स्थायी प्रसन्नता के लिए दैनिक अभ्यास और तनाव का सकारात्मक पुनर्मूल्यांकन

द्वारा संपादित: Olga Samsonova

दीर्घकालिक प्रसन्नता का आधार आकस्मिक घटनाओं या भौतिक संपदा पर नहीं, बल्कि निरंतर दैनिक आदतों पर टिका होता है, जैसा कि प्रसन्नता रणनीतिकार जेसिका वीस ने रेखांकित किया है। वीस इस बात पर जोर देती हैं कि सर्वाधिक आनंदित व्यक्ति दस विशिष्ट अभ्यासों के माध्यम से अपने मस्तिष्क को सुख के लिए सक्रिय रूप से प्रशिक्षित करते हैं। इन प्रमुख अभ्यासों में घनिष्ठ मित्रता को प्राथमिकता देना, रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न होना, और सकारात्मक सूक्ष्म-क्षणों का आनंद लेना शामिल है। मानसिक थकान से रणनीतिक रूप से उबरना और सुदृढ़ व्यक्तिगत सीमाएँ निर्धारित करना कल्याण बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये आदतें एक सामूहिक सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करती हैं, जो उन्नति के लिए 'प्रकाश की श्रृंखला' के रूप में कार्य करती हैं।

इसके अतिरिक्त, शोध इस बात पर प्रकाश डालता है कि तनाव प्रकृति में अनुकूली है, जो यह संकेत देता है कि कोई वस्तु व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। डॉ. लौरा सोक्का तनाव के पुनर्मूल्यांकन की वकालत करती हैं, यह बताते हुए कि यह ध्यान केंद्रित करता है और कार्रवाई के लिए संसाधनों को जुटाता है। यह अवधारणा एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हंस सेली द्वारा प्रतिपादित 'यूस्ट्रेस' की अवधारणा से संबंधित है। यूस्ट्रेस को 'लाभकारी तनाव' के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसे हंस सेली ने 1976 में प्रस्तुत किया था, जो ग्रीक उपसर्ग 'यू' (अर्थात 'अच्छा') और अंग्रेजी शब्द 'स्ट्रेस' को मिलाकर बना है। यूस्ट्रेस एक सकारात्मक संज्ञानात्मक प्रतिक्रिया है जो स्वस्थ होती है या पूर्णता या अन्य सकारात्मक भावनाओं की अनुभूति कराती है।

डॉ. सोक्का एक सकारात्मक तनाव संबंध के लिए तीन चरणों का सुझाव देती हैं: तनाव का नामकरण करना, उसे स्वीकार करना, और आवश्यक परिवर्तन के लिए उसका उपयोग करना। यह संज्ञानात्मक बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि निरंतर नकारात्मक तनाव शरीर पर बोझ डालता है, जबकि सकारात्मक पुनर्मूल्यांकन बेहतर चयापचय स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। यूस्ट्रेस उन स्थितियों से उत्पन्न होती है जिन्हें व्यक्ति चुनौती या प्रेरणा के रूप में देखता है, जो प्रदर्शन को बेहतर बनाता है, जबकि डिस्ट्रेस (नकारात्मक तनाव) कार्यक्षमता को कम करता है। खुशी प्राप्त करने के लिए दैनिक दिनचर्या में छोटे लेकिन ठोस कदम उठाना आवश्यक है, न कि केवल बड़ी भौतिक सफलताओं की प्रतीक्षा करना।

जेसिका वीस द्वारा सुझाए गए दस विशिष्ट प्रशिक्षणों में, रचनात्मक आउटलेट में संलग्न होना और सकारात्मक अनुभवों को संजोना शामिल है, जो मानसिक लचीलेपन को बढ़ाता है। शोध से पता चलता है कि सामाजिक संबंध मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं; इसलिए परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना खुशी का एक प्रमुख स्रोत है। इसके विपरीत, खुद की तुलना दूसरों से करना, जैसा कि सोशल मीडिया के युग में आम है, मानसिक अशांति और तनाव को बढ़ाता है, जिससे खुशी दूर होती है। तनाव प्रबंधन के संदर्भ में, संज्ञानात्मक पुनर्गठन जैसी तकनीकें व्यक्तियों को उनके सोचने के तरीके को संशोधित करने में सहायता करती हैं, जिससे तनाव पैदा करने वाले विचारों को अधिक संतुलित विचारों से बदला जा सके।

डॉ. सोक्का द्वारा प्रस्तावित तीन-चरणीय प्रक्रिया—तनाव को पहचानना, स्वीकार करना, और उसका उपयोग करना—एक सक्रिय मुकाबला तंत्र है जो व्यक्ति को नियंत्रण की भावना प्रदान करता है। यह नियंत्रण की भावना महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब कोई व्यक्ति महसूस करता है कि तनाव उसके नियंत्रण से बाहर है, तो डिस्ट्रेस उत्पन्न होता है। सकारात्मक सोच और कृतज्ञता का अभ्यास, जैसा कि कई जीवनशैली विशेषज्ञों द्वारा सुझाया गया है, मानसिक दृष्टिकोण को सकारात्मक रूप से बदलता है और खुशी को बढ़ावा देता है। अंततः, स्थायी प्रसन्नता एक आंतरिक कार्य है जो निरंतर, सचेत दैनिक प्रयासों पर निर्भर करता है, चाहे वह व्यक्तिगत सीमाओं को स्थापित करना हो या सकारात्मक सूक्ष्म-क्षणों को महत्व देना हो, जो एक सुसंगत और समृद्ध जीवन की नींव रखते हैं। यह दृष्टिकोण भौतिकवाद से परे जाकर आंतरिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक मानसिक दृढ़ता प्राप्त होती है।

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स्रोतों

  • ФОКУС

  • Laitilan Sanomat

  • Psykologilehti

  • Laura Sokka

  • Laura Sokka | Akateeminen Kirjakauppa

  • ResearchGate GmbH

  • Psykopodiaa-podcast 205

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