A massive clump of dark matter may lurk in the Milky Way sciencenews.org/article/dark-m…
यह माना गया है कि आकाशगंगाओं के चारों ओर डार्क मैटर का हाला कई क्लम्प्स से बना होता है जिन्हें सबहैलो कहा जाता है (इस सिमुलेशन में चमकीले धब्बे दिखते हैं)।
साझा करें
द्वारा संपादित: Uliana Soloveva
A massive clump of dark matter may lurk in the Milky Way sciencenews.org/article/dark-m…
यह माना गया है कि आकाशगंगाओं के चारों ओर डार्क मैटर का हाला कई क्लम्प्स से बना होता है जिन्हें सबहैलो कहा जाता है (इस सिमुलेशन में चमकीले धब्बे दिखते हैं)।
खगोलविदों ने सौर मंडल के अत्यंत निकट डार्क मैटर के एक विशाल उप-प्रभामंडल (subhalo) की उपस्थिति के पुख्ता और विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। यह महत्वपूर्ण अवलोकन पल्सर की उच्च सटीकता के उपयोग से संभव हुआ है, जो अंतरिक्ष में सटीक घड़ी या 'कॉस्मिक क्रोनोमीटर' की तरह कार्य करते हैं। यह परिणाम उन आधुनिक ब्रह्मांडीय मॉडलों के साथ पूरी तरह मेल खाता है, जो यह भविष्यवाणी करते हैं कि हमारी आकाशगंगा, मंदाकिनी (Milky Way), डार्क मैटर के एक व्यापक और विसरित प्रभामंडल से घिरी हुई है, जिसमें छोटे-छोटे सघन समूह या उप-प्रभामंडल समाहित होते हैं।
इस खोज का विस्तृत विवरण 29 जनवरी, 2026 को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'फिजिकल रिव्यू लेटर्स' (Physical Review Letters) में प्रकाशित एक शोध पत्र में दिया गया है। यह अध्ययन पल्सर की एक जोड़ी से प्राप्त संकेतों के समय (timing) में होने वाले सूक्ष्म और सह-संबंधित परिवर्तनों को रिकॉर्ड करने पर आधारित है। चूंकि डार्क मैटर प्रकाश के साथ किसी भी प्रकार की अंतःक्रिया नहीं करता है, इसलिए इसकी उपस्थिति का पता केवल इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के माध्यम से ही लगाया जा सकता है। हंट्सविले में अलबामा विश्वविद्यालय की डॉ. सुकन्या चक्रवर्ती के नेतृत्व में अनुसंधान दल ने इस बाइनरी पल्सर प्रणाली पर पड़ने वाले गुरुत्वाकर्षण प्रभाव का गहन विश्लेषण किया है।
गुरुत्वाकर्षण में पाई गई यह हलचल एक ऐसे अदृश्य पिंड की ओर संकेत करती है जिसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से लगभग 10 मिलियन (1 करोड़) गुना अधिक होने का अनुमान है और यह कई सौ प्रकाश वर्ष के क्षेत्र में फैला हुआ है। शोध दल ने इस बात की पुष्टि की है कि गणना किए गए विशिष्ट क्षेत्र में तारे, गैस के बादल या अन्य कोई भी दृश्य वस्तु मौजूद नहीं है जो इस द्रव्यमान के अनुरूप हो, जो स्पष्ट रूप से इस पिंड के डार्क मैटर होने की पुष्टि करता है। यह संभावित उप-प्रभामंडल सूर्य से लगभग 3260 प्रकाश वर्ष या एक किलोपार्सेक की दूरी पर स्थित पाया गया है।
इस शोध में अपनाई गई कार्यप्रणाली मुख्य रूप से 'पल्सर टाइमिंग' पर केंद्रित थी, जहाँ तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे ब्रह्मांड के सबसे सटीक समय मापक के रूप में कार्य करते हैं। दो ऐसे तारों के बीच की कक्षीय अवधि में होने वाले सूक्ष्म व्यवधान किसी भी नजदीकी भारी वस्तु द्वारा उत्पन्न त्वरण (acceleration) को उजागर करते हैं। वैज्ञानिकों ने पल्सर के एक बड़े डेटासेट का अध्ययन किया, जिसमें जांच की गई कुल 53 प्रणालियों में से एक विशेष जोड़ी से सबसे महत्वपूर्ण संकेत प्राप्त हुए। इस दौरान दर्ज किया गया त्वरण संकेत लगभग 10^-9 सेमी/सेकेंड^2 आंका गया है।
पल्सर त्वरण का उपयोग करने वाला यह शोध पहली बार बाइनरी और एकल पल्सर के त्वरण क्षेत्र का विश्लेषण करके आकाशगंगा के भीतर डार्क मैटर उप-प्रभामंडल के गुणों को परिभाषित करने का अवसर प्रदान करता है। यदि भविष्य के अध्ययनों में इस खोज की पुष्टि हो जाती है, तो यह हमारी आकाशगंगा के भीतर पहचाना गया इस पैमाने का पहला डार्क मैटर उप-प्रभामंडल होगा। इस तरह की खोज विभिन्न ब्रह्मांडीय मॉडलों की सीमाओं को निर्धारित करने और डार्क मैटर की रहस्यमयी प्रकृति को समझने के लिए एक सीधा और शक्तिशाली वैज्ञानिक उपकरण साबित होगी।
डॉ. चक्रवर्ती ने रेखांकित किया कि उप-प्रभामंडल डार्क मैटर के सैद्धांतिक मॉडलों का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, और अब वैज्ञानिकों के पास उन्हें खोजने का एक सटीक साधन उपलब्ध है, जो पिछले किसी भी तरीके की तुलना में द्रव्यमान का बेहतर अनुमान लगाने में मदद करता है। हालांकि ऐसे समूहों के अस्तित्व की भविष्यवाणी सिद्धांतों द्वारा बहुत पहले की जा चुकी थी, लेकिन उनका प्रत्यक्ष अवलोकन अब तक एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। इस खोज से 'लापता उपग्रह समस्या' (missing satellites problem) के समाधान की भी उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से सैद्धांतिक सिमुलेशन और वास्तविक अवलोकनों के बीच एक विसंगति बनी हुई थी।
Science News
ResearchGate
AZoQuantum
nasaspacenews.com
The Anomalously High Abundance of Deuterium in 3I/ATLAS avi-loeb.medium.com/the-anomalousl… Deuterium to hydrogen (D/H) ratios in methane (CH4) and other molecules within the solar system and beyond.
Rather than standing out for its brightness or mass, the star PicII-503 draws attention because of its chemistry. Located in the ultra-faint dwarf galaxy Pictor II, it contains an extraordinarily low amount of iron, less than one forty-thousandth of the Sun’s, making it one of
Astronomers Just Reconstructed a Galaxy’s 12-Billion-Year History scitechdaily.com/astronomers-ju… An artist’s impression shows the giant spiral galaxy NGC 1365 as it collides and merges with a smaller companion galaxy, stirring up star formation and redistributing gas and heavy elements