federal Aviation Administration), EASA (European Union Aviation Safety Agency) और BETA जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं ताकि भविष्य की विमानन तकनीक को धरातल पर उतारा जा सके।