The winter solstice brings the least amount of daylight and the longest night. fox2detroit.com/news/winter-so…
शीतकालीन संक्रांति दिन में सबसे कम प्रकाश लाती है और सबसे लंबी रात होती है।
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द्वारा संपादित: Tetiana Martynovska
The winter solstice brings the least amount of daylight and the longest night. fox2detroit.com/news/winter-so…
शीतकालीन संक्रांति दिन में सबसे कम प्रकाश लाती है और सबसे लंबी रात होती है।
21 दिसंबर 2025 को उत्तरी गोलार्ध में शीतकालीन संक्रांति का खगोलीय क्षण आया, जिसने वर्ष की सबसे कम सूर्य प्रकाश अवधि और सबसे लंबी रात को चिह्नित किया। यह महत्वपूर्ण खगोलीय घटना पृथ्वी के अपने कक्षीय तल के सापेक्ष लगभग 23.5 डिग्री के अक्षीय झुकाव का प्रत्यक्ष परिणाम है, जैसा कि खगोल विज्ञान के सिद्धांतों द्वारा स्थापित है। इस स्थिति में, सूर्य की किरणें मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं, जिसके कारण उत्तरी गोलार्ध को सूर्य की रोशनी न्यूनतम समय के लिए प्राप्त होती है।
December 21: The winter solstice marks the shortest day and longest night of the year as the Earth's axial tilt positions the Northern Hemisphere farthest from the Sun. ✍️
December 21: शीतकालीन विषुव वर्ष के सबसे छोटे दिन और सबसे लंबी रात को चिह्नित करता है।
ग्रीस के एथेंस में, इस विशेष दिन पर सूर्योदय लगभग 07:37 AM पर हुआ और सूर्यास्त लगभग 05:09 PM पर दर्ज किया गया। हालांकि, विभिन्न स्थानों पर दिन की अवधि भिन्न होती है; उदाहरण के लिए, दिल्ली में दिन लगभग 10 घंटे 19 मिनट का रहा। भारतीय समयानुसार, 2025 में यह खगोलीय क्षण रात 8 बजकर 33 मिनट पर घटित हुआ। इस घटना के बाद, उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि धीरे-धीरे बढ़ने लगती है, जिसे भारत में 'दिन फिरना' भी कहा जाता है, और यह क्रमिक वृद्धि अगले महत्वपूर्ण खगोलीय बिंदु, वसंत विषुव, जो लगभग 20 मार्च 2026 को अपेक्षित है, तक जारी रहेगी।
इस खगोलीय परिवर्तन के साथ ही, दक्षिणी गोलार्ध वर्तमान में अपनी ग्रीष्मकालीन संक्रांति का अनुभव कर रहा है, जो वहां वर्ष की सबसे लंबी अवधि के सूर्य प्रकाश को दर्शाता है। पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण ही मौसमों का यह वार्षिक चक्र संभव होता है; जब उत्तरी ध्रुव सूर्य से दूर झुकता है, तो उत्तरी गोलार्ध में शीतकाल होता है, जबकि दक्षिणी ध्रुव सूर्य की ओर झुकने के कारण वहां ग्रीष्मकाल होता है। यह विपरीत स्थिति वर्ष के छह महीने बाद बदल जाती है, जब दक्षिणी गोलार्ध में सर्दियाँ और उत्तरी गोलार्ध में गर्मियाँ होती हैं।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से, संक्रांति का महत्व गहरा रहा है, जिसे कई प्राचीन सभ्यताओं में 'सूर्य के जन्म' के प्रतीक के रूप में मनाया जाता था, जो नवीनीकरण और ऊर्जा के पुनरुत्थान का संकेत देता है। इस महत्व का प्रमाण इंग्लैंड में स्थित स्टोनहेंज स्मारक में मिलता है, जिसके मुख्य पत्थर शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन संक्रांति के सूर्य चाप के साथ संरेखित होते हैं, जो लगभग 3000 ईसा पूर्व से अस्तित्व में है। आयरलैंड गणराज्य में स्थित न्यूग्रेन्ज कब्रगाह, जो 5,000 वर्ष से अधिक पुरानी है, शीतकालीन संक्रांति के दौरान कक्ष के पूर्ण प्रदीपन के साथ एक और प्राचीन प्रमाण प्रस्तुत करती है।
भारत में, यह दिन पवित्र हिंदू त्योहार मकर संक्रांति की शुरुआत का प्रतीक है, जबकि चीन में इसे डोंग्ज़े त्योहार के रूप में मनाया जाता है। खगोलीय रूप से, 21 दिसंबर 2025 को शीतकालीन संक्रांति का अनुभव हुआ, हालांकि यह तिथि ऐतिहासिक रूप से भिन्न रही है; सबसे पहले दर्ज की गई शीतकालीन संक्रांति 23 दिसंबर 1903 को हुई थी, और यह अनुमान है कि यह तिथि 2303 तक फिर से उस तारीख पर नहीं आएगी।
एक रोचक तथ्य यह है कि इस दिन दोपहर के समय व्यक्ति की परछाई वर्ष के किसी भी अन्य दिन की तुलना में सबसे लंबी दिखाई देती है, क्योंकि सूर्य आकाश में अपने सबसे निचले बिंदु पर होता है। पृथ्वी के अक्षीय झुकाव में परिवर्तन, जो कि भूजल के अत्यधिक निष्कर्षण जैसे कारकों से प्रभावित हो सकता है, ग्रहीय गतिशीलता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है, जैसा कि 'जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स' में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है। इस प्रकार, 21 दिसंबर 2025 का दिन केवल सबसे छोटा दिन नहीं था, बल्कि यह पृथ्वी की गतिशीलता और मानव इतिहास में इसके गहरे सांस्कृतिक महत्व का एक वार्षिक अनुस्मारक भी था।
NewsIT
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